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नाता तोड़ने वाले पिता बने सहारा: चर्चित हत्याकांड की आरोपी खामोशी से आई जेल से बाहर; परिजनों का गुस्सा फूटा, सीबीआई जांच की मांग

KHULASA FIRST

संवाददाता

29 अप्रैल 2026, 11:06 am
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नाता तोड़ने वाले पिता बने सहारा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में बड़ा मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को करीब 320 दिन (लगभग 10 महीने) बाद मेघालय की कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। अदालत ने अपने आदेश में शिलांग पुलिस की जांच, गिरफ्तारी प्रक्रिया और ट्रायल में देरी को लेकर गंभीर खामियां बताईं, जिसका सीधा फायदा आरोपी को मिला।

जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन ठीक से नहीं हुआ
कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन ठीक से नहीं हुआ। आरोपी को गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण नहीं बताए गए, दस्तावेज अधूरे थे, धाराओं में अंतर पाया गया और शुरुआती पेशी में वकील की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े हुए। इसके अलावा लंबे समय तक न्यायिक हिरासत और ट्रायल की धीमी रफ्तार 90 में से सिर्फ 4 गवाहों की गवाही भी जमानत का बड़ा आधार बनी।

खामोश बाहर आई सोनम, पिता बने जमानतदार
जेल से बाहर आने के बाद सोनम पूरी तरह खामोश नजर आई और मीडिया से बिना कुछ कहे अपने पिता के साथ रवाना हो गई। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि वही पिता, जिन्होंने पहले सोनम से नाता तोड़ लिया था, अब शिलांग पहुंचकर उसकी जमानत के लिए आगे आए। उन्होंने 50 हजार रुपए का मुचलका भरा और एक होटल संचालक को सह-जमानती बनाया। रिहाई के बाद सोनम को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

परिजनों को झटका, पुलिस पर उठे सवाल
जमानत की खबर मृतक के परिवार को उनके वकील से नहीं, बल्कि शिलांग पुलिस के फोन कॉल से मिली, जिससे नाराजगी और बढ़ गई। परिवार ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर लापरवाही बताया।

मां का फूटा गुस्सा
मृतक की मां उमा रघुवंशी ने फैसले पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “अब समझ आया कि कानून को अंधा क्यों कहा जाता है।” उन्होंने सोनम को इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड बताते हुए न्याय पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर सीबीआई जांच की मांग की। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि जब भी सोनम इंदौर आएगी, वह उससे अपने बेटे की हत्या का कारण जरूर पूछेंगी।

भाई ने जताया जान का खतरा
मृतक के भाई विपिन रघुवंशी ने भी कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जमानत की जानकारी देर से दी गई और यह फैसला अचानक लिया गया, जिससे कई संदेह पैदा होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी के परिवार का उसे पूरा समर्थन मिल रहा है और पैसों के प्रभाव से न्याय प्रभावित हो रहा है।

विपिन ने यह भी आशंका जताई कि अगर वे जमानत रद्द कराने शिलांग जाते हैं, तो उन पर हमला कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि उनके साथ कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सोनम के भाई गोविंद पर होगी।

पहले से कमजोर था केस
इस मामले में पहले गिरफ्तार कुछ आरोपियों को सबूतों के अभाव में अदालत बरी कर चुकी है, जिससे केस की नींव पहले ही कमजोर हो गई थी। अब मुख्य आरोपी को मिली जमानत ने अभियोजन पक्ष की चुनौती और बढ़ा दी है।

जमानत की शर्तें और आधार
कोर्ट ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान सोनम को शिलांग में ही रहना होगा और वह बिना अनुमति शहर नहीं छोड़ सकेगी। जमानत के प्रमुख आधार- गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर खामियां, संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन, अधूरे दस्तावेज और केस डायरी में त्रुटियां, शुरुआती पेशी में वकील की उपलब्धता स्पष्ट नहीं, लंबी न्यायिक हिरासत और धीमा ट्रायल, चार्जशीट दाखिल होने के कारण सबूतों से छेड़छाड़ की कम आशंका, स्थायी निवास और आपराधिक रिकॉर्ड का अभाव और महिला आरोपी होने के आधार पर नरमी।

अब भी जेल में बंद हैं ये आरोपी
राज कुशवाह – कथित प्रेमी और साजिश का मुख्य किरदार, विशाल चौहान – हमले में शामिल होने और फरारी में मदद का आरोप, आकाश राजपूत- घटनास्थल पर मौजूद रहकर सहयोग का आरोप, आनंद कुर्मी – शव ठिकाने लगाने में भूमिका।

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