चाची-भतीजी की आंखों से चार लोगों की जिंदगी में आएगी राेशनी: 12 घंटे के अंदर हुई थी मौत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
तलरेजा परिवार ने दुःख और संवेदना दोनों का अनूठा उदाहरण पेश किया। परिवार की दो पीढ़ियों चाची और भतीजी का 12 घंटे के भीतर अलग-अलग कारणों से निधन हो गया, लेकिन इस कठिन घड़ी में भी उन्होंने मानवता और ‘परमार्थ’ को चुना और नेत्रदान किया, जिससे चार दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजियारा फैल सकेगा।
12 घंटे में दो सदस्यों का निधन
गोपालबाग निवासी 84 वर्षीय मीरा देवी तलरेजा लंबे समय से बीमार चल रही थीं और गुरुवार देर रात उनका निधन हो गया। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि शुक्रवार को शिवधाम निवासी उनकी 35 वर्षीय भतीजी लता तलरेजा का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। लता अविवाहित थीं।
चार लोगों को मिली नई रोशनी
दुःख के बीच परिवार ने दोनों की आंखें दान करने का साहसिक निर्णय लिया। मुस्कान ग्रुप के जीतू बगानी, निविदिता गोयल, अमरलाल चुघ और नरेश फुंदवानी ने इस प्रक्रिया का समन्वय किया। इस कदम से चार दृष्टिहीन मरीजों को दृष्टि मिलने की संभावना है, जिससे उनके जीवन का अंधकार दूर होगा।
नेत्रदान क्यों जरूरी है
आई बैंकों के अनुसार नेत्रदान की गई आंखों में से लगभग 67–70 प्रतिशत सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण में उपयोग हो सकती हैं। दान की गई आंखों के ब्लड सैंपल की जांच में हेपेटाइटिस ए, बी, सी और एचआईवी जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जाती है। चिकित्सकीय या तकनीकी कारणों से लगभग 30 प्रतिशत कॉर्निया प्रत्यारोपण योग्य नहीं होती।
इंदौर में प्रतिमाह औसतन 100 नेत्रदान
इंदौर में प्रतिमाह औसतन 100 नेत्रदान होते हैं, जो जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो रहे हैं। तलरेजा परिवार का यह निर्णय न केवल उनके साहस और संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्पद उदाहरण भी बन गया है।
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