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इस ऐतहासिक स्थल का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर: किसकी सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा; हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई शुरू

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 फ़रवरी 2026, 2:46 pm
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इस ऐतहासिक स्थल का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर

खुलासा फर्स्ट, इंदौर/धार।
धार की प्रसिद्ध भोजशाला विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की सर्वे रिपोर्ट में कई अहम खुलासे सामने आए हैं। इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है।

ASI सर्वे की रिपोर्ट
धार के सभी पक्षकारों को ASI की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट मिल गई है। यह रिपोर्ट 2,189 पन्नों की है। अध्ययन के बाद स्पष्ट हुआ है कि भोजशाला, जो अब कमाल मौला मस्जिद के रूप में जानी जाती है, मूल रूप से 10-11वीं शताब्दी में परमार काल में बनाए गए मंदिर की संरचना थी। रिपोर्ट के आधार पर अगले दो सप्ताह में पक्षकार दावे और सुझाव देंगे। इसके बाद 16 मार्च को अगली सुनवाई होगी।

जल्दबाजी में तोड़ी गई संरचना
ASI रिपोर्ट में उल्लेख है कि मौजूदा मस्जिद की संरचना मूल मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। रिपोर्ट के वॉल्यूम वन, पेज 144, बिंदु 18 के अनुसार शिलालेख, मूर्तियों और स्थापत्य तत्वों से पता चलता है कि ऊपर का हिस्सा बाद में संशोधित किया गया और मस्जिद में बदल दिया गया।

आयतों में वर्णित विवरण
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1455 ईस्वी में हिजरी के खिलची बादशाह महमूद शाह की आयतें भी यहां अंकित थीं। इनमें लिखा है कि पुराने मठ के धर्म केंद्र की मूर्तियों को तोड़कर और हिंसक तरीके से मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित किया गया।

भोजशाला की मूर्तियां
मौके पर ASI को कुल 94 मूर्तियां मिलीं, जिनमें देवी-देवताओं के साथ गणेश, ब्रह्मा भगवान की पत्नी, भगवान नरसिंह, भैरव, और मानव-पशु आकृतियां (जैसे कुत्ता, बंदर, हाथी, घोड़ा, सांप) शामिल थीं। मस्जिद में मानव और पशु आकृतियों की अनुमति नहीं होती, इसलिए इन्हें काटकर और तराशकर हटाया गया। यह बदलाव पूर्वी स्तंभों पर स्पष्ट दिखाई देता है।

शिलालेख और वास्तुकला
सर्वे में दो शिलालेखों पर "ओम सरस्वती नमः" और "ओम नमः शिवाय" लिखा है। पहले यहां संस्कृत और प्राकृत का प्रयोग हुआ करता था। स्तंभों की कतार और वास्तुकला से स्पष्ट होता है कि ये मंदिर का हिस्सा थे। पहली कविता के अंत में "अवनिकुर्मा शतम्" लिखा है, जिसे महाराजाधिराज भोजदेव से जोड़ा जाता है। एक अन्य शिलालेख पर "परिजातमंजरी नाटिका" या "विजयश्री" लिखा है, जो देवी सरस्वती मंदिर के प्रदर्शन से जुड़ा है और शिक्षण केंद्र के अस्तित्व का प्रमाण देता है।

सर्वे टीम
इंदौर हाईकोर्ट के आदेश पर मार्च 2024 में यह सर्वे किया गया। प्रमुख ADG एएसआई आलोक त्रिपाठी थे। टीम में जुल्फिकार अली, डॉ. भुवन विक्रम, डॉ. गौतमी भट्टाचार्य, मनोज कुर्मी, डॉ. इजहार आलम हाश्मी, डॉ. आफताब हुसैन, डॉ. शंभूनाथ यादव और डॉ. नीरज मिश्रा शामिल थे।

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