देश का पहला जनभागीदारी आधारित सोलर प्लांट जलूद में शुरू: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया 60 मेगावाट परियोजना का लोकार्पण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खरगोन जिले के जलूद में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 271 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 60 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण किया। यह न केवल प्रदेश बल्कि देश की एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि है क्योंकि इसे ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से आम जनता के निवेश और सहयोग से तैयार किया गया है।
इंदौर नगर निगम देश का पहला ऐसा नगरीय निकाय बन गया है, जिसने नवाचारी वित्तीय प्रबंधन के जरिए हरित ऊर्जा के इस विशाल संयंत्र को धरातल पर उतारा है। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जलूद सोलर पावर प्लांट मध्यप्रदेश और देश के लिए एक मिसाल है।
सूर्य की किरणों को बिजली में बदलकर इंदौर नगर निगम अपने संसाधनों को समृद्ध करेगा। लगभग 60 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में भारत सरकार का पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है। ग्रीन बॉन्ड स्कीम के माध्यम से देश की जनता को इस परियोजना में साझेदार बनाया गया है, जो अपनी तरह का देश का प्रथम प्रयोग है।
मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय जनता व सरकार की नीतियों को दिया। उन्होंने याद दिलाया कि इस प्लांट की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2023 में रखी थी, जिसका सपना अब साकार हो गया है।
सोलर प्लांट से वह बिजली का बोझ कम होगा: भार्गव- इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस उपलब्धि के तकनीकी और जनभागीदारी वाले पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जलूद से ही नर्मदा का जल 70 किलोमीटर दूर इंदौर तक पहुंचता है, जिसमें काफी बिजली खर्च होती थी।
अब 300 करोड़ की लागत के इस 60 मेगावाट के सोलर प्लांट से वह बिजली का बोझ कम होगा। भार्गव ने गौरव के साथ बताया कि इंदौर नगर निगम देश का पहला नगरीय निकाय है जिसने ग्रीन बॉन्ड से फंड जुटाया है और इस संयंत्र में देश के 28 राज्यों के नागरिकों का योगदान लगा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने सभी प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर इस सपने को हकीकत में बदला है।
कार्यक्रम में महेश्वर विधायक राजकुमार मेव ने क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। गरिमामय समारोह में राज्यसभा सदस्य सुमेर सिंह सोलंकी, मध्य प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष प्रताप करोसिया, सांसद शंकर लालवानी, विधायक ऊषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया, सचिन बिरला, रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, महापौर परिषद सदस्य अभिषेक शर्मा, राजेंद्र राठौर, राजेश उदावत, नंदकिशोर पहाड़िया, मनीष शर्मा मामा, अश्विनी शुक्ल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।
कार्बन उत्सर्जन कम होने से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि इस प्लांट से दोहरा लाभ होगा। इससे न केवल इंदौर नगर निगम के बिजली बिलों में भारी कमी आएगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौर ऊर्जा से होने वाली बचत के कारण अगले 9 वर्षों में इस पूरी परियोजना की लागत वसूल हो जाएगी।
प्रदेश की ऊर्जा यात्रा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2002-03 तक राज्य की कुल उत्पादन क्षमता मात्र 5000 मेगावाट थी और बिजली की भारी किल्लत रहती थी, लेकिन आज प्रदेश बदल चुका है और बिजली उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर और नवाचारी बन गया है।
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