डेली कॉलेज में हुआ देश का पहला आईकेएस शास्त्रार्थ: गणित, खगोल सहित पांच विषयों पर बहस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारत की गहन सभ्यतागत बुद्धिमत्ता के एक ऐतिहासिक उत्सव के रूप में ‘आईकेएस शास्त्रार्थ 2026’ डेली कॉलेज में हुआ। देशभर से विद्वान आचार्य, दूरदर्शी शिक्षाविद् और विद्यार्थी शामिल हुए। प्राचार्य डॉ. गुनमीत बिंद्रा की दूरदर्शी पहल के रूप में परिकल्पित यह सम्मेलन देश में प्रथम आयोजन था जो भारतीय ज्ञान परंपरा (इंडिक नॉलेज सिस्टम्स) को समकालीन विमर्श के केंद्र में लाने और उन्हें वर्तमान चुनौतियों के समाधान हेतु जीवंत रूप में पुनर्परिभाषित किया।
मुख्य अतिथि अमी गनात्रा रहीं, जो अनरैवेल्ड श्रृंखला की चर्चित लेखिका हैं। उनके लेखन में महाभारत और रामायण की व्याख्या मूल संस्कृत स्रोतों के आधार पर आधुनिक संदर्भों में है। उनकी उपस्थिति ने सम्मेलन को विद्वत्ता की गरिमा और साहित्यिक सौष्ठव से समृद्ध किया, शास्त्रीय संस्कृत साहित्य और आधुनिक कथन-शैली के बीच एक सशक्त सेतु स्थापित हुआ।
पांच थीमैटिक स्ट्रैंड्स- सम्मेलन पांच विशिष्ट विषय-धाराओं (थीमैटिक स्ट्रैंड्स) पर आधारित था, जिनमें प्रत्येक भारत की बौद्धिक परंपरा के मूल आयाम को प्रतिबिंबित करता है। एक धारा में गणित, खगोलशास्त्र और प्राकृतिक विज्ञानों के अंतर्संबंध, दूसरी में आयुर्वेद, पारिस्थितिकी और समग्र जीवन-पद्धति पर विचार हुआ; तीसरी में धर्म, नैतिकता और तत्त्वमीमांसा का अन्वेषण किया गया।
राज्य-व्यवस्था, शासन और नागरिक व्यवस्था पर विमर्श तथा शिक्षा, ज्ञान-संरचना और बौद्धिक परंपराओं पर केंद्रित एक अन्य धारा भी थी। सभी धाराओं ने मिलकर भारत की सभ्यतागत विचारधारा की व्यापकता और गहराई को प्रतिबिंबित करने वाला एक समृद्ध बौद्धिक ताना-बाना प्रस्तुत किया।
प्रत्येक विषय-धारा के अंतर्गत भारत की गौरवशाली दार्शनिक और वैज्ञानिक परंपरा के महान चिंतकों को केंद्र में रखा गया। प्रत्येक चिंतक का प्रतिनिधित्व चार से पांच विद्यार्थियों के समूह द्वारा किया गया, जिन्हें “विचार-समूह” (थॉट ग्रुप्स) कहा गया। इन समूहों ने गहन अध्ययन, संवाद और मनन से अपने-अपने चिंतक के दृष्टिकोण को आत्मसात किया।
यह प्रक्रिया तीन चरणों वाले भारतीय ज्ञान प्रणाली सम्मेलन में परिणत हुई, जहां इन समूहों ने अपने विचार प्रस्तुत किए, सहपाठियों के साथ विमर्श किया और श्रोताओं के साथ संवाद स्थापित किया—जिससे यह आयोजन समकालीन दृष्टि से पुनरावलोकित सहस्राब्दियों पुराने विचारों का सजीव मंच बन गया।
प्रत्येक विषय-धारा का मार्गदर्शन प्रतिष्ठित आचार्य द्वारा किया गया, जिनकी विद्वत्ता और व्यवहारिक अनुभव ने प्राचीन और आधुनिक के बीच सशक्त सेतु का निर्माण किया। गणित, खगोलशास्त्र और प्राकृतिक विज्ञान की धारा का नेतृत्व डॉ. शालिनी पांडे ने किया, जो जोहो में एक दक्ष एआई इंजीनियर, प्रतिष्ठित वैदिक गणित प्रशिक्षक हैं।
उन्होंने आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मगुप्त, बौधायन, पिंगला और कणाद जैसे ऋषियों के अवदान को रेखांकित किया। धर्म, नैतिकता और तत्त्वमीमांसा की धारा का मार्गदर्शन इंजीनियर रविसिंह चौधरी ने किया, जो भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं प्राकृतिक कृषि के विशिष्ट शोधकर्ता और लेखक हैं।
उन्होंने याज्ञवल्क्य, मैत्रेयी, आदि शंकराचार्य, कपिला, पतंजलि, पाणिनि और नागार्जुन जैसे ऋषियों के कार्यों पर प्रकाश डाला। राज्य-व्यवस्था, शासन और नागरिक व्यवस्था की धारा का निर्देशन डॉ. विनायक रजत भट ने किया, जो संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रतिष्ठित विद्वान हैं।
उन्होंने चरक, पुनर्वसु, सुश्रुत, नागार्जुन और अगस्त्य के अनुसंधानों और समाज में उनके अवदान पर विस्तार से चर्चा की। शिक्षा, ज्ञान-संरचना और बौद्धिक परंपराओं की धारा को डॉ. उपेंद्र भार्गव ने समृद्ध किया, जो महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि में सहायक प्राध्यापक हैं तथा प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्र और ज्योतिष के विद्वान हैं।
प्रत्येक आचार्य ने अपने समूहों के कार्यों की सराहना कर विद्यार्थियों की समझ और बौद्धिक परिपक्वता की प्रशंसा की। कहा विद्यार्थियों ने न केवल जटिल विचारों को आत्मसात किया, बल्कि उन्हें स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ समकालीन संदर्भों में पुनर्व्याख्यायित भी किया। आचार्यों ने संयोजकों (मॉडरेटर्स) के सूक्ष्म मार्गदर्शन, सार्थक हस्तक्षेप और संतुलित संचालन की भी प्रशंसा की।
आईकेएस शास्त्रार्थ क्लब की स्थापना की परिकल्पना
आभार प्रस्ताव में प्राचार्य डॉ. गुनमीत बिंद्रा ने अखिल भारतीय आईकेएस शास्त्रार्थ क्लब की स्थापना की परिकल्पना व्यक्त की, जिससे यह सम्मेलन एक वार्षिक राष्ट्रीय परंपरा के रूप में निरंतर आगे बढ़ सके।
उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासा, विनम्रता और सामूहिक अध्ययन भावना की सराहना कर कहा ये गुण आयोजन में परिलक्षित हुए। शास्त्रार्थ जैसे मंच भारत के सभ्यतागत मूल्यों से जुड़े हों और वैश्विक संदर्भों में संवाद करने में सक्षम हों।
30 विवि की रही भागीदारी- देशभर से लगभग 30 विद्यालयों ने भाग लिया और डेली कॉलेज में इस भव्य बौद्धिक उत्सव का हिस्सा बने। यह आयोजन पारंपरिक प्रतियोगिता से परे एक सुव्यवस्थित बौद्धिक संगोष्ठी के रूप में सामने आया।
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