निगम बोला- पानी पीने लायक नहीं: सिर्फ इस्तेमाल करें; निगम नोट ले जाए और नेता वोट ले जाए, हम बोलें भी नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर नगर निगम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। करोड़ों रुपए का राजस्व जनता से वसूलने वाला निगम आज भी शहरवासियों को पीने योग्य पानी तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि खुद निगम अधिकारियों ने स्वीकार कर लिया कि सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं, केवल उपयोग के लिए है और इसकी जांच अभी जारी है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण मचे मौत के तांडव को अभी शहर भूला भी नहीं था कि अब तुलसी नगर, निपानिया क्षेत्र के रहवासी कई दिनों से गंदे और बदबूदार पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद निगम अधिकारियों तक आवाज तो पहुंची, लेकिन समाधान अब तक नहीं हुआ।
रहवासियों का आरोप है कि नलों से आने वाला पानी इतना गंदा है कि हाथ धोने के बाद भी बदबू नहीं जाती, लेकिन निगम प्रशासन सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है। जब टैक्स वसूली का समय आता है तो निगम की गाड़ियां सड़कों पर दौड़ती नजर आती हैं, नोटिस पर नोटिस जारी होते हैं, लेकिन सुविधाओं की बात आते ही पूरा सिस्टम गायब दिखाई देता है।
नालों जैसा बदबूदार और काला पानी आ रहा
लोगों का कहना है कि तुलसी नगर में नलों से नालों जैसा बदबूदार और काला पानी आ रहा है। पानी को दूर से देखना तक मुश्किल हो जाता है। घरेलू उपयोग तो दूर, कपड़े धोना और नहाना भी जोखिम भरा बन गया है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से पानी खरीदने को विवश हैं।
लगातार शिकायतों के बावजूद निगम अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन की औपचारिकता निभाई जा रही है। रहवासियों का आरोप है कि अधिक शिकायत करने पर कुछ अधिकारियों ने साफ शब्दों में कह दिया नर्मदा कनेक्शन कटवा लो। इस कथित बयान ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया है।
नागरिकों का कहना है कि टैक्स लेने वाला तंत्र जब सुविधा देने की बारी आती है तो जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेता है। एक समय देशभर में सफाई में नंबर-वन का तमगा हासिल करने वाला इंदौर अब मूलभूत सुविधाओं के संकट से जूझता दिखाई दे रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर शहर को किसकी नजर लग गई, या फिर वे कमियां जिन्हें वर्षों तक दबाकर रखा गया, अब एक-एक कर सामने आ रही हैं।
साफ पानी भी नसीब नहीं हो रहा
विडंबना यह है कि शहर की जनता टैक्स दे रही है, बिल भर रही है, लेकिन बदले में पीने का साफ पानी भी नसीब नहीं हो रहा। विधायक अपने घरों में बैठकर बयान दे रहे हैं, मंत्री मीडिया पर आरोप मढ़ देते हैं और जो पत्रकार समस्या उजागर करते हैं उन्हें ही ब्लैकमेलर कह दिया जाता है।
आखिर सवाल वही खड़ा है ,जनता ने वोट नेताओं को दिया और टैक्स निगम को, लेकिन दोनों लेने के बाद क्या जनता को उसके अधिकार से वंचित कर दिया गया? रहवासियों का कहना है कि यदि पानी पीने योग्य नहीं है तो निगम स्पष्ट बताए कि शहरवासियों को जिंदा रहने के लिए आखिर भरोसा किस पर किया जाए।
निगम अधिकारियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन तब तक शहर की जनता दूषित पानी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच खुद को असहाय महसूस कर रही है।
मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं
शहर के पॉश इलाकों में गिने जाने वाले तुलसी नगर की चमक अब हकीकत के सामने फीकी पड़ती नजर आ रही है। इलाके के सामने बड़े मॉल निर्माणाधीन हैं, आसपास ऊंची-ऊंची हाईराइज इमारतें खड़ी हो चुकी हैं और पासपोर्ट ऑफिस खुलने के बाद यहां आवाजाही भी लगातार बढ़ गई है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नाम पर रहवासियों को सिर्फ परेशानी और प्रशासनिक उदासीनता ही मिल रही है।
रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम को अब केवल राजस्व वसूली से मतलब रह गया है। पानी या प्रॉपर्टी टैक्स का बकाया होते ही निगम की पीली गैंग तुरंत घरों के सामने पहुंच जाती है, नोटिस चस्पा होते हैं और कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है, लेकिन जब नागरिक टैक्स के बदले साफ पानी और बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हैं, तो उनकी आवाज निगम के बहरे तंत्र तक पहुंच ही नहीं पाती।
जांच और सुधार के दावे केवल कागजों तक सीमित
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जहां निगम को जल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर और सतर्क होना चाहिए था, वहीं जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। शहर के कई इलाकों से बदबूदार और दूषित पानी सप्लाई की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन हर बार जांच और सुधार के दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने के बजाय गंदा पानी मिलना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब शहरवासी पूछ रहे हैं जब टैक्स समय पर देना अनिवार्य है, तो क्या साफ पानी देना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं?
तुलसी नगर इलाके में जो मकान का निर्माण हो रहा है उसके कारण कई जगह सीवरेज का पानी पाइप लाइन में मिल रहा था। कई जगह से लीकेज सुधारा गया है। आज भी कई जगह नगर निगम कर्मचारियों द्वारा सुधार कार्य किया जाएगा। शुरुआत में जो गंदा और नाले का पानी आ रहा था, उसमें सुधार हुआ है, लेकिन जल्द इस भी समस्या को दूर कर दिया जाएगा।
मकान के निर्माण के समय कई व्यक्ति सड़क के बाहर लगे चैंबर को मटेरियल से दबा देते हैं जिस कारण से यह पानी मिक्स हो रहा था, धीरे-धीरे सुधार है और जल्द पानी की सप्लाई को पहले जैसा कर दिया जाएगा। निगम कर्मचारी जो घरों पर पानी के सैंपल लेने जाते हैं वह समझ नहीं पाते रहवासियों से कैसे बात करना है। उन्होंने पानी को सूंघने से भी मना कर दिया था, लेकिन उसे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। - आकाश लश्करी, सब इंजीनियर
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