स्टे अवधि खत्म होते ही फिर चलेगा निगम का बुलडोजर: प्रभावितों में भारी आक्रोश
KHULASA FIRST
संवाददाता

मथुरावाला सहित चार व्यावसायिक निर्माणों को कोर्ट से स्टे, 124 बाधक हिस्से ढहाए
आरएनटी मार्ग पर महेश मोदी का मकान, बसंत रावत और हरिनारायण एंड ब्रदर्स को मिली राहत
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मधुमिलन चौराहा से छावनी तक प्रस्तावित मार्ग के चौड़ीकरण में बाधक बन रहे निर्माणों पर नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की। मार्ग में आ रहे 124 मकानों के बाधक हिस्सों को जमींदोज कर दिया गया।
कार्रवाई की कमान खुद निगम कमिश्नर ने संभाली। काम शुरू होने के बाद उन्होंने दो बार मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
इस कार्रवाई के दौरान आरएनटी मार्ग पर स्थित चार प्रमुख व्यावसायिक निर्माणों को न्यायालय से स्टे मिलने के कारण फिलहाल छोड़ दिया गया है। इनमें महेश मोदी का मकान, बसंत रावत, हरिनारायण एंड ब्रदर्स और मथुरावाला की दुकानें शामिल हैं।
इन निर्माणों पर कोर्ट से स्थगन आदेश होने की वजह से निगम ने बाधक हिस्से हटाने की कार्रवाई नहीं की। निगम प्रशासन के मुताबिक, न्यायालय से स्टे की अवधि समाप्त होने के बाद इन व्यावसायिक दुकानों के बाधक हिस्सों को हटाने के लिए एक बार फिर मुहिम चलाई जाएगी।
7 पोकलेन और 10 जेसीबी मशीनों ने हटाई बाधा... चौड़ीकरण का रास्ता साफ करने के लिए निगम की टीम सुबह भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के लिए 7 पोकलेन और 10 जेसीबी मशीनों को लगाया गया था।
इसके अलावा निगम के 150 अधिकारी-कर्मचारी और जिला प्रशासन व पुलिस के 150 जवान तैनात रहे, जिससे कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति न बिगड़ सके।
15 डंपर से मलबे को निर्धारित स्थान पर भेजा... मलबे के कारण यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए निगम ने मौके पर ही 15 डंपर तैनात किए थे। जैसे-जैसे बाधक हिस्से तोड़े गए, मलबे को तुरंत हटाकर निर्धारित स्थान पर भेजा गया। निगम प्रशासन के मुताबिक, पूरी कार्रवाई इस तरह प्लान की गई थी, जिससे आम जनता और यातायात को कम से कम असुविधा हो।
कार्रवाई के दौरान 40 साल पुराना अतिक्रमण हटा, नीचे से निकली प्याऊ
मुहिम के दौरान आरएनटी मार्ग पर कई चौंकाने वाले दृश्य भी सामने आए। मनीष सोनगरा फ्रेश फ्रूट की दुकान के बाधक हिस्से को हटा रही थी, तो दुकान के पीछे से एक प्याऊ निकल आई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, विगत 40 वर्षों से इसके आगे अतिक्रमण होने के कारण यह बंद हो गई थी और लोग इसके अस्तित्व को भूल चुके थे। बुलडोजर चलते ही जब आगे का अवैध ढांचा हटा, तो यह फिर सबके सामने आ गई।
निगम और प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद
कार्रवाई के दौरान निगम और प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद रहा। मौके पर कमिश्नर क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्त आकाश सिंह, अपर आयुक्त प्रखर सिंह, अपर आयुक्त अभय राजनगवंकर, कार्यपालन यंत्री ओपी कुशवाह, कार्यपालन यंत्री नरेश जायसवाल, रिमूवल प्रभारी अंकेश बिरथरे और रिमूवल सुपरवाइजर बबलू कल्याणे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
कोडियागंज से आरएनटी मार्ग बनने का सफर,300 साल पुराना इतिहास आया सामने
इस मार्ग के रहवासी प्रकाशचंद जायसवाल ने कार्रवाई के बीच क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर उनका लगभग 300 साल पुराना मकान है, जो सन 1735 का बना हुआ है।
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस रोड का नाम ‘कोडियागंज' हुआ करता था। इसके बाद इसका नाम बदलकर ‘ऊषागंज' किया गया और वर्तमान में इसे ‘रवींद्रनाथ टैगोर मार्ग' (आरएनटी मार्ग) के नाम से जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि होलकर स्टेट के जमाने में यह रोड महज 30 फीट की हुआ करती थी। उस दौर में जब होलकर सरकार ने नाली निर्माण के लिए रहवासियों से 5 फीट जमीन मांगी थी, तब जनता ने स्वेच्छा से आगे आकर पूरा सहयोग किया था। इस क्षेत्र का विकास हमेशा से आपसी सामंजस्य से होता आया है।
रहवासियों और व्यापारियों का फूटा गुस्सा, उठाए गंभीर सवाल
निगम की इस अचानक और ताबड़तोड़ कार्रवाई को लेकर प्रभावितों में भारी रोष और आक्रोश देखने को मिला। क्षेत्र के प्रभावित रहवासी प्रमोद बंसल ने निगम की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि निगम साल 2014 से लगातार सिर्फ नोटिस बांटता आ रहा है, लेकिन 2026 में आकर अचानक इस तरह से तोड़फोड़ करना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि निगम की कार्रवाई का यह तरीका बहुत गलत है, यह बिल्कुल वैसी ही बात हो गई जैसे किसी बंदर के हाथ में उस्तरा दे दिया गया हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि पोकलेन मशीनों के जरिए सिर्फ बाधक हिस्सा हटाने के बजाय भारी नुकसान करने की नीयत से बर्बरतापूर्वक तोड़फोड़ की जा रही है, जिससे मुख्य इमारतों को भी खतरा पैदा हो गया है।
चौड़ीकरण शहर के विकास के लिए जरूरी, सख्त पार्किंग नियम लागू करना चुनौती
इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश बोथरा ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि वर्ष 2011 में जब मनीष सिंह कमिश्नर थे, तब भी यह मुहिम चली थी, लेकिन किन्हीं राजनीतिक कारणों से रुक गई थी। लगभग 14-15 साल बाद अब यह कार्रवाई दोबारा हुई है, जिसकी शहर को नितांत आवश्यकता थी।
मास्टर प्लान के अंतर्गत यहां 80 फीट की सड़क प्रस्तावित है और शहर के विकास की गति को देखते हुए सड़कों का चौड़ा होना बेहद जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि लोगों का नुकसान होने के बाद भी अगर क्षेत्र की व्यवस्था नहीं सुधरी, दुकानों के सामने बेतरतीब पार्किंग होती रही या दुकानदारों ने बाहर फिर से अतिक्रमण कर लिया, तो इस पूरी कार्रवाई पर पानी फिर जाएगा।
प्रशासन को पार्किंग के नियम इतनी कड़ाई से लागू करने चाहिए कि दुकानों के सामने कोई ठेला, रिक्शा या अवैध पार्किंग न बन सके। इंदौर जब स्वच्छता में नंबर वन है, तो हम चाहते हैं कि यह ट्रैफिक प्रबंधन में भी नंबर वन बने।
उन्होंने प्रभावितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लोगों का नुकसान हुआ है, उनके प्रति मेरी संवेदना है। लेकिन जिन दुकानदारों की जगह बच गई है, जब यह पूरा क्षेत्र नए स्वरूप में सामने आएगा, तो इन दुकानों की कीमत और व्यापार कई गुना बढ़ जाएगा। ऐसा बदलाव शहर के दूसरे विकसित इलाकों में पहले भी देखा जा चुका है।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!