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जागी, उठी और सड़क पर आई कांग्रेस: असरदार रहा विरोध प्रदर्शन; चार घंटे चला कांग्रेस का चक्काजाम

KHULASA FIRST

संवाददाता

08 मई 2026, 1:57 pm
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जागी, उठी और सड़क पर आई कांग्रेस

चिलचिलाती धूप में 6 घंटे तक फंसे रहे वाहन चालक

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में अनियमितता समेत विभिन्न मुद्दों पर कल जिला कांग्रेस ने एबी रोड पर मेडिकेप्स चौराहा के नजदीक चार घंटे तक प्रभावी चक्काजाम किया।

इसमें बड़ी संख्या में किसान जुटे। इस दौरान चिलचिलाती धूप में लोग परेशान होते रहे। चक्काजाम में एक एंबुलेंस सहित बरात और यात्री बसें फंस गईं।

किसानों ने काफी देर बाद एंबुलेंस को रास्ता दिया। किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर करीब चार घंटे तक सड़क जाम रखी। इससे यात्री, विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग और ट्रक चालक तेज गर्मी में बेहाल होते रहे।

आंदोलन में विधायक विक्रांत भूरिया, बदनावर विधायक भैरोसिंह शेखावत, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी, इंदौर कांग्रेस जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और किसान कांग्रेस अध्यक्ष जीतू ठाकुर समेत कई नेता शामिल हुए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी कुछ देर रुककर अपनी बात रखी। दोपहर ढाई बजे चक्काजाम खत्म हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली।

चक्काजाम से मेडिकेप्स यूनिवर्सिटी की कक्षाएं प्रभावित हुईं और विद्यार्थी कॉलेज नहीं पहुंच सके। बरात की गाड़ी करीब एक घंटे तक अटकी रही। जयपुर से महू जा रही यात्री जयवंती सोनी तीन घंटे तक बस में फंसी रहीं।

वहीं पीथमपुर में नौकरी जॉइन करने जा रहे अर्जुन झा समय पर कंपनी नहीं पहुंच सके। धार के खलघाट और खरगोन-धार-बड़वानी सीमा क्षेत्र में भी प्रदर्शन हुआ।

हालांकि प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था, लेकिन किसान बिना डरे डटे रहे और चेतावनी दी कि समस्याएं हल नहीं हुईं तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

कांग्रेस अब जाकर मजबूत और सशक्त विपक्ष की राह पर बढ़ते हुए सड़क से सिंहासन की ओर कदमताल करने की कोशिश कर रही है। उसकी यह कदमताल नेशनल हाई-वे पर करीब 360 मिनट चले चक्काजाम व सड़क सत्याग्रह के रूप में सामने आई।

गुटों में लड़ मरने वाली कांग्रेस लंबे समय बाद अब एकजुट होती नजर आ रही है। प्रदेश के युवा नेतृत्व में इस समय उत्साह और ऊर्जा का संचार किसी तरह हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप खेती-किसानी के मुद्दों को लेकर कांग्रेस का 7 मई को सड़क सत्याग्रह सफल रहा।

कि सानों के मुद्दों पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन कल चक्काजाम के साथ सत्याग्रह के रूप में हुआ। गेहूं के समर्थन मूल्य या 2700 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से सरकार खरीदी नहीं करते हुए 2625 रुपए के भाव से खरीदी कर रही है।

इससे किसान नुकसान में हैं। सरकार को चाहिए कि भावांतर का प्रावधान गेहूं खरीदी में करे, लेकिन नहीं कर रही। कांग्रेस की मांग है कि गेहूं पर भावांतर लागू किया जाए। उपार्जन केंद्रों पर गेहूं की तुलाई नहीं हो पा रही।

अपनी उपज लेकर पहुंचे किसानों को 2 से 4 दिन तक लाइन में लगना पड़ रहा है। स्लॉट की बुकिंग भी लंबी वेटिंग के बाद हो रही है। इस पर किसानों को डर रहा है कि उनका गेहूं सरकार लेगी या नहीं।

सरकार कभी भी स्लॉट बुकिंग बंद कर सकती है, इसलिए किसान भयभीत हैं और गेहूं को स्टॉक करके रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है। किसान चाहते हैं कि अब उनका गेहूं सरकार जल्द खरीद ले, लेकिन इंतजाम नाकाफी हैं, जबकि मुख्यमंत्री दिन-रात इस प्रयास में लगे हैं कि किसानों को परेशान नहीं होना पड़े।

इसी सियासी उठापटक में कांग्रेस का प्रस्तावित सड़क सत्याग्रह अपने आप में सरकार के विरोध और किसानों के समर्थन में आंदोलन का एक बहुत ही बड़ा जनसमर्थन जताने वाला फैसला है।

इसीलिए कहा जा रहा है कि कांग्रेस वाकई खेती-किसानी से जुड़ी हुई केंद्र और राज्य की किसान विरोधी नीतियों को लेकर कितनी संजीदा है या फिर यह सब एक राजनीतिक औपचारिकता है?

किसानों के मुद्दे आंदोलन की असली वजह... प्रदेश के कई जिलों में इस बार गेहूं उपार्जन में लक्ष्य से कमी, भुगतान में देरी और प्राकृतिक आपदाओं के बाद मुआवजा न मिलने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।

किसान संगठनों का आरोप है कि समर्थन मूल्य का लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंच रहा। फसल बीमा योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। जमीन अधिग्रहण और गाइड लाइन दरों में भारी असमानता है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इस आंदोलन को जमीनी लड़ाई में बदल पाएगी या फिर यह सिर्फ मीडिया हेडलाइन तक सीमित प्रदर्शन बनकर रह जाएगा?

बयानबाजी का यह पैंतरा दिखावा तो नहीं?...खुलासा फर्स्ट ने पहले ही यह सवाल उठाया था कि कांग्रेस अक्सर किसानों के मुद्दों पर आक्रामक बयान देती है, लेकिन बयानों के बाद खामोश हो जाती है। धरना प्रदर्शन करती भी है, तो कई बार आंदोलन लंबी रणनीति के अभाव में कमजोर पड़ जाते हैं।

इस बार चुनौती साफ है- क्या कांग्रेस अपने दावों पर डटी रहेगी? या विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक पलायन की स्थिति बनेगी?

आरोप- जमीनी हकीकत से दूर सरकार...राज्य सरकार का कहना है कि किसानों के हित में लगातार फैसले लिए जा रहे हैं और उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जमीनी हकीकत से दूर है और किसानों की आवाज अनसुनी कर रही है।

राजनीतिक मायने : 2026 का बड़ा संकेत...यह ‘सड़क सत्याग्रह’ सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाले समय में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए राजनीतिक माहौल तैयार करने की कोशिश भी माना जा रहा है।

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