शहर बन गया मानवता की मिसाल: 10 दिनों में इतने देहदान, नेत्र और त्वचा दान; कई लोगों को मिला नया जीवन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लगातार मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता की नई मिसाल पेश कर रहा है। मां अहिल्या की नगरी में पिछले 10 दिनों के भीतर नौ लोगों के देहदान किए गए, जिसने पूरे प्रदेश में मानवता और परोपकार का प्रेरणादायी संदेश दिया है। देहदान से पहले इन सभी मामलों में नेत्रदान और त्वचा दान भी किया गया, ताकि जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी और जीवन मिल सके।
11 मई से 20 मई के बीच जिन लोगों के देहदान हुए उनमें रमेश बिल्लोरे, जीवनसिंह गिल, शंकरलाल यादव, महेंद्र केकरे, हेमलता नाहर, रामचंद्र जैसवानी, शैला चौरड़िया, शिशुपाल जुनेजा और हेमंत चौहान शामिल हैं। इन सभी परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों की देह चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों के लिए समर्पित की।
पहले नेत्र और त्वचा दान, फिर देहदान
सभी मामलों में देहदान से पहले विशेष रूप से आंखों और त्वचा का दान किया गया। इससे जरूरतमंद मरीजों को दृष्टि और उपचार में सहायता मिलेगी। इसके बाद मेडिकल कॉलेजों को देह सौंपे गए, जहां मेडिकल विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना का अध्ययन कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि देहदान चिकित्सा विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे मेडिकल छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है और नई चिकित्सा तकनीकों के शोध में मदद मिलती है।
पुलिस ने दिया ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
डॉ मोहन यादव सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत सभी देहदान करने वाले दिवंगतों को शासकीय सम्मान के रूप में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। हालांकि शैला चौरड़िया के परिवार ने सादगी बनाए रखने की भावना से यह सम्मान लेने से विनम्रतापूर्वक मना कर दिया।
राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2025 से देहदान और अंगदान करने वालों को अंतिम विदाई में गार्ड ऑफ ऑनर देने की व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद प्रदेश में देहदान के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कई संस्थाओं ने निभाई अहम भूमिका
इन देहदान प्रक्रियाओं में कई चिकित्सा संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें एमजीएम मेडिकल कॉलेज, श्री अरविंदो मेडिकल कॉलेज, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद, सत्य साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, एमके इंटरनेशनल आई बैंक, शंकरा आई बैंक, एमवाय आई बैंक और चोइथराम स्किन बैंक शामिल हैं। इन संस्थाओं ने नेत्रदान, त्वचा दान और देहदान की पूरी प्रक्रिया को तकनीकी और चिकित्सकीय सहयोग प्रदान किया।
10 वर्षों में 350 से ज्यादा देहदान
शहर में बढ़ती जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक दशक में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में 350 से अधिक परिवार अपने परिजनों का देहदान या अंगदान कर चुके हैं।
इस पुनीत कार्य में मुस्कान ग्रुप सहित कई सामाजिक संगठन लगातार जनजागरण, परामर्श और सेवा कार्य कर रहे हैं। इनके प्रयासों से समाज में देहदान और अंगदान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हुई है।
मानवता और सेवा का प्रेरक संदेश
विशेषज्ञों का कहना है कि देहदान केवल चिकित्सा विज्ञान को मजबूत करने का माध्यम नहीं, बल्कि यह समाज की संवेदनशीलता, सेवा भावना और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण भी है। इंदौर में लगातार बढ़ रहे देहदान यह संदेश दे रहे हैं कि मृत्यु के बाद भी इंसान कई लोगों के जीवन में उम्मीद, ज्ञान और नई रोशनी का कारण बन सकता है।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!