हनीट्रैप की ‘ब्लैक डायरी’ खुली: अब बड़े चेहरों पर शिकंजा कई रसूखदारों की गिरफ्तारी की तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

श्वेता-रेशू-अलका ने पूछताछ में उगले कई बड़े नाम, क्राइम ब्रांच बोली- ‘अभी तो खेल शुरू हुआ है’
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर की शिकायत से खुला हाईप्रोफाइल हनीट्रैप कांड अब शहर की सबसे विस्फोटक जांच बनता जा रहा है। शुरुआत में इसे सिर्फ ब्लैकमेलिंग और निजी विवाद का मामला माना जा रहा था, लेकिन अब क्राइम ब्रांच की पूछताछ में ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिनसे कई रसूखदारों की नींद उड़ गई है।
क्राइम ब्रांच ने सोमवार को सात आरोपियों- श्वेता विजय जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, रेशू चौधरी, लाखन चौधरी, विनोद शर्मा और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया, लेकिन सूत्रों की मानें तो असली कहानी अब शुरू हुई है।
पूछताछ में आरोपियों ने कई ऐसे नाम बताए, जिनके तार शहर के बड़े कारोबारियों, रसूखदारों और प्रभावशाली नेटवर्क से जुड़े हैं।
क्राइम ब्रांच अब उन नामों की तस्दीक में जुटी है और माना जा रहा है कि दो से तीन दिन में इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
पूछताछ में टूटे आरोपी, खुलने लगी ‘सेटिंग’ की परतें- सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने सभी आरोपियों को अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर घंटों पूछताछ की।
इस दौरान कई बार बयान बदलने और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश भी हुई, लेकिन मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों के सामने आरोपियों की कहानी ज्यादा देर टिक नहीं सकी।
बताया जा रहा है कि पूछताछ में श्वेता जैन और अलका दीक्षित ने कुछ ऐसे लोगों के नाम बताए, जो इस पूरे नेटवर्क के संपर्क में थे।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये लोग सिर्फ परिचित थे या ब्लैकमेलिंग और समझौते की पूरी स्क्रिप्ट में लिप्त थे। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के मुताबिक अभी जांच शुरुआती चरण में है।
कई डिजिटल सबूत मिले हैं। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
अभी मामला खत्म नहीं, यह तो शुरुआत है- क्राइम ब्रांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस केस में कुछ बड़े और चौंकाने वाले नामों का खुलासा हो सकता है।
उन लोगों की सूची तैयार की जा रही है, जिनका संपर्क आरोपियों से था। चर्चा है कि कई सफेदपोश और प्रभावशाली चेहरे अब बैकफुट पर आ गए हैं और कुछ तो समझौते व बचाव की कोशिशों में जुटे बताए जा रहे हैं।
मोबाइल बना ‘खुफिया खजाना’
जांच एजेंसियों के हाथ लगे मोबाइल फोन अब इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं। सूत्रों के अनुसार जब्त मोबाइलों से कई चैट, वीडियो, कॉल रिकॉर्डिंग और लेनदेन की जानकारी मिली है।
साइबर टीम डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटी है। पुलिस को शक है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति को फंसाने का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा संगठित हनीट्रैप और डिजिटल ब्लैकमेलिंग नेटवर्क हो सकता है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि किन लोगों को फोटो और वीडियो भेजे गए और किनसे समझौते के नाम पर रकम मांगी गई।
प्रधान आरक्षक की भूमिका ने बढ़ाई हलचल
पूरे मामले में प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा की गिरफ्तारी ने पुलिस महकमे में भी खलबली मचा दी है। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी अब इस एंगल पर भी काम कर रही है कि क्या आरोपियों को सिस्टम के भीतर से मदद मिल रही थी? क्या कुछ शिकायतें दबाई गईं? क्या कुछ लोगों को डराने या बचाने के लिए पुलिसिया नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ?
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