घोटाले में बड़ा सवाल: IAS जांच में कई नाम, पुलिस FIR में सिर्फ 4 आरोपी; कौन रह गया बाहर?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के चर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पिनाकल ग्रांड से जुड़े जमीन और प्लॉट बुकिंग विवाद में पुलिस की FIR और जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
क्राइम ब्रांच ने निपानिया की जमीन से जुड़े मामले में संजय अग्रवाल, नीना अग्रवाल, रितू अग्रवाल और गुरनाम सिंह धालीवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है।
वहीं, जिला प्रशासन की पूर्व में हुई जांचों में इससे जुड़े कई अन्य लोगों और कंपनियों की भूमिका का भी उल्लेख किया गया था।
मामले की खास बात यह है कि प्रशासनिक स्तर पर हुई विस्तृत जांच में पिनाकल ग्रांड प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन सौदों, प्लॉट बुकिंग और एक जैसे नाम वाली कंपनियों के जरिए लेन-देन की पूरी प्रक्रिया की जांच की गई थी।
दो IAS अधिकारियों ने की मामले की जांच
पिनाकल ग्रांड मामले की जिला प्रशासन स्तर पर दो बार जांच हुई। तत्कालीन अपर कलेक्टर डॉ. अभय बेडेकर ने सितंबर 2022 में जांच रिपोर्ट दी थी।
इसके बाद तत्कालीन अपर कलेक्टर और वर्तमान में सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल ने भी मामले की जांच की और अप्रैल 2025 में करीब 30 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की।
डॉ. बेडेकर की रिपोर्ट में आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा की भूमिका को प्रमुख बताते हुए उन्हें पूरे मामले का संभावित मास्टरमाइंड बताया गया था।
रिपोर्ट में अलग-अलग कंपनियों और मिलते-जुलते नाम वाली फर्मों के जरिए राशि लेने, प्लॉट की बुकिंग और बिक्री से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए थे।
बैनल की रिपोर्ट में संजय अग्रवाल की भूमिका पर सवाल
अपर कलेक्टर गौरव बैनल की जांच में डेवलपर संजय अग्रवाल के साथ आशीष दास और पुष्पेंद्र बढ़ेरा की भूमिका का उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, दास के हिस्से की करीब 9.30 एकड़ जमीन के प्लॉटों पर संजय अग्रवाल की ओर से सहमतिकर्ता के तौर पर हस्ताक्षर किए गए थे।
रिपोर्ट में कहा गया कि विवादित जमीन पर प्लॉट बुकिंग आपसी सहमति से की गई। शिकायतकर्ताओं को न तो प्लॉट दिए गए और न ही उनकी राशि लौटाने का मामला सुलझा।
जांच में संबंधित सक्षम अधिकारी के समक्ष कार्रवाई और पात्र लोगों को प्लॉट या बाजार मूल्य के हिसाब से राशि लौटाने की अनुशंसा की गई।
छह मिलते-जुलते नाम वाली कंपनियां जांच के घेरे में
प्रशासनिक जांच में जेएसएम देवकान नाम से मिलते-जुलते नाम वाली छह कंपनियों/फर्मों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग समय पर इन कंपनियों में आशीष दास, पुष्पेंद्र बढ़ेरा, गुरनाम सिंह धालीवाल, गिरीश वाधवानी सहित कई लोगों के नाम निदेशक या संबंधित पदों पर सामने आए।
जांच का एक अहम बिंदु यह था कि इन कंपनियों के नामों में समानता के कारण ग्राहकों के सामने वास्तविक डेवलपर और जमीन के स्वामित्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी।
शिकायतकर्ताओं से अलग-अलग कंपनियों के नाम पर ली गई बुकिंग राशि
प्रशासनिक जांच में शिकायतकर्ताओं के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कहा गया कि प्लॉट बुकिंग की राशि अलग-अलग जेएसएम देवकान से जुड़ी कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के माध्यम से ली गई।
रिपोर्ट में आशीष दास, पुष्पेंद्र बढ़ेरा, गिरीश वाधवानी, संजय खंडेलवाल, संदीप अग्रवाल, संदीप गुप्ता, राजेश मोटलानी, हरप्रीत सिंह टूटेजा, गुरनाम सिंह धालीवाल, वीरेंद्र शर्मा और कपिल अग्रवाल सहित कई नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन सभी लोगों को पुलिस FIR में आरोपी नहीं बनाया गया है।
निपानिया की 22 एकड़ जमीन से शुरू हुआ विवाद
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, निपानिया के कुछ सर्वे नंबरों में करीब 22 एकड़ जमीन अग्रवाल परिवार से जुड़ी थी। संजय अग्रवाल, नीना अग्रवाल और रितू अग्रवाल ने वर्ष 2015 में निगम से विकास संबंधी मंजूरी ली थी।
इसके बाद जमीन के एक हिस्से को जेएसएम देवकान से जुड़ी कंपनियों के नाम किए जाने और वहां प्लॉट काटकर बुकिंग किए जाने का मामला सामने आया। रिपोर्ट में जमीन के सौदों, डेवलपर की भूमिका और बाद में पक्षों के बीच हुए विवाद का भी उल्लेख किया गया है।
FIR में पुलिस ने क्या आरोप लगाए?
क्राइम ब्रांच की FIR के मुताबिक, निपानिया की जमीन पर विकास और प्लॉटिंग से जुड़ी प्रक्रिया में ग्राहकों से राशि ली गई।
पुलिस का आरोप है कि जिन जमीनों पर पहले से प्लॉट काटकर बिक्री की जा चुकी थी, उनमें से करीब 9.30 एकड़ जमीन बाद में जेएसएम देवकान से जुड़ी फर्मों के नाम की गई।
FIR में यह भी आरोप है कि जेएसएम ब्रांड के नाम का इस्तेमाल कर ग्राहकों से प्लॉट बुकिंग के लिए राशि ली गई और बाद में विवाद की स्थिति बनी। कुछ प्लॉटों के निगम में बंधक होने के बावजूद उनकी बिक्री किए जाने का आरोप भी FIR में दर्ज है।
16 शिकायतकर्ताओं की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
मामले में कुल 16 लोगों ने पुलिस से शिकायत की थी। इनमें रोहित सूद, रमेश रिझवानी, पंकज रिझवानी, राजेश रामरखिया, विशाल मित्तल, अंकिता मित्तल, मुकेश मेहता, अब्दुल खान, सूरज सेमवानी, संजय माहेश्वरी, गणेश खत्री, ललित यादव, हेमंत खत्री, अभय झंवर, अनूप सिंघल और मनीष महाजन शामिल हैं।
इनकी शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने IPC की धाराओं 420, 467, 468, 120-B और 409 के तहत मामला दर्ज किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल- जांच में नाम, FIR में गायब क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रशासन की विस्तृत जांच रिपोर्ट में जिन लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया, उनमें से कई नाम पुलिस की मौजूदा FIR में आरोपी के तौर पर क्यों नहीं हैं?
क्या पुलिस जांच के दौरान इन लोगों की भूमिका की भी जांच होगी या FIR में दर्ज चार आरोपियों तक ही कार्रवाई सीमित रहेगी, यह आगे की जांच में स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रशासनिक जांच रिपोर्ट और पुलिस FIR के बीच सामने आया यह अंतर पिनाकल ग्रांड मामले को फिर चर्चा में ले आया है।
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