22 वर्षों से शासकीय जमीन बचाने की लड़ाई जारी: तिकोना गार्डन पर कब्जे का खेल... निगम के जिम्मेदारों पर मिलीभगत का आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

छत्रीबाग के सांईनाथ उद्यान पर भूमाफियाओं की नजर, शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
खुलासा फर्स्ट…इंदौर।
राजस्व ग्राम छत्रीबाग स्थित बहुचर्चित तिकोना गार्डन मामले में अब नगर निगम और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि निगम अधिकारियों के संरक्षण में कथित भूमाफियाओं ने शासकीय उद्यान की जमीन पर कब्जा कर लिया। लगभग 22 वर्षों से स्थानीय लोग और संघर्ष समिति शासकीय भूमि बचाने के लिए शिकायतें करते रहे, लेकिन िजम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जानकारी के अनुसार 25 मार्च 1982 को तत्कालीन कलेक्टर द्वारा उक्त भूमि नगर निगम को हैंडओवर की गई थी। यहां साईंनाथ उद्यान संचालित होता था, जिसकी देखरेख के लिए रुग्गा भैया और बंसीलाल दांगी माली नियुक्त थे। उद्यान में धार्मिक आयोजन भी होते थे तथा यहां मौजूद सरकारी बोरिंग से लगभग 50 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता था। आरोप है कि बाद में नगर निगम ने परमजीत लौंडिया को कथित रूप से अवैध तरीके से अनुमति प्रदान कर दी, जिस पर छः दुकानों का निर्माण किया जा चुका है और अब पास में ही नया अवैध निर्माण कार्य जारी है।
मामला कोर्ट में लंबित, फिर भी दी गई अनुमति
तिकोना गार्डन का विवाद कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद वर्ष 2025 में विवादित भूमि पर अभिन्यास मंजूर किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब स्वामित्व का विवाद लंबित है, तब बहुमंजिला निर्माण की अनुमति देना नियमों के विपरीत है।
निगम को 2004 में ही थी अतिक्रमण की जानकारी
नगर निगम भवन अधिकारी द्वारा 28 मई 2004 को नजूल अधिकारी, जिलाधीश कार्यालय को पत्र क्रमांक 156 बीओ जारी कर उद्यान की भूमि का सीमांकन कराने की मांग की गई थी। पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि सर्वे नंबर 903 एवं 911 पर अतिक्रमण की शिकायत उद्यान बचाओ संघर्ष समिति द्वारा की गई। इसके बावजूद वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पत्राचार से स्पष्ट होता है कि विवादित भूमि का मामला दो दशक पहले से निगम अधिकारियों के संज्ञान में था, इसके बाद भी कथित रूप से भ्रष्टाचार कर भवन निर्माण अनुमति दी जाती रही।
2015 में भी निगम ने माना था अवैध निर्माण: शिकायतकर्ता गोपाल यादव द्वारा मुख्यमंत्री जनशिकायत निवारण प्रकोष्ठ में शिकायत के बाद 25 अगस्त 2015 को निगम के उपायुक्त एवं कॉलोनी सेल प्रभारी ने भवन अधिकारी लालबहादुर शास्त्री जोन-2 को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया था कि मौके पर बिना अनुमति के निर्माण कार्य चल रहा है और तत्काल कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्रवाई कभी नहीं हुई। उलटे वर्ष 2025 में उसी विवादित शासकीय भूमि पर निजी व्यक्ति को निर्माण अनुमति दे दी गई, जिससे निगम की दोहरी नीति का खुलासा हो गया।
पक्षकार बनाने में भी मिलीभगत के आरोप: मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि कुछ व्यक्तियों को जिला और हाई कोर्ट से पक्षकार बनने से बाहर किया गया, जबकि बलविंदरसिंह छाबड़ा और गुरमीत कौर को पक्षकार बनाया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि तत्कालीन सरकारी वकीलों द्वारा प्रभावी विरोध नहीं करने के कारण यह स्थिति बनी।
1979 की रिपोर्ट में दर्ज था प्लॉट आवंटन: राजस्व कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण समिति छत्रीबाग की वर्ष 1979-80 की वार्षिक रिपोर्ट में उल्लेख है कि सदस्य निघोसकर को प्लॉट नंबर 27-ए आवंटित किया गया था। इसी दस्तावेज को लेकर बाद में स्वामित्व के दावे किए जाते रहे।
रजिस्ट्री रोकने की भी हुई मांग
शिकायतकर्ता द्वारा 1 जनवरी 2021 को उपपंजीयक कार्यालय इंदौर में शिकायत देकर खसरा नंबर 903 और 911 की भूमि को 912 दर्शाकर रजिस्ट्री कराने के प्रयासों की जानकारी दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शासकीय भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण और पंजीयन कराने की कोशिश की जा रही है। शिकायत में कथित भूमाफियाओं के रूप में शीतलदीन, विनोदचंद्र श्रीवास, बलवीरसिंह छाबड़ा, गुरमीत कौर, गोपाल जाकोयटिया, केदारमल महाजन और राजू उर्फ टीटू भुसारी के नामों का उल्लेख किया गया था, लेकिन उक्त भूमि का रजिस्ट्री पंजीयन द्वारा क्रय-विक्रय जारी रहा।
भवन अनुज्ञा शाखा को दिए गए एक अन्य आवेदन में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बलविंदरसिंह छाबड़ा द्वारा शासकीय नजूल भूमि पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। आवेदन में यह भी कहा गया कि वर्ष 1993 के कथित नक्शे के आधार पर 2024 में निर्माण नहीं किया जा सकता। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि भूमि स्वामित्व को लेकर व्यवहार न्यायालय में वाद क्रमांक 117/2016 लंबित है, ऐसे में निर्माण कर फ्लैट या दुकानें बेचने से आम लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
2019 में हटाया गया अतिक्रमण फिर कैसे खड़ा हुआ?
तत्कालीन राजस्व निरीक्षक पंकज यादव ने 30 मार्च 2019 को आरसीएमएस प्रकरण में नगर निगम और चंदन नगर थाना पुलिस को अतिक्रमण हटाने के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद 2 अप्रैल 2019 को निगम और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दर्शाई गई, लेकिन आज भी मौके पर निर्माण और व्यवसायिक गतिविधियां जारी हैं। वहीं क्षेत्रीय थाना छत्रीपुरा है, लेकिन अन्य थाना क्षेत्र की पुलिस ने कार्रवाई में कैसे मदद की, यह भी बड़ा सवाल है।
अपर आयुक्त बोले- अभिन्यास निरस्त, कार्रवाई करेंगे: मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने कहा तिकोना बगीचा प्रकरण निगम के संज्ञान में है और भवन अधिकारी द्वारा अभिन्यास निरस्त कर दिया गया है। जब उन्हें बताया गया कि मौके पर निर्माण कार्य अभी भी जारी है, तो उन्होंने भवन अधिकारी को मौका-मुआयना करने के निर्देश देने की बात कही। वहीं अवैध निर्माण पर अतिक्रमण कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के सवाल पर अपर आयुक्त ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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