अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सख्ती या सिर्फ दिखावा: लगातार शिकायतों के बाद जागे; पटवारी-आरआई पर गिरेगी गाज
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में वर्षों से फल-फूल रहे अवैध कॉलोनी कारोबार पर आखिरकार अब जिला प्रशासन की नींद खुली है। भू-माफियाओं की मनमानी, अधिकारियों की कथित मिलीभगत और कमजोर निगरानी के चलते शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का जाल फैलता रहा, लेकिन अब प्रशासन ने पटवारी हल्का स्तर पर जानकारी जुटाकर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू की है।
कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर अपर कलेक्टर रिंकेश वैश्य ने सभी तहसीलों से एक वर्ष में विकसित कॉलोनियों की विस्तृत जानकारी तलब की है। इसमें वैध और अवैध कॉलोनियों को अलग-अलग दर्शाने के निर्देश दिए गए हैं। ।
भू-माफिया मालामाल, आम लोग बर्बाद- लगातार कार्रवाई के दावों के बावजूद अवैध कॉलोनियों की शिकायतें थम नहीं रहीं। भू-माफिया सस्ते प्लॉट बेचकर करोड़ों कमाते हैं और बाद में कॉलोनी अवैध घोषित होने पर कार्रवाई की मार खरीदारों को झेलनी पड़ती है। लोग जीवनभर की कमाई लगाकर जमीन खरीदते हैं, लेकिन बाद में उन्हें सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना पड़ता है।
खसरे में दर्ज होगी अवैध कॉलोनी, लगाए जाएंगे चेतावनी बोर्ड- अपर कलेक्टर वैश्य के अनुसार अवैध कॉलोनियों को खसरे के कॉलम-12 में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में अवैध पाई जाने वाली कॉलोनियों में प्रशासन चेतावनी बोर्ड लगाएगा, ताकि लोग भू-माफियाओं के जाल में फंसने से बच सकें। प्रशासन ने नियमित मॉनिटरिंग का दावा भी किया है।
लापरवाही पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान- अवैध कॉलोनियों को रोकने के लिए बने अधिनियम में पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।
यदि कार्रवाई में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। अधिनियम में तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान है।
अब तक कौन दे रहा था संरक्षण?- सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध कॉलोनियां वर्षों से विकसित हो रही थीं, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे? बिना प्रशासनिक संरक्षण के बड़े स्तर पर अवैध प्लॉटिंग संभव नहीं मानी जाती।
ऐसे में अब प्रशासन की कार्रवाई केवल कागजी साबित होगी या वास्तव में भू-माफियाओं और लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा कसेगा, यह आने वाला समय तय करेगा।
अब पटवारी और आरआई भी होंगे जिम्मेदार
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी पटवारी हल्का क्षेत्र में अवैध कॉलोनी विकसित होती पाई गई तो संबंधित पटवारी और राजस्व निरीक्षक पर भी कार्रवाई होगी। यहां तक कि जिन क्षेत्रों में ‘कोई अवैध कॉलोनी नहीं’ होने की रिपोर्ट दी जाएगी, वहां भविष्य में मामला सामने आने पर संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा कि समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई।
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