केदार घाटी की वह अजेय आस्था: जिसे सैलाब भी नहीं बहा सका; प्रलय से पुनर्जन्म तक- मौत के तांडव पर जीवन की विजय
KHULASA FIRST
संवाददाता

हेमंत उपाध्याय 99930-99008 खुलासा फर्स्ट।
जून 2013 की वह काली रात, जब मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप धारण किया था, तो लगा था कि हिमालय पर्वत के भूगोल के साथ-साथ वहां की संस्कृति और विश्वास का इतिहास भी मिट जाएगा। आसमान से बरसी तबाही और पहाड़ों से उतरते प्रलयंकारी मलबे ने हजारों जिंदगियां निगल लीं।
मंजर ऐसा खौफनाक था कि केदारपुरी का अस्तित्व ही खतरे में दिखने लगा था, लेकिन इतने लंबे अंतराल या 13 साल के बाद आज जब हम केदारनाथ की चोटियों की ओर देखते हैं, तो वहां केवल पत्थरों का पुनर्निर्माण नहीं दिखता, बल्कि वहां हमारे गौरवशाली देश की उस सनातन जिजीविषा का पुनर्जन्म दिखाई देता है, जो मलबे के ढेर से भी मुस्कुराकर बाहर निकल आती है।
यह केवल एक आपदा की याद नहीं है, बल्कि उस ‘अडिग विश्वास’ का दस्तावेज है जिसने साक्षात मौत को मात देकर फिर से जिंदगी का दीपक जलाया है।
वह जख्म जो आज भी हरा है... आज भी जब केदारघाटी में काले बादल मंडराते हैं, तो बुजुर्गों की आंखों में 2013 का वह मंजर तैर जाता है। वह केवल एक बाढ़ नहीं थी, वह ‘हिमालयी सुनामी’ थी जिसने देखते ही देखते रामबाड़ा जैसे पौराणिक पड़ाव का नामोनिशान मिटा दिया।
हजारों परिवारों ने अपने घर के चिराग खोए, तो व्यापारियों की पीढ़ियों की विरासत मलबे में दफन हो गई, लेकिन इस महाविनाश के बीच एक चमत्कार पूरी दुनिया ने देखा। सब कुछ ढह गया, हजारों टन मलबा मंदिर की देहरी तक पहुंच गया, पर बाबा केदार का गर्भगृह अक्षुण्ण रहा।
पीछे से आई एक विशाल शिला (भीमशिला) ने प्रलय के वेग को दो हिस्सों में बांट दिया। शायद प्रकृति ने खुद ही संकेत दे दिया था कि विनाश की एक सीमा है, लेकिन आस्था अनंत है।
मलबे को रास्ता दिया, हार को नहीं... केदारनाथ के पुनर्निर्माण के असली नायक वे स्थानीय लोग हैं जिन्होंने अपनों के शव उठाने के बाद अगले ही सीजन में फिर से छैनी-हथौड़ा उठा लिया। रामबाड़ा के एक पुराने निवासी की बात कहीं पढ़ी।
इसका सार था- साहब, रामबाड़ा तो अब केवल यादों में है, लेकिन बाबा केदार का द्वार तो वही है। यह ‘शून्य से शुरुआत’ करने की ताकत उन घोड़े-खच्चर चलाने वालों, छोटे दुकानदारों और तीर्थ पुरोहितों ने दिखाई, जिनके लिए यह यात्रा केवल रोजगार नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व की पहचान है।
आज गौरीकुंड से केदारनाथ के पैदल मार्ग पर जो रौनक दिखती है, वह इसी अटूट इच्छाशक्ति का परिणाम है।
परंपरा और तकनीक हाथ मिलाते हैं नये केदारनाथ में... 2013 के बाद का केदारनाथ अब एक व्यवस्थित और सुरक्षित धाम के रूप में उभरा है। अब यहां केवल भक्ति नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी एक अभेद्य चक्र है। अब यात्रा केवल ‘भाग्य’ के भरोसे नहीं है।
रडार वार्निंग सिस्टम, पुख्ता ड्रेनेज चैनल्स और चौरबाड़ी ताल की निरंतर निगरानी ने यात्रियों के मन से डर को निकाला है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की उपस्थिति हर मोड़ पर एक सुरक्षा कवच का अहसास कराती है।
अधिकारियों के एकाधिक बयान हैं कि आपदा ने यह सिखाया कि प्रकृति से खिलवाड़ की कीमत क्या होती है। अब केदारपुरी में निर्माण कार्य वैज्ञानिक पद्धति से हो रहे हैं। प्लास्टिक नियंत्रण और ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ की नई प्रणालियों ने हिमालय की संवेदनशीलता को सहेजने का काम किया है।
उत्तर भारत की धार्मिक अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी... केदारनाथ धाम की यात्रा का पुनर्जीवित होना केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि समूचे उत्तर भारत की
धार्मिक अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित हुआ है।
अब बदल चुका है दृष्टिकोण...2013 से पहले कई लोग इसे केवल एक ‘हिल स्टेशन’ की यात्रा मान लेते थे, लेकिन आपदा ने यात्रियों के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। इस वर्ष की यात्रा में उमड़ी रिकॉर्ड तोड़ भीड़ यह बताती है कि अब भक्त यहां मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि उस ‘ऊर्जा केंद्र’ के दर्शन के लिए आते हैं जिसने जल-प्रलय को भी झुका दिया। अब यात्री मौसम विभाग की ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट की चेतावनियों को किसी आदेश की तरह मानते हैं। डिजिटल रजिस्ट्रेशन और टोकन सिस्टम ने उस अफरा-तफरी को खत्म कर दिया है जो कभी त्रासदियों का कारण बनती थी।
संबंधित समाचार

शोरूम विवाद मामले में बड़ा फैसला:इन पुलिस अधिकारियों को मिली राहत

फैमिली कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन:प्रिंसिपल जज की कार्यशैली पर उठाए सवाल; की ये मांग

आदिवासियों के घर तोड़ने पर सरकार सख्त:केंद्रीय मंत्री के धरने के बाद मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

महंगाई का एक और झटका:इस कंपनी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम; इतने रुपए हुआ महंगा

धार्मिक आयोजनों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस अलर्ट:कमिश्नर ने 15 शक्ति मोबाइल टीमों को किया रवाना; हेल्पलाइन नंबर किए जारी

मारपीट के दो मामले:पति की प्रेमिका पर पत्थर से हमला करने का आरोप; जमीन विवाद में किसान को पीटा

विशेष जूपिटर अस्पताल की क्रूरता ‘पेशेंट’ नहीं ‘मनी फर्स्ट’:मरीज की जान से खिलवाड़; बिना जांच पैर काटने का फरमान और संदिग्ध मौत

माता की भक्ति के साथ महाप्रसादी का वितरण शुरू

भीषण सड़क हादसा:स्कॉर्पियो की टक्कर से मैनेजर और कर्मचारी की मौत

भीड़ में दिखा बदमाश तो एप से तुरंत खुलेगी कुंडली:हवाबाजी करने वाले अपराधियों पर रहेगी तकनीकी नजर

अभिनेता,नेताओं से यारी टोपीबाज पटवा का खेल भारी:सट्टेबाजी के बाद अब मनी लांड्रिंग; हवाला और ब्लैक मनी को व्हाइट करने का गौरखधंधा

सड़क चौड़ीकरण के विरोध में बाजार बंद:व्यापारियों ने किया प्रदर्शन; कहा- रोजाना करोड़ों का कारोबार हो रहा प्रभावित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने काजीरंगा से आए आठ भैंसों को बाड़े में छोड़ा:कान्हा टाइगर रिजर्व में सौ साल बाद लौटे जंगली भैंसे

नशे में धुत कार चालक ने 3-4 लोगों को मारी टक्कर:लोगों ने पीछा कर आरोपी को पकड़ा; कार में मिली शराब की बोतल

एरोड्रम कांड में अब फुटेज और बयानों की परीक्षा:पुलिसकर्मियों के सस्पेंशन से चार पर कार्रवाई तक कैसे बदली कहानी

आज फिर खुलेगी गैंगस्टर सतीश भाऊ और गुर्गों की जालसाजी की कुंडली:दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ दोपहर को होंगे जालसाजी के शिकार राहुल यादव के बयान

बाहर टिकट ब्लैक तो स्टेडियम में हुई मारपीट वीडियो वायरल:लसूड़िया पुलिस ने दो नाबालिगों को पकड़ा, चार टिकट जब्त

देखिये वीडियो, ऑनलाइन सट्टेबाजी-कैसीनो नेटवर्क का खुलासा:एक आरोपी गिरफ्तार; दो की तलाश जारी, लाखों रुपए के प्रीमियम मोबाइल जब्त

भक्ति के रंग गरबे की उमंग:आकर्षक विद्युत सज्जा और हाईटेक सेल्फी पॉइंट बने आकर्षण

कॉलेज के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र:इन मांगों को लेकर डटे; बोले- न्याय नहीं मिला तो प्राण त्याग देंगे
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!