कमीशन के चक्कर में नहीं खोला टेंडर: दो महीने से इंतजार कर रहे मछुआ समाजजन; मत्स्य पालन से नगर निगम को होना है करोड़ों रुपए की आय
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम यदि कोई टेंडर निकालता है तो वह तब तक नहीं खोला जाता, जब तक नेताओं और अधिकारियों का कमीशन सेट नहीं हो जाता। ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं और अब इसी तरह के एक और मामले का खुलासा हुआ है। निगम ने शहर के 18 तालाब 10 साल के लिए पट्टे पर देने के लिए दो फरवरी को विज्ञप्ति जारी की थी।
इसमें टेंडर भरने की आखिरी तारीख छह मार्च शाम 5 बजे तक थी। टेंडर नौ मार्च को कार्यपालन यंत्री ड्रेनेज विभाग के कार्यालय में खोला जाना था, लेकिन दो माह से अधिक गुजरने के बावजूद अभी तक नहीं खोला गया है।
इस में सिर्फ मछुआ सहकारी समिति या समूह में पंजीकृत वंशानुगत मछुआ जाति का व्यक्ति ही हिस्सा ले सकता है। वंशानुगत मछुआ सामान्यतः बेहद गरीब होती है।
इनके जीवन में सुधार करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश मत्स्य पालन नीति बनाई गई थी, लेकिन निगम के नेता और अधिकारी इस नीति से मछुआ जाति के लोगों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दे रहे हैं।
शहर के 18 मुख्य तालाबों में मत्स्य पालन के लिए यह टेंडर निकाला गया था। 10 साल के लिए निकल गए इस टेंडर से नगर निगम इंदौर को करोड़ों रुपए की आय होना है।
मछुआ जाति के गरीब लोग निगम के अधिकारियों व नेताओं को कमीशन देने को तैयार नहीं है, इससे निगम के अधिकारियों ने इस टेंडर को अभी तक खोला ही नहीं है।
वैसे टेंडर की तारीख निकलने के बावजूद टेंडर नहीं खोलने का खेल निगम में नया नहीं है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा लाइन बदलने का टेंडर भी महीनों तक रोका था, इसकी वजह से यहां के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर थे और वही जहरीला पानी पीने की वजह से तीन दर्जन से ज्यादा लोगों की अकाल मृत्यु हो गई थी।
अधिकारियों को नहीं है होश... हैरानी है कि गरीबों के कल्याण और नगर निगम की कमाई से संबंधित इस काम के बारे में अधिकारियों को होश ही नहीं है।
जल संसाधन विभाग के अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक से जब इस संबंध में बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें इस टेंडर के बारे में जानकारी नहीं है।
जबकि आशीष कुमार पाठक जनवरी महीने से जल संसाधन विभाग के अपर आयुक्त है, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि शहर के 18 तालाब मछली पालन के लिए पट्टे पर दिए जाने को लेकर टेंडर निकाला गया है।
टेंडर की तारीख भी पूरी हो चुकी है, लेकिन उसके बावजूद नहीं खोला गया। खुलासा फर्स्ट द्वारा इस बारे में पूछे जाने के बाद अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक ने कहा है कि वह इस मामले का पता लगाएंगे।
एमआईसी सदस्य का अजीब तर्क... इस मामले में निगम के जल संसाधन विभाग के प्रभारी एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा का कहना है कि टेंडर के बारे में दो दिन पहले ही जानकारी ली गई थी, जिन लोगों ने टेंडर भरा है उनके बारे में मत्स्य विभाग से जानकारी हासिल की जा रही है कि वह सही लोग हैं या नहीं, वह रजिस्टर्ड है या नहीं।
इसके अलावा बबलू शर्मा यह भी कह रहे हैं मत्स्य सहकारी समिति के जो भी समूह तालाब से नजदीक रहने वाले होंगे, उन्हें ही तालाब का टेंडर दिया जाएगा, दूर वालों को टेंडर नहीं दिया जाएगा।
संबंधित समाचार

चर्चित अभि तोमर हत्याकांड की आग भिंड तक जा पहुंची:इंदौर की गैंगवार का बदला लेने चली गोलियां

शौक पूरे करने के लिए करता था चोरी:दो ऑटो किए बरामद; रात के अंधेरे में उड़ाता था वाहन, पुलिस ने किया गिरफ्तार

सिंहस्थ की जमीन से हटाया अतिक्रमण:20 अवैध मकान ध्वस्त 3 हेक्टेयर जमीन को कब्जा मुक्त; पुलिस बल की मौजूदगी में अभियान चलाया

इस अधिकारी ने बढ़ाया देवी अहिल्या की नगरी का गौरव:ओडिशा के राज्यपाल की एडीसी बनी; ऐसा करने वाली पहली महिला ऑफिसर भी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!