मंदिर का जमीन विवाद पहुंचा हाईकोर्ट: सरकार समेत कई अधिकारियों को नोटिस; इस विधायक को भी पक्षकार बनाने की छूट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद अब इंदौर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर, नगर निगम उज्जैन और संबंधित राजस्व अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहें तो भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय को भी मामले में पक्षकार बनाया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई नोटिस तामील होने के बाद होगी।
सरकारी जमीन को निजी बताकर सौदा करने का आरोप
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाकाल मंदिर के पास स्थित शासकीय भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में निजी भूमि दर्शाकर उसका सौदा किया गया।
विवादित जमीन का एक हिस्सा वर्तमान में हरिफाटक पार्किंग के रूप में उपयोग हो रहा है, जहां महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन खड़े करते हैं। आरोप है कि इसी जमीन पर निजी व्यावसायिक परियोजना व फाइव स्टार होटल विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
कांग्रेस पार्षद की शिकायत के बाद पहुंचा मामला हाईकोर्ट
इस मामले की शिकायत कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुवाल ने लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और अन्य एजेंसियों से की थी। इसके बाद उन्होंने 14 जुलाई 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और शासकीय भूमि की सुरक्षा की मांग की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने पैरवी करते हुए बताया कि मामले में राज्य शासन और संबंधित राजस्व अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
1950 के रिकॉर्ड में शासकीय भूमि होने का दावा
याचिका के अनुसार, ग्राम कस्बा उज्जैन, पटवारी हल्का क्रमांक-05 स्थित सर्वे नंबर 3664/1, 3666/1, 3690/1/1 और 3691/1 की कुल लगभग 1.877 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1950 के राजस्व अभिलेखों में "पट्टा तकायमी कारखाना" के रूप में शासकीय भूमि दर्ज थी।
आरोप है कि बाद के वर्षों में बिना किसी सक्षम न्यायिक या राजस्व आदेश के इस भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। बाद में इसका एक हिस्सा यूटोपिया होटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम स्थानांतरित किया गया, जिसके निदेशकों में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय का नाम भी बताया गया है।
सिंहस्थ और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर असर की आशंका
याचिका में कहा गया है कि यदि इस भूमि पर निजी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां होती हैं तो महाकाल मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की पार्किंग व्यवस्था प्रभावित होगी। साथ ही आगामी सिंहस्थ महापर्व के दौरान यातायात, भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
सर्वे नंबर 3677 का भी दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि विवादित भूमि से लगी सर्वे नंबर 3677 की जमीन को पहले ही राजस्व अधिकारियों द्वारा शासकीय भूमि घोषित किया जा चुका है।
इसके अलावा 27 नवंबर 2024 को सिविल न्यायालय के फैसले में भी उस भूमि की शासकीय स्थिति बरकरार रखी गई थी। इसी आधार पर पूरे भूमि रिकॉर्ड की व्यापक जांच की मांग की गई है।
3.82 करोड़ रुपए में हुई थी जमीन की खरीद
विवादित मामला करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। दस्तावेजों के अनुसार यह जमीन 2 मार्च 2026 को यूटोपिया होटल एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 3.82 करोड़ रुपए में खरीदी थी। कंपनी के निदेशकों और साझेदारों में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी के नाम बताए गए हैं।
अधिवक्ता बोले- यह जनहित और श्रद्धालुओं की सुविधा का मुद्दा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि महाकाल मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा, सार्वजनिक पार्किंग, शासकीय भूमि की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण जनहित का मामला है। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की है।
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