UN ने बदला दुनिया का नक्शा: अफ्रीका दिखेगा और बड़ा, यूरोप-US होंगे छोटे; भारत पर कितना असर?
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
अब दुनिया का नक्शा पहले जैसा नजर नहीं आएगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ऐसा प्रस्ताव मंजूर किया है, जो दुनिया के नक्शे में देशों और महाद्वीपों के वास्तविक आकार को ज्यादा सही तरीके से दिखाने की राह खोलता है।
भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि अमेरिका ने इसका विरोध किया। हालांकि, इससे किसी देश की जमीन या सीमा नहीं बदलेगी, सिर्फ नक्शे पर दुनिया का आकार बदलता नजर आएगा।
ग्रीनलैंड जितना दिखता है, अफ्रीका उससे 14 गुना बड़ा
मौजूदा मर्केटर मैप में ध्रुवों के पास स्थित देश और क्षेत्र वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखाई देते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ग्रीनलैंड है।
नक्शे में यह अफ्रीका के लगभग बराबर नजर आता है, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यही वजह है कि अब ऐसे मैपिंग प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने की बात हो रही है, जिसमें क्षेत्रफल का अनुपात ज्यादा वास्तविक हो।
नए मैप में अफ्रीका का ‘कद’ बढ़ेगा
Equal Earth Projection जैसे नए प्रोजेक्शन में अफ्रीका पहले की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देगा। वहीं यूरोप और उत्तरी अमेरिका का आकार मर्केटर नक्शे के मुकाबले छोटा नजर आएगा।
दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका के आकार में भी अंतर दिखाई दे सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन क्षेत्रों का वास्तविक क्षेत्रफल बदल रहा है।
भारत पर क्या असर होगा?
भारत की जमीन, सीमाएं और वास्तविक क्षेत्रफल बिल्कुल नहीं बदलेंगे। बदलाव सिर्फ नक्शे पर दिखाई देने वाले आकार में होगा।
भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए मर्केटर नक्शे में उस पर विकृतिकरण यूरोप, कनाडा या ग्रीनलैंड जैसे उत्तरी इलाकों की तुलना में कम है। नए प्रोजेक्शन में भारत कुछ अलग अनुपात में दिखाई दे सकता है।
भारत के लिए सीधी बात
क्षेत्रफल: कोई बदलाव नहीं
सीमाएं: बिल्कुल नहीं बदलेंगी
भौगोलिक स्थिति: वही रहेगी
नक्शे पर आकार: प्रोजेक्शन के हिसाब से बदल सकता है
अफ्रीका: पुराने नक्शे के मुकाबले काफी बड़ा दिखाई देगा
1569 का नक्शा आज भी क्यों इस्तेमाल होता है?
मर्केटर प्रोजेक्शन को कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इसका उद्देश्य पृथ्वी का सटीक क्षेत्रफल दिखाना नहीं, बल्कि समुद्री यात्राओं में दिशा और रास्तों को समझना आसान बनाना था।
इसकी यही खासियत इसे नेविगेशन के लिए उपयोगी बनाती है। लेकिन दुनिया को क्षेत्रफल के हिसाब से देखने पर इसमें बड़ी विकृति दिखाई देती है।
अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
UN में प्रस्ताव का अमेरिका ने विरोध किया। अमेरिकी पक्ष ने इसे अनावश्यक और वैचारिक मुद्दे से जुड़ी पहल बताया। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि दुनिया का नक्शा केवल भूगोल नहीं बताता, बल्कि यह हमारी सोच और दुनिया को देखने के नजरिए को भी प्रभावित करता है।
टोगो की पहल और अफ्रीकी संघ के समर्थन से आगे बढ़े इस प्रस्ताव में अफ्रीका के वास्तविक आकार को सही तरीके से दिखाने पर विशेष जोर दिया गया।
क्या अब Google Maps और किताबों से मर्केटर मैप गायब हो जाएगा?
नहीं क्योंकि UN का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं कि स्कूलों, किताबों, वेबसाइटों या मैपिंग कंपनियों को तुरंत मर्केटर प्रोजेक्शन हटाना होगा।
मर्केटर मैप का इस्तेमाल समुद्री नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में जारी रह सकता है। लेकिन शिक्षा, मीडिया और सामान्य विश्व मानचित्रों में Equal Earth जैसे ज्यादा क्षेत्रफल-सटीक प्रोजेक्शन को बढ़ावा मिल सकता है।
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