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टी-20 विश्व कप टूर्नामेंट: तीन शतक, तीन इतिहास और क्रिकेट के क्षितिज पर चमकते तीन नए सितारे

KHULASA FIRST

संवाददाता

19 फ़रवरी 2026, 1:03 pm
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टी-20 विश्व कप टूर्नामेंट

खुलासा फर्स्ट, हेमंत उपाध्याय।
भारत के दिग्गज क्रिकेटर और प्रशिक्षक रहे रवि शास्त्री का कहना है कि 2026 का यह विश्व कप साबित कर रहा है कि टी-20 क्रिकेट अब केवल नामी खिलाड़ियों का खेल नहीं रह गया है। हमने उलटफेर देखे हैं और शतकों की झड़ी भी। भारत के पास खिताब बचाने का सबसे अच्छा मौका है,क्योंकि टीम में अनुभव और बेखौफ युवा जोश का सही मिश्रण है,पर यह भी ध्यान रखना होगा कि  सावधानी जरूरी है, क्योंकि टी- 20 में एक खराब 15 मिनट आपका पूरा टूर्नामेंट खत्म कर सकते हैं। मुझे लगता है कि इस बार फाइनल में हमें एक एशियाई और एक गैर-एशियाई टीम के बीच कड़ी जंग देखने को मिलेगी।

रवि शास्त्री की बात सही साबित होती नजर आ रही
अब तक के मुकाबलों पर नजर डालें तो रवि शास्त्री की बात सही साबित होती नजर आ रही है। इस खेल के जानकारों की राय है कि अनिश्चितताओं के खेल क्रिकेट में जब रिकॉर्ड टूटते हैं, तो इतिहास की नई इबारत लिखी जाती है। जहां वर्ष 2024 के टी- 20 विश्व कप टूर्नामेंट  में जहाँ एक भी शतक नहीं लगा था, वहीं इस बार अब तक तीन शतक जड़े जा चुके हैं, वह भी लगातार तीन दिनों में। इन शतकीय पारियों ने कम से कम इस बात के संकेत तो दे ही दिए हैं कि इस बार कहानी कुछ और होने वाली है। अब तक पथुम निसंका (श्रीलंका) , युवराज सामरा (कनाडा) और साहिबजादा फरहान (पाकिस्तान) ने अपने बल्ले से नई इबारत लिख दी है।

पहला शतक- पथुम निसंका (श्रीलंका) विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया- 16 फरवरी
टूर्नामेंट का पहला शतक श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज पथुम निसंका के  बल्ले से निकला। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने तकनीक और आक्रामकता के बेहतर सम्मिश्रण से 52 गेंदों पर 100 रन बनाए। इसमें 10 चौके और पांच छक्के शामिल थे। इस पारी के बाद पथुम निसंका के ही देश के महान बल्लेबाज कुमार संगकारा ने टिप्पणी की-  "निसंका में वह 'स्पार्क' है जो उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों की कतार में खड़ा करेगा।"

और खुद निसंका ने शतकीय पारी के बाद कहा कि यह पारी उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा उनके प्रशंसकों और देश के संघर्ष को समर्पित है। इस बार का विश्व कप पिछले सीजन से काफी अलग है। यहाँ पिचें बल्लेबाजों को पूरी तरह से आउट नहीं कर रही हैं, लेकिन वे आपसे निरंतरता और सही शॉट चयन की मांग करती हैं। अब तक के मैचों में हमने देखा है कि केवल पावर-हिटिंग से काम नहीं चल रहा।  आपको पारी बुननी पड़ रही है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेरी पारी भी इसी रणनीति का हिस्सा थी कि जोखिम कम लिया जाए और अंत तक टिका रहा जाए। अगर आप सेट हो जाते हैं, तो बड़ा स्कोर मुमकिन है।

दूसरा शतक- युवराज सामरा(कनाडा) विरुद्ध न्यूजीलैंड-  17 फरवरी
कनाडा के 19 बरस के खिलाड़ी युवराज सामरा  ने केवल शतक ही नहीं जमाया बल्कि इतिहास भी लिख दिया। वे टी-20 विश्व कप के इतिहास में शतक बनाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी बन गए। उनसे पहले यह गौरव पाकिस्तान के अहमद शहजाद के खाते में था। अहमद शहजाद ने 22 साल 127 दिन की उम्र में  2014 के टी-20 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ यह कारनामा किया था। युवराज सामरा ने 58 गेंदों पर 9  चौकों और छह छक्कों की मदद से शतक बनाया।

सामरा के शतक पर न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग ने गौर करने लायक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सामरा ने 'एसोसिएट नेशन' के टैग को पीछे छोड़ एक वैश्विक सितारे के रूप में पहचान बनाई है। खुद सामरा बोले-  "लोग हमें 'अंडरडॉग' कहते हैं, लेकिन अब तक के मैचों ने साबित किया है कि बड़ी और छोटी टीमों के बीच का अंतर कम हो रहा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ हमारा प्रदर्शन कोई तुक्का नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि हम भी विश्व स्तर की गेंदबाजी का सामना कर सकते हैं। भले ही हम सुपर-8 की दौड़ से बाहर हो गए हों, लेकिन हमने दिखा दिया है कि टी-20 फॉर्मेट में अब कोई भी टीम किसी को भी हरा सकती है। यह विश्व कप क्रिकेट की नई शुरुआत है।"

तीसरा शतक-  साहिबजादा फरहान (पाकिस्तान) विरुद्ध नामीबिया- 18 फरवरी
पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान ने नामीबिया के खिलाफ शानदार तरीके से अपना शतक बनाया।उन्होंने 58 गेंदों का सामना कर  11 चौके, चार छक्के लगाए। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और स्पीड स्टार वसीम अकरम ने फरहान की तारीफ में कहा कि पाकिस्तान टीम  को इसी निडरता की जरूरत थी, वहीं पूर्व क्रिकेटर इंजमाम-उल-हक ने कहा कि साहिबजादा फरहान की इस पारी में मुझे सबसे अच्छी बात उनकी 'बॉडी लैंग्वेज' लगी। उन्होंने नामीबिया के गेंदबाजों को कभी खुद पर हावी होने का मौका नहीं दिया।  फरहान के पास वह 'क्रिकेटिंग गियर' है जिसे वे जरूरत पड़ने पर बदल सकते हैं। पाकिस्तान को एक ऐसे बल्लेबाज की तलाश थी जो सलामी जोड़ी के बाद पारी को संभाल सके और फरहान ने साबित कर दिया है कि वह लंबी रेस के घोड़े हैं।

 शतकीय पारी के बाद फरहान ने अपनी पारी का  श्रेय टीम प्रबंधन के भरोसे और अपनी तकनीक पर की गई कड़ी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा- "विश्व कप की जर्सी पहनकर शतक लगाना मेरे लिए केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जज्बाती सफर है। जब मैं बल्लेबाजी के लिए उतरा, तो मेरा इरादा साफ था। मुझे अंत तक टिकना है और रन गति को कम नहीं होने देना है। पिछले कुछ महीनों में मैंने अपनी तकनीक और शॉट सिलेक्शन पर बहुत पसीना बहाया है। यह शतक पाकिस्तान के उन लाखों प्रशंसकों के लिए है जो हमेशा हमारी जीत की दुआ करते हैं।"

इन तीनों ही शतकों में तीनों ही बल्लेबाजों ने अपने बयानों पर आप नजर डालें तो साफ प्रतीत होता है कि उनके लिए रिकॉर्ड अथवा कीर्तिमान कोई मायने नहीं रखते, उनके लिए अपनी टीम सर्वोपरि है। क्रिकेट के दिग्गजों के अनुसार ये तीन शतक केवल स्कोरबोर्ड पर दर्ज संख्याएँ नहीं हैं, बल्कि यह संदेश हैं कि क्रिकेट का संतुलन अब बदल रहा है।

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