इंडेक्स हॉस्पिटल में दुर्लभ कैंसर की सर्जरी सफल: छह घंटे तक चला हाई रिस्क ऑपरेशन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंडेक्स मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में डॉक्टरों ने एक 50 वर्षीय मरीज की दुर्लभ और अत्यंत जटिल कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक कर नई उम्मीद जगाई है। मरीज करीब दो वर्षों से छाती में तेजी से बढ़ रहे विशाल ट्यूमर से परेशान था।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह समय पर उपचार नहीं करा सका, जिससे कैंसर शरीर के फेफड़े, डायफ्राम, लिवर और किडनी तक पहुंच गया। अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक फैल गया। हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि चार बड़े अस्पतालों ने सर्जरी करने से इनकार कर दिया था। मरीज प्रदेश के जुलवानिया क्षेत्र का निवासी है।
उसे लगातार असहनीय दर्द रहता था और सांस लेने में भी परेशानी होने लगी थी। ट्यूमर के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण चलना-फिरना और सामान्य दैनिक कार्य करना भी मुश्किल हो गया था।
आखिरकार मरीज ने इंडेक्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में उपचार के लिए संपर्क किया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने जोखिम उठाकर सर्जरी करने का निर्णय लिया।
ट्यूमर का आकार लगभग 45 सेंटीमीटर लंबा और 30 सेंटीमीटर चौड़ा- सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अमित कटलाना ने बताया कि मरीज को सारकोमा कैंसर शरीर की मांसपेशियों और टिश्यू में विकसित होता है तथा धीरे-धीरे आसपास के अंगों को प्रभावित करने लगता है।
मरीज का ट्यूमर बाईं पसलियों और मांसपेशियों से शुरू होकर फेफड़े, डायफ्राम, लिवर और किडनी के आसपास तक फैल चुका था। ट्यूमर का आकार लगभग 45 सेंटीमीटर लंबा और 30 सेंटीमीटर चौड़ा हो गया था, जो सामान्य स्थिति की तुलना में बेहद बड़ा और खतरनाक माना जाता है।
तीन पसलियां हटानी पड़ीं, विशेष मेडिकल जाली का उपयोग- डॉक्टरों के अनुसार ऑपरेशन अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। सर्जरी के दौरान छाती का बड़ा हिस्सा खोलना पड़ा और कैंसर से प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए तीन पसलियां निकालनी पड़ीं।
इसके साथ ही डायफ्राम का बड़ा हिस्सा भी हटाकर दोबारा तैयार किया गया। शरीर में बने खाली हिस्से को मजबूत बनाने के लिए किया गया। डॉक्टरों ने पसलियों का पुनर्निर्माण कर छाती की दीवार को फिर से तैयार किया और डायफ्राम को दोबारा जोड़ा।
एक फेफड़े के सहारे चला ऑपरेशन- डॉ. कटलाना ने बताया कि इस तरह की सर्जरी में मरीज को केवल एक फेफड़े के सहारे बेहोशी की अवस्था में रखना पड़ता है। ऑपरेशन के दौरान दूसरे फेफड़े को दबाकर रखना पड़ता है, जिससे एनेस्थीसिया की प्रक्रिया भी बेहद कठिन हो जाती है।
करीब छह घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, सहायक डॉक्टरों और रेजिडेंट चिकित्सकों की बड़ी टीम शामिल रही।डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह की सर्जरी में सामान्य रूप से तीन से पांच लाख रुपए तक का खर्च आता है, लेकिन मरीज का पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत नि:शुल्क किया गया।
ऑपरेशन में उपयोग की गई विशेष मेडिकल जाली की कीमत ही करीब 60 हजार रुपए थी, जिसे भी योजना के अंतर्गत मुफ्त उपलब्ध कराया गया। सफल सर्जरी के बाद मरीज की हालत अब स्थिर बताई जा रही है और वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
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