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आराम की उम्र में पानी के लिए जद्दोजहद: कांग्रेस कर रही ओछी राजनीति; सफाई के लिए हुआ ट्रीटेड वाटर का उपयोग

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 मई 2026, 5:36 pm
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पानी की बर्बादी के आरोपों पर महापौर ने किया पलटवार

निगम के टैंकर से धोया जा रहा महापौर का बंगला

जनता प्यासी और सत्ता के गलियारे में पानी की बर्बादी

भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य

जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते अफसरों के बीच पानी के लिए मशक्कत जारी

जलसंकट… मेयर ने पार्षदों से लिया फीडबैक, व्यवस्था सुधारने के निर्देश

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिन्हें इस उम्र में घर पर बैठकर आराम करना चाहिए, वे घर से दूर जाकर पानी भरने को मजबूर हैं। महाराणा प्रताप नगर स्थित टंकी से पानी लेने पहुंचे बुजुर्गों का कहना है कि हमारे यहां नर्मदा की लाइन तो है, लेकिन पानी नहीं आता।

महापौर सचिवालय के बाहर पानी बहाने का वीडियो वायरल होने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ओछी राजनीति करार दिया है। महापौर ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिख रहा पानी पीने का नहीं, बल्कि ट्रीटेड था, जिसका उपयोग सफाई के लिए किया गया।

उन्होंने बताया ड्रेनेज की सफाई के लिए डीसिल्टिंग मशीन वहां पहुंची थी और उस मशीन से जो गंदगी फैली थी, उसे साफ करने के लिए ट्रीटेड वाटर का इस्तेमाल किया गया था।

महापौर ने कहा शहर की स्वच्छता को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और यदि महापौर सचिवालय के बाहर ही गंदगी रहेगी, तो लोग सवाल उठाएंगे कि स्वच्छ शहर के मुखिया का कार्यालय ही साफ नहीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कांग्रेस के नेता शायद उस नोजल और डीसिल्टिंग मशीन को देख ही नहीं पाए, जिससे सफाई की जा रही थी।

विश्वास नहीं हो रहा कि कांग्रेस राजनीति को इतने निचले स्तर पर ले जाएगी। महापौर के अनुसार कांग्रेस के लोग रात-दिन उनके बंगले के बाहर कैमरा लेकर तैनात रहते हैं, ताकि किसी भी तरह कोई वीडियो बनाकर उसे मुद्दा बनाया जा सके।

ट्रीटेड वाटर से ही करें मकान निर्माण व सफाई-धुलाई- महापौर भार्गव ने कहा वे लगातार शहर के नागरिकों से अपील कर रहे हैं कि मकान निर्माण या साफ-सफाई जैसे कामों के लिए ट्रीटेड वाटर का ही उपयोग करें। नगर निगम इसके लिए टैंकर उपलब्ध कराने को तैयार है।

यदि ट्रीटेड वाटर से सार्वजनिक स्थलों या घर के बाहर की सफाई की जाती है, तो इसमें बुराई क्या है। महापौर ने इस पूरी घटना को कांग्रेस की हताशा और राजनीति का ओछापन बताते हुए कहा जनता सब देख रही है कि कौन विकास के काम में सहयोग कर रहा है और कौन सिर्फ कैमरों के जरिये विवाद पैदा करने की ओछी राजनीति में लगा है।

भीषण गर्मी में जहां पूरा शहर पानी के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के प्रथम नागरिक कहे जाने वाले महापौर पुष्यमित्र भार्गव के शासकीय आवास को धोने के लिए टैंकर के माध्यम से सरकारी पानी सरेआम नाली में बहाया जा रहा है।

बुधवार दोपहर की यह घटना इंदौर नगर निगम की संवेदनहीनता और जनता के प्रति उदासीनता का शर्मनाक उदाहरण है। हद तो यह कि टैंकर के पानी से की जा रही महापौर आवास की धुलाई का जब कुछ युवाओं ने वीडियो बनाया तो अपनी करतूत छिपाने के लिए निगमकर्मी ट्रीटेड वाटर बताकर उन्हें धमकाते नजर आए।

दरअसल, निगम के टैंकर में पानी लाकर महापौर आवास को धोया जा रहा था। इस दौरान सैकड़ों लीटर पानी व्यर्थ बहता देख वहा मौजूद युवा इसका वीडियो बनाने लगे। यह निगमकर्मियों ने टैंकर में ट्रीटेड वाटर का हवाला देते हुए उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।

एक ओर नगर निगम द्वारा आमजन से पानी की बूंद-बूंद बचाने की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी ओर खुद महापौर के बंगले को धोने के लिए इस तरह पानी बहाया जा रहा है। इससे यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या तमाम नियम-कायदे केवल आम जनता के लिए ही हैं, सत्तासीनों व सरकारी अफसरों के लिए नहीं?

महापौर सचिवालय में पानी की बर्बादी पर कांग्रेस का तंज
महापौर सचिवालय के बाहर पानी बहाए जाने का वीडियो सामने आने के बाद सियासत गरमा गई है। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने तंज कसते हुए महापौर से इस्तीफा देने की मांग कर डाली।

नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा एक तरफ शहर की जनता पानी के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ महापौर अपने सचिवालय को पानी से धुलवाकर संसाधनों की बर्बादी कर रहे हैं।

यह जनसेवा का शर्मनाक मॉडल है। यदि थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो महापौर को इस संवेदनहीनता के लिए पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

नियम तोड़ने वालों पर निगम की सख्ती, 22 हजार से अधिक भवनों को नोटिस
शहर में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने के लिए नगर निगम ने अब सख्त रुख अपनाया है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने आदेश दिए कि 5000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी बड़े भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। सर्वे के बाद ऐसे 22,769 भवनों को चिह्नित किया गया, जिनमें यह सिस्टम नहीं लगा है। उनके मालिकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।

निगम ने भवन निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे भवनों की जांच कर उक्त सिस्टम लगवाना सुनिश्चित करें। यदि समय सीमा के भीतर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया, तो जल संचयन उपविधियां-2022 के तहत संबंधित भवन मालिक पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भविष्य में पानी की समस्या से बचने के लिए वर्षाजल को सहेजना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने सभी भवन मालिकों से अपील भी की है कि वे जिम्मेदारी निभाते हुए अपने भवनों में जल्द से जल्द यह सिस्टम लगवाएं।

शहर प्यासा और सिस्टम तमाशबीन
शहर आज एक ऐसी त्रासदी से गुजर रहा है, जब नलों से पानी तो नहीं आ रहा, बल्कि सूखी पाइप लाइनों की खामोशी सुनाई देती है। शहर का भू-जल रसातल में समा चुका है और जल प्रबंधन की बदइंतजामी ने आम आदमी के कंठ सुखा दिए हैं।

नगर निगम और नर्मदा जल प्राधिकरण के गलियारों में बैठकों का दौर जारी है, लेकिन इन फैसलों का असर सड़कों पर कहीं नजर नहीं आता। स्थिति की भयावहता का आलम यह है कि प्रशासनिक विफलता के आगे नतमस्तक होकर खुद कलेक्टर शिवम वर्मा को कमान संभालनी पड़ी, लेकिन हकीकत यह है कि उनके तमाम प्रयासों के बावजूद शहर की प्यास बुझाने का कोई ठोस रास्ता फिलहाल नहीं दिख रहा।

सबसे हृदयविदारक दृश्य महाराणा प्रताप नगर की गलियों में देखने को मिल रहा है, जहां वे बुजुर्ग, जिन्हें इस ढलती उम्र में आराम की जरूरत है, खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी के लिए भटक रहे हैं।

शहर की सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा अब सवारियों को ढोने के बजाय पानी के ड्रमों का बोझ उठा रहे हैं। क्षेत्र में नर्मदा की पाइप लाइनें तो बिछी हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आता।

पानी के लिए हाहाकार...इंदौर की जनता पानी के लिए करती पुकार अब तो सुन लो सरकार
इंदौर। वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी ने पुलिस के चरणों में नत मस्तक होकर पानी के लिए गिड़गिड़ाए तो वहीं क्षेत्रीय विधायक मधु वर्मा ने इसे नौटंकी बताया।

इंदौर में जहां पानी की कमी को लेकर लगातार चक्का जाम रैली और प्रदशर्न हो रहे हैं तो वहीं इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने मीडिया को बताया कि पानी की पूर्ति के लिए कई अतिरिक्त टैंकर भी चलाए जा रहे हैं नर्मदा के माध्यम से भी पानी सप्लाई हो रहा है और बोरिंग के माध्यम से भी हो रहा है अतिरिक्त टैंकर भी लगाए गए और जहां निर्माण कार्य हो रहे हैं वहां पर भी रियूज पानी का इस्तेमाल करने की अपील की है और जहां पर ऐसा नहीं होता है कार्रवाई की जाएगी ताकि पानी की कमी को कंट्रोल किया जा सके |

पिछले दिनों पानी के संकट को सत्ताधारी दल के विधायक महेंद्र हडिया भी और पार्षद भी महापौर को कड़े शब्दों में अवगत करा चुके हैं तब लग रहा था कि पानी की समस्या दूर होगी लेकिन उसके बाद भी कई जगहों पर पानी के लिए मांग और विरोध जारी रहा अब देखना होगा कि पानी के इस संकट में कैसे नगर निगम और महापौर पानी की समस्या से निजात इंदौर की जनता को दिलाते हैं?

बिजलपुर कंट्रोल रूम का किया औचक निरीक्षण
भीषण गर्मी के बीच शहर में पानी की किल्लत को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कल बिजलपुर स्थित जल नियंत्रण केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की और अधिकारियों को शहर में पानी की सप्लाई सुचारु बनाने के निर्देश दिए। महापौर ने कहा नागरिकों को समय पर पानी उपलब्ध कराना निगम की पहली प्राथमिकता है।

निरीक्षण के दौरान भार्गव ने अलग-अलग वार्डों के पार्षदों से फोन पर बात की और उनके क्षेत्रों में पानी के दबाव व उपलब्धता की स्थिति जानी। पार्षदों से मिली जानकारी के आधार पर महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन इलाकों में पानी की समस्या है, वहां फौरन व्यवस्था सुधारी जाए।

उन्होंने पाइप लाइन लीकेज, मोटर खराब होने या बिजली जैसी तकनीकी दिक्कतों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि जिन इलाकों में पाइप लाइन से पानी नहीं पहुंच पा रहा, वहां टैंकरों के जरिये जलापूर्ति करें, ताकि लोगों को गर्मी में परेशानी न हो।

निर्माण में पीने का पानी इस्तेमाल कर रहे 30 भवनों का काम रोका
नगर निगम ने निर्माण कार्यों में पीने के पानी की बर्बादी रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब शहर में किसी भी निर्माणाधीन भवन या कॉलोनी में निर्माण कार्य के लिए पीने के पानी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के आदेश पर शहर के 64 निर्माण स्थलों की सघन जांच की गई। इस दौरान 30 निर्माणाधीन भवनों पर निर्माण के लिए पीने का पानी उपयोग में लाया जा रहा था।

इस पर उनका काम तत्काल प्रभाव से बंद कराय गया। वहीं 34 निर्माण स्थलों के संचालकों ने निगम के निर्देश का पालन करते हुए जरूरी शुल्क जमा कर ट्रीटेड वाटर का उपयोग शुरू कर दिया है।

निगम आयुक्त ने सभी बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भू-जल स्तर को बचाने के लिए ट्रीटेड वाटर का ही उपयोग करें। निगम का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

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