घूसखोरों पर सख्ती: अब सिर्फ पकड़ना नहीं; 10 साल की जेल भी
KHULASA FIRST
संवाददाता

हाई कोर्ट के फैसले के बाद लोकायुक्त एक्शन में
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कानूनी सख्ती की राह खुल गई है। अब रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने वाले अफसर और कर्मचारी सिर्फ मामूली सजा से नहीं बच पाएंगे, बल्कि उन्हें 10 साल तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
यह बदलाव हाई कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद आया है, जिसमें साफ कहा गया है कि रिश्वत लेना केवल अपराध ही नहीं, बल्कि अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करना भी माना जाएगा। दरअसल, अब तक ऐसे मामलों में मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई होती थी, जिसमें रिश्वत लेने का अपराध शामिल है, लेकिन हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है तो वह अवैध आय अर्जित करने की श्रेणी में भी आता है।
इसलिए ऐसे मामलों में धारा 13(1)(बी) को भी जोड़ा जाना चाहिए, जिसमें अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है।
28 मामलों को चिह्नित किया
इस फैसले के बाद लोकायुक्त संगठन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए इंदौर संभाग के 28 मामलों को चिह्नित किया है। इन मामलों में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग रकम की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया था। इन रकमों में 15 हजार से 1 लाख रुपए तक शामिल हैं।
अब इन सभी मामलों में चालान में नई धारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लोकायुक्त के अधिकारियों के अनुसार जिन मामलों में पहले ही चालान पेश हो चुका है, उनमें कोर्ट में आवेदन देकर संशोधन कराया जा रहा है, ताकि आरोपों में नई धाराएं जोड़ी जा सकें। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पहले से चल रहे मामलों में भी आरोपियों पर सजा का दायरा बढ़ सकता है।
फिर से होगा बड़े मामलों का खुलासा
इंदौर संभाग में जिन मामलों को फिर से खोला जा रहा है, उनमें पंचायत, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इन मामलों में कई ऐसे उदाहरण हैं, जहां आरोपी अधिकारियों को बेहद नाटकीय परिस्थितियों में रंगेहाथ पकड़ा गया था।
किसी ने ऑफिस में बैग में पैसे रखवाए, तो कोई मीटिंग छोड़कर रिश्वत लेने पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिलेगी और जांच एजेंसियों को मामलों को मजबूत तरीके से पेश करने में मदद मिलेगी। वहीं आम जनता के लिए यह संकेत है कि अब भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ औपचारिक नहीं रहेगी, बल्कि इसके गंभीर परिणाम भी सामने आएंगे।
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