भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर रोक: हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ संबंधित वकील ही देख सकेंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट की प्रति सभी वकीलों को नहीं दी जाएगी। केवल उन्हीं अधिवक्ताओं को रिपोर्ट देखने की अनुमति होगी, जिनका वकालतनामा इस मामले में पेश है।
कोर्ट ने संबंधित अधिवक्ताओं को रिपोर्ट की सामग्री मीडिया में सार्वजनिक करने या उस पर चर्चा करने से भी मना किया है।
भागीरथपुरा मामले में मौतों की जांच के लिए हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग ने जांच पूरी करने के बाद 500 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष पेश की है।
अधिकारियों से लेकर पार्षद और निगम कर्मचारियों की भूमिका जांची
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दूषित पानी कांड से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की है। इसमें तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों के साथ स्थानीय पार्षद, जलकार्य समिति के प्रभारी और नगर निगम के कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई है।
जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश की गई कि दूषित पानी कहां से आया, इसकी वजह क्या थी और इसके लिए प्रथमदृष्टया कौन जिम्मेदार है।
इन बिंदुओं पर हुई जांच
-भागीरथपुरा में सप्लाई किया गया पानी दूषित था या नहीं।
-पानी के दूषित होने का वास्तविक स्रोत और कारण क्या था।
-दूषित पानी में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण या क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की भूमिका थी या नहीं।
-दूषित पानी पीने से लोगों को कौन-कौन सी बीमारियां हुईं।
-पानी के कारण हुई मौतों की वास्तविक संख्या कितनी है।
-मामले में प्रथमदृष्टया जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान।
-प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले मुआवजे के संबंध में स्थिति।
याचिकाकर्ता ने मांगी थी रिपोर्ट की प्रति
सुनवाई से एक दिन पहले सोमवार को याचिकाकर्ता प्रभात पांडेय ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया के माध्यम से हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया था।
इसमें जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति सभी याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
मंगलवार की सुनवाई में कोर्ट ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि केवल मामले में वकालतनामा दाखिल करने वाले अधिवक्ता ही इसे देख सकेंगे।
अस्पतालों के पानी में ई-कोलाई मिलने का भी दावा
याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल आवेदन में भागीरथपुरा के नलकूपों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए जाने का दावा किया गया है। आवेदन में कहा गया है कि कुछ शासकीय अस्पतालों के पानी में भी ई-कोलाई पाए जाने की बात सामने आई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। ऐसे में पेयजल में बैक्टीरिया की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है और अस्पतालों में आने वाले लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
आवेदन में प्रशासन की कथित लापरवाही के साथ ही अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से निजी अस्पतालों और पैक्ड पानी कारोबार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर लापरवाही किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार
500 से अधिक पन्नों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के पास पहुंच चुकी है, लेकिन फिलहाल इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। कोर्ट के निर्देश के बाद रिपोर्ट केवल मामले से जुड़े अधिवक्ता देख सकेंगे और उसकी सामग्री मीडिया में साझा करने पर भी रोक रहेगी। ऐसे में भागीरथपुरा मामले में आयोग ने किन्हें जिम्मेदार माना है और उसकी क्या प्रमुख सिफारिशें हैं, इसका खुलासा फिलहाल नहीं हो सकेगा।
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