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हाई कोर्ट में बोले- आईएएस का नाम हटाने का दबाव था: कोर्ट ने उठाए प्रश्न; जुआ कांड में सस्पेंड टीआई का पलटवार

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 अप्रैल 2026, 8:49 pm
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हाई कोर्ट में बोले- आईएएस का नाम हटाने का दबाव था

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मानपुर के चर्चित जुआकांड में निलंबित थाना प्रभारी के मामले ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। कल हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान न सिर्फ पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए, बल्कि स्वयं सस्पेंड टीआई ने भी चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए पूरे घटनाक्रम को विवादों के केंद्र में ला दिया।

करीब दो घंटे चली सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि जब बड़े स्तर पर जुआ पकड़ा गया था तो संबंधित आईएएस अधिकारी के बयान क्यों दर्ज नहीं किए गए। साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जिस फार्म हाउस पर कार्रवाई हुई वहां सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं थे।

अदालत की टिप्पणी काफी अहम रही, जिसमें कहा गया कि यदि ड्यूटी निभाने वाले पुलिसकर्मी को ही सस्पेंड कर दिया जाएगा तो भविष्य में निष्पक्ष कार्रवाई करने से अधिकारी हिचकेंगे। फिलहाल कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

लाखों रुपए जब्त किए थे
मामला 10-11 मार्च की रात का है, जब मानपुर क्षेत्र स्थित एक फार्म हाउस पर पुलिस ने दबिश देकर जुआ खेल रहे लोगों को पकड़ा था। यह फार्म हाउस एक महिला आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य से जुड़ा बताया गया था, जो मध्यप्रदेश वित्त निगम में उच्च पद पर पदस्थ हैं।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में जुआरियों को गिरफ्तार किया गया था और लाखों रुपए की भी जब्त किए थे। इस कार्रवाई के बाद मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र सिंह हिहोरे, उपनिरीक्षक मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि कुछ समय बाद एसआई और एएसआई को बहाल कर दिया गया, लेकिन टीआई हिहोरे पर कार्रवाई जारी रही और उन्हें बुरहानपुर अटैच कर दिया गया।

15 मार्च को सिमरोल क्षेत्र में भी पकड़ा था बड़ा जुआ
टीआई ने याचिका में एक और महत्वपूर्ण बिंदु उठाया है। उन्होंने बताया कि 15 मार्च को सिमरोल क्षेत्र में भी बड़ा जुआ पकड़ा था, लेकिन वहां के टीआई के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। इस पर भी कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, हालांकि सुनवाई के दौरान स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ सका।

बताया जा रहा है कि टीआई ने सस्पेंशन और चार्जशीट को चुनौती देते हुए दो याचिकाएं दायर की हैं। फिलहाल सस्पेंशन से जुड़े मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है, जबकि चार्जशीट को लेकर सुनवाई अभी जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में अंदरूनी दबाव, कार्रवाई की निष्पक्षता और प्रभावशाली लोगों के प्रभाव जैसे कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में कोर्ट का फैसला न सिर्फ इस मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

घटनास्थल में बदलाव किया जाए
अब टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए दावा किया है कि जुआ पकड़ने के बाद उन पर दबाव बनाया गया था कि एफआईआर से महिला आईएएस अधिकारी का नाम हटा दिया जाए और घटनास्थल में बदलाव किया जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उसी दिन उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि न्याय की मांग करते हुए याचिका दायर करने के बाद उनका ट्रांसफर कर उन्हें प्रताड़ित किया गया।

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