भारत में खेल, दुबई में ठिकाना: सटोरिए सतीश सनपाल की फाइल में फिर खुला पैसे का राज
KHULASA FIRST
संवाददाता

सट्टे से जुटाए करोड़ों रुपए किस रास्ते से पहुंचे विदेश?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सटोरिए सतीश सनपाल पहले भारत में उभरा, फिर शिकायतों और मामलों की फाइलें बढ़ीं। 2022 में एलओसी तक की नौबत आई और इसके बाद कहानी का एक सिरा दुबई से जुड़ता दिखाई दिया। अब नए आपराधिक प्रकरण सामने आने के साथ यूएई में बैंक खातों और संपत्तियों पर कथित रोक के दस्तावेजों की चर्चा ने पुराने सवालों को फिर जिंदा कर दिया है।
सतीश सनपाल से जुड़े घटनाक्रम को एक साथ रखकर देखें तो सबसे बड़ा सवाल है क्या भारत में लोगों से कथित तौर पर लिया गया पैसा यहीं घूमता रहा, या उसका कोई रास्ता दुबई तक भी गया। यह सवाल अभी जांच का विषय है लेकिन कहानी में मौजूद तारीखें, नाम, कंपनियां, संपत्तियां और वित्तीय लेन-देन की संभावित कड़ियां अब जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के मुताबिक 5 अगस्त 2022 को एसपी जबलपुर के अनुरोध पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने सतीश सनपाल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया था।चार साल पुराना यह रिकॉर्ड आज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब उससे अलग समय में नए मामले सामने आ रहे हैं।
एलओसी की मूल फाइल में आखिर क्या था?
सवाल हैं सटोरिए सनपाल के विरुद्ध किस केस के आधार पर एलओसी मांगा गया था? कौन-सी धाराएं लगी थीं? उस मामले की जांच कहां तक पहुंची? क्या उसमें कोई बैंक खाता, कंपनी या संपत्ति सामने आई थी? जब तक इनके जवाब नहीं मिलते, 2022 के एलओसी को नए मामलों से जोड़ना सिर्फ अनुमान होगा। लेकिन जांच के लिहाज से पुरानी फाइल को फिर खंगालना जरूरी जरूर हो जाता है।
नई एफआईआर ने पुराने रिकॉर्ड पर फिर डाली रोशनी
सटोरिए सनपाल को जबलपुर में सामने आए नए प्रकरण ने फिर चर्चा में ला दिया है। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा शिकायत में बताए गए पैसे का रास्ता हो सकता है। साथ ही रकम किसने दी? किसके खाते में गई? उसके बाद किस खाते में पहुंची?क्या किसी कंपनी का इस्तेमाल हुआ? जैसे सवाल भी खड़े हैं।
दुबई में कथित संपत्ति फ्रीज ने बढ़ाया रहस्य
इस पूरी कहानी में सबसे ज्यादा चर्चा यूएई से जुड़े कथित दस्तावेजों की है। दावा है सतीश सनपाल, उनकी पत्नी तबिंदा सनपाल और उनसे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों तथा वित्तीय परिसंपत्तियों पर दुबई में अस्थायी रोक लगाई गई है।
अगर यह दावा आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्ट होता है तो अगला सवाल बेहद महत्वपूर्ण होगा।रोक किसने लगाई और क्यों? किस यूएई एजेंसी ने आदेश दिया? किस केस नंबर के तहत? कौन-से खाते या संपत्तियां शामिल हैं? कार्रवाई की तारीख क्या है?
और क्या भारतीय जांच से इसका कोई आधिकारिक संबंध है?इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे यूएई वाला अध्याय महज एक अलग वित्तीय कार्रवाई है या भारत में चल रहे मामलों से इसकी कोई कड़ी बनती है।
एक नाम, कई कंपनियां... पैसा किसके पास पहुंचा?... पुलिस जांच करे तो पता लग सकता है सनपाल की जांच में अगला पड़ाव कंपनियां हो सकती हैं।किस कंपनी का डायरेक्टर कौन है? असली कारोबार क्या है? किन कंपनियों के बीच लेन-देन हुआ? कहीं एक ही रकम अलग-अलग कंपनियों के बीच घूमती तो नहीं रही? शेयर, लोन, निवेश या सर्विस भुगतान के नाम पर बड़ी रकम का ट्रांसफर हुआ या नहीं?
कंपनी के कागजों पर मालिक कोई और हो सकता है लेकिन असली फायदा किसे मिला? अंतिम लाभार्थी की पड़ताल कथित आर्थिक नेटवर्क की असली तस्वीर सामने ला सकती है।संपत्तियों का हिसाब खुला तो कई पन्ने पलट सकते हैं।
कहानी अभी खत्म नहीं... असली खुलासा बैंक स्टेटमेंट में छिपा है... सटोरिए सतीश सनपाल को लेकर सामने आए पुराने एलओसी, नए आपराधिक प्रकरण और यूएई में कथित वित्तीय कार्रवाई में इन तीनों को फिलहाल एक ही नेटवर्क बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन इन घटनाक्रमों ने जांच के लिए एक बड़ा रास्ता जरूर खोल दिया है।
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