सोनम को मिली जमानत: परिजन का फूटा गुस्सा; राजा की मां बोली, अब समझ आया कानून को अंधा क्यों कहते हैं
KHULASA FIRST
संवाददाता

भाई ने जताया जान का खतरा, सीबीआई जांच की मांग
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्य आरोपी पत्नी को मेघालय की कोर्ट से जमानत मिल गई है। इस फैसले ने राजा के परिवार को झकझोर कर रख दिया है। हैरानी की बात यह रही कि परिजन को इसकी जानकारी उनके वकील से नहीं, बल्कि शिलॉन्ग पुलिस के एक फोन कॉल से मिली।
मेरे बेटे का क्या कसूर था, क्यों मारा उसे?
मामलेेे को लेकर राजा की मां ने फैसले पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, हमें तो यकीन ही नहीं हुआ। अब समझ आया कि कानून को अंधा क्यों कहा जाता है। उमा ने आरोप लगाया कि सोनम इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड है और उसे राहत मिलना न्याय के खिलाफ है। उमा रघुवंशी ने भावुक होते हुए कहा, जब भी वो इंदौर आएगी, मैं उससे पूछूंगी कि मेरे बेटे का क्या कसूर था, क्यों मारा उसे? उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।
जमानत के आधार पर भी उठे सवाल
परिवार ने जमानत के आधार पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियों को आधार मानते हुए राहत दी। अदालन ने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को कारण स्पष्ट नहीं बताया गया, जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। परिजन का आरोप है कि उन्हें अब तक चार्जशीट की कॉपी तक नहीं दी गई, जबकि आरोपी पक्ष को यह उपलब्ध करा दी गई।
320 दिन बाद जेल से रिहाई
करीब 320 दिन जेल में रहने के बाद सोनम को जमानत मिली है। कोर्ट ने शर्त रखी है कि ट्रायल के दौरान उसे शिलॉन्ग में ही रहना होगा। मंगलवार को उसके पिता जमानत प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे, जिसके बाद शाम को सोनम जेल से रिहा हो गई।
सुनवाई के दौरान सामने आया कि गिरफ्तारी फॉर्म अधूरा था, धाराओं में अंतर था और शुरुआती पेशी के दौरान वकील की उपलब्धता स्पष्ट नहीं थी। साथ ही, लंबे समय से न्यायिक हिरासत और ट्रायल की धीमी गति भी जमानत का आधार बनी।
भाई को न्याय नहीं दिला पा रहे…
मृतक राजा के भाई ने भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि जमानत सोमवार को ही मिल गई थी, लेकिन परिवार को मंगलवार को इसकी जानकारी दी गई। विपिन का कहना है, चार दिन पहले तक वकील ने जमानत की संभावना से इनकार किया था, अचानक ऐसा होना कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम के परिवार, खासकर उसके भाई गोविंद का उसे पूरा समर्थन मिला है। पैसों की ताकत के आगे हम अपने भाई को न्याय नहीं दिला पा रहे हैं, उन्होंने कहा। विपिन ने आशंका जताई कि अगर वे जमानत रद्द कराने के लिए शिलॉन्ग जाते हैं, तो उन पर हमला कराया जा सकता है। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो उसके लिए गोविंद जिम्मेदार होगा, उन्होंने कहा।
चार्जशीट दाखिल, सबूत सुरक्षित
अभियोजन की चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में पेश हो चुकी हैं, ऐसे में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका कम मानी गई।
स्थायी पता और कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का स्थायी निवास है, पारिवारिक बैकग्राउंड मजबूत है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इन सब बिंदुओं के बाद महिला होने के आधार पर नरमी अदालत ने महिला आरोपी होने के कारण जमानत में नरमी के सिद्धांत को भी ध्यान में रखा।
इन आधारों पर मिली सोनम को जमानत
सोनम को जान जमानत मिलने का आधार इन बिंदुओं को माना गया है- गिरफ्तारी प्रक्रिया में खामियां, कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को स्पष्ट रूप से कारण नहीं बताए गएउल्लंघन है। दूसरा संवैधानिक अधिकार का हनन, अदालत ने माना कि आरोपी को ऐसी भाषा और तरीके से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, जिससे वह अपने बचाव का अधिकार प्रभावी ढंग से उपयोग कर सके।
तीसरा अधूरा दस्तावेजीकरण, अरेस्ट फॉर्म और केस डायरी में गंभीर त्रुटियां पाई गईं। धाराओं में अंतर और जरूरी जानकारी का अभाव सामने आया। वहीं महत्वपूर्ण और चौथा वकील की उपलब्धता पर सवाल है।
शुरुआती पेशी के दौरान आरोपी को कानूनी सलाह मिलने के पर्याप्त प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं मिले। पांचवें बिंदु की बात करें तो लंबी न्यायिक हिरासत, आरोपी करीब 10 महीने से अधिक समय से जेल में थी, जबकि ट्रायल की गति धीमी रही।
जेल से बाहर आई सोनम- खामोशी, बदले हालात और नया ठिकाना
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सोनम जेल से रिहा होते वक्त पूरी तरह शांत और गुमसुम नजर आई। मीडिया के सवालों पर उसने एक शब्द तक नहीं कहा। रिहाई के बाद वह सीधे अपने पिता के साथ वहां से निकल गई। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन पिता ने पहले सोनम से नाता तोड़ लिया था, वही अब उसकी जमानत के लिए पहुंचे।
पिता ने कोर्ट में ₹50,000 का मुचलका जमा किया और एक स्थानीय होटल संचालक को जमानती बनाया। जेल से बाहर आने के बाद सोनम को सीधे एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया, जहां उसकी अगली कानूनी रणनीति तय की जा सकती है।
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