सोमनाथ हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: विरासत से विकास की महत्वपूर्ण यात्रा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सोमनाथ हमारी प्राचीन विरासत, आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। सोमनाथ साक्षी है कि सृजन शक्ति हमेशा विनाशकारी शक्ति से प्रभावी होती है।
सोमनाथ की प्रत्येक ईंट, भक्ति का ताप और भारत के पुनरुत्थान का गौरव कहती है। इतिहास में कई बार मंदिर को क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रत्येक विध्वंस के बाद यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ।
सत्रह बार आक्रमण के बाद भी शाश्वत शिव यहीं विराजते हैं। मंदिर के इतिहास में वर्ष 2026 खास महत्व रखता है। एक हजार वर्ष पहले 1026 में पहली बार मंदिर पर आक्रमण हुआ था।
इसी वर्ष जनवरी में आक्रमण के ठीक एक हजार वर्ष बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोमनाथ में भव्य स्वाभिमान पर्व मनाया गया। बाबा सोमनाथ की दिव्यता और भव्यता आज भी अलौकिक और अद्वितीय है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विरासत से विकास की यात्रा जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रथम जत्थे को रवाना कर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह गौरवशाली यात्रा ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के अंतर्गत निकाली जा रही है।
मुख्यमंत्री को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप भेंट किया त्रिशूल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना किया और कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश की प्रमुख 21 नदियों के जल कलशों का भी पूजन-अर्चन भी किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर ढोल-धमाकों और डमरू की थाप पर उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर 21 नदियों का जल अर्पित करने के लिए यात्रियों को जल कलश तथा ध्वजा सौंपी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को यात्रियों ने शौर्य के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल भेंट किया। कार्यक्रम में विधायक रामेश्वर शर्मा के साथ रवींद्र यती, राहुल कोठारी, अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।
महाकाल महालोक से सुदृढ़ हो रही एकता की भावना
डॉ.यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के लिए हेलिकॉप्टर सेवा आरंभ की गई है। इंदौर से उज्जैन, ओंकारेश्वर और भोपाल से ओरछा-चंदेरी व जबलपुर से मैहर और कान्हा किसली तथा पेंच के लिए हेलिकाप्टर सेवा उपलब्ध है।
राज्य सरकार ने 13 धार्मिक लोक का निर्माण कराया है। महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक लोग उज्जैन में दर्शन के लिए आ रहे है।
इससे होटल, ऑटो, ठेले वाले आदि के व्यवसाय में वृद्धि हो रही है। महाकाल महालोक देश के विभिन्न भागों में रह रहे लोगों के मध्य आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर उपलब्ध करा रहा है।
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