फिर किस बात को लेकर चिंतित है दुनिया: क्या कोरोना से भी ज्यादा घातक है यह वायरस; राहत की बात हमारे यहां कोई पुष्ट मामला नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
दुनियाभर में एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। अफ्रीकी देशों खासकर कांगो और युगांडा में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
हालांकि अभी भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु और मंगलुरु में विशेष आइसोलेशन सेंटर तैयार किए गए हैं।
क्या कोरोना से ज्यादा घातक है इबोला?
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला वायरस कोरोना की तुलना में ज्यादा घातक माना जाता है। कोरोना वायरस तेजी से फैलता था, लेकिन इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले खून और तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैलता है।
इबोला में मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। कई मामलों में यह संक्रमण शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग तक पहुंच जाता है। समय पर इलाज और आइसोलेशन नहीं मिलने पर स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो इंसानों और कुछ जानवरों में फैलती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ, संक्रमित कपड़ों, बिस्तरों और इस्तेमाल की गई सिरिंज जैसी वस्तुओं से फैल सकता है। स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित व्यक्ति के करीबी लोगों को सबसे ज्यादा खतरा माना जाता है।
कैसे फैलता है इबोला?
संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से, संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से, संक्रमित कपड़े, बिस्तर या वस्तुएं छूने से और संक्रमित मरीज की देखभाल के दौरान सावधानी नहीं बरतने से।
इबोला के प्रमुख लक्षण
इबोला वायरस के संपर्क में आने के 2 से 21 दिनों के भीतर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं- तेज बुखार, लगातार कमजोरी और थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, उल्टी और दस्त, पेट दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते, आंखों का लाल होना, शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग और सांस लेने में तकलीफ।
कैसे करें बचाव?
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें, बार-बार साबुन से हाथ धोएं, मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल करें, संक्रमित वस्तुओं को छूने से बचें, बुखार या गंभीर लक्षण होने पर तुरंत जांच कराएं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर तेज बुखार, लगातार कमजोरी, उल्टी-दस्त, ब्लीडिंग या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। समय पर जांच, आइसोलेशन और सावधानी से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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