स्मार्ट सिटी कंपनी के टेंडरों में करोड़ों का खेल: रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे; हर स्तर पर अनियमितता उजागर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी मिशन के तहत संचालित इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर कैग की हालिया रिपोर्ट में अनियमितताओं का खुलासा किया है।
कैग की रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे
रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों, वित्तीय नियमों के उल्लंघन और फंड डायवर्जन जैसे मामलों पर चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
773 करोड़ खर्च, 68 करोड़ के काम नियमों के विरुद्ध
रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कुल 773 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसमें केंद्र सरकार से 485 करोड़, राज्य सरकार से 275 करोड़ तथा अतिरिक्त 13 करोड़ रुपए व्यय किए गए।
कैग ने पाया कि लगभग 68 करोड़ रुपए के कार्य स्मार्ट सिटी मिशन की गाइडलाइन के विरुद्ध किए गए। इनमें प्रमुख रूप से गांधी हॉल के नवीनीकरण पर 7.42 करोड़ रुपए।
16 स्थानों पर बस्ती सौंदर्यीकरण कार्य पर 10.58 करोड़ रुपए। जल संरचना पर 6.80 करोड़ रुपए। सड़क विज़ुअलाइजेशन कार्य पर 42.53 करोड़ रुपए।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तकनीकी व अधोसंरचनात्मक (इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित) परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जानी थी, जबकि उपरोक्त कार्य गाइडलाइन के अनुरूप नहीं पाए गए।
प्रशासनिक खर्च पर भी सवाल
इंदौर स्मार्ट सिटी कंपनी के प्रशासनिक कार्यों पर 47 करोड़ रुपए खर्च किए जाने को भी सीएजी ने अत्यधिक बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी राशि के नुकसान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
टेंडर प्रक्रिया में खेल
जल आपूर्ति और सीवरेज परियोजना के टेंडर में अनियमितता का विशेष उल्लेख किया गया है। 2017 में पहली बार एकल बोली आने पर टेंडर रद्द किया गया। जनवरी 2018 में दोबारा टेंडर हुआ, जिसमें मेसर्स तेजस कंस्ट्रक्शन ने 201 करोड़ की बोली लगाई।
दूसरी कंपनी विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया ने आपत्ति दर्ज कराई। बाद में टेंडर निरस्त कर तीसरी बार वही काम 237 करोड़ रुपए में पुंगलिया को दे दिया गया। इस प्रकार पूर्व प्रस्ताव से 36 करोड़ रुपए अधिक में ठेका दिया गया।
बिना टेंडर अतिरिक्त खरीदी
साल 2017 में आवश्यक उपकरणों की खरीदी के लिए हायवा इंडिया प्रा.लि. को ऑर्डर दिया गया। इसके बाद अतिरिक्त उपकरण की जरूरत बताकर उसी कंपनी से बिना नया टेंडर निकाले 8.59 करोड़ रुपए के उपकरण और खरीदे गए। सीएजी ने इसे वित्तीय अनियमितता माना है।
40 करोड़ का ट्रैफिक प्रोजेक्ट अधूरा
इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) के तहत 30 चौराहों पर सुधार के लिए 40 करोड़ रुपए का ठेका 2019 में दिया गया। ठेकेदार से 2 करोड़ की बैंक गारंटी ली गई। 23 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। जुलाई 2021 में काम अधूरा रहने पर ठेका निरस्त कर दिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि ठेका देते समय कंपनी के तीन साल के टर्नओवर और सात साल के अनुभव की शर्तों का सही परीक्षण नहीं किया गया। सरकार का तर्क है कि भुगतान हाईकोर्ट के आदेश के तहत हुआ, लेकिन अनुभवहीन ठेकेदार को काम देने के कारणों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
फंड डायवर्जन का मामला
कैग ने यह भी उल्लेख किया कि इंदौर नगर निगम ने अपने पुराने सड़क निर्माण कार्य का भुगतान स्मार्ट सिटी फंड से कराया। 2013 में 30 करोड़ का सड़क ठेका दिया गया था (स्मार्ट सिटी से पूर्व)।
15 करोड़ का भुगतान पहले ही किया जा चुका था। बाद में शेष भुगतान स्मार्ट सिटी कंपनी से कराया गया और पूर्व भुगतान की राशि भी समायोजित की गई। इसे फंड डायवर्जन की श्रेणी में माना गया है।
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