धीरे-धीरे... जोर के झटके: कहां रुकेगा पेट्रोल-डीजल की कीमत का मीटर
KHULASA FIRST
संवाददाता

10 दिन में पेट्रोल-डीजल के चौथी बार बढ़े दाम
मोदी सरकार ने पेट्रोल 2.61 डीजल 2.71 प्रति लीटर बढ़ाईं कीमतें
सरकार ने वसूली तेल पर महंगाई की चौथी किस्त, अभी और बढ़ेंगे दाम
इंदौर में एक लीटर पेट्रोल 114.56 रुपए का हुआ, डीजल ने भी छुआ 100 रुपए प्रति लीटर का भाव
महज 10 दिन में करीब 8 रुपए बढ़ गए पेट्रोल के दाम
तेल कंपनियों के घाटे को पूरा करने के लिए आम जनता का निकल रहा तेल
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जब तक 5 राज्यों के चुनाव चल रहे थे, मोदी सरकार तेल कंपनियों के घाटे को अपने खजाने से पूरा कर रही थी। सरकार ने तब यह ‘बड़प्पन’ यह कहते हुए दिखाया था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी परिस्थितियों का असर हम देशवासियों पर नहीं पड़ने देंगे।
अब चुनाव खत्म हो गए। सरकार को मनोनुकूल विजयश्री भी मिल गई, लेकिन जनता को पुरस्कार की जगह महंगाई के झटके पर झटके लगना शुरू हो गए। जोर के झटके सरकार रणनीतिक रूप से धीरे-धीरे दे जरूर रही है, लेकिन वह किस्त के रूप में आमजन को करंट देने से चूक नहीं रही।
अब सरकार तेल कंपनियों के घाटे को देशवासियों की जेब से पाट रही है। आम आदमी की जेब पर ये हमला कब रुकेगा, कोई नहीं कह सकता। पेट्रोल अब इंदौर में मात्र 10 दिन में 106 रुपए से 115 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
एक्सपर्ट 120 रुपए तक पेट्रोल के दाम बढ़ने तक के संकेत दे रहे हैं। देश का दुर्भाग्य- अब दूर-दूर तक कोई चुनाव भी नहीं।
सो मवार, सप्ताह की शुरुआत होते ही आमजन को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चौथी किस्त का करंट लगा। महज 10 दिन में सरकार ने चौथी बार तेल की कीमतों में इजाफा कर दिया। इस बार पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 2.61 रुपए की बढ़ोतरी की गई।
वहीं डीजल के दाम भी 2.71 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए। कीमतों में इजाफा होते ही तत्काल पेट्रोल पंप पर वसूली भी शुरू हो गई। आम जनता के पास इस बढ़ोतरी को सहन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर सिर्फ बयानबाजी तक सीमित है।
देश के अन्य शहरों का तो फिलहाल पता नहीं, लेकिन इंदौर में जो पेट्रोल 10 दिन पहले 106 रुपए प्रति लीटर मिल रहा था, अब वह 114 रुपए 56 पैसे, यानी करीब 115 रुपए का हो गया है। डीजल के दाम भी अब 99 रुपए 69 पैसे के हिसाब से 100 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं।
तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स की मानें तो अभी तेल की कीमतों में और इजाफा होगा। सरकार की तरफ से कम से कम दो और किस्तों में ये बढ़ोतरी होगी। इस लिहाज से पेट्रोल 120 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पेट्रोल के कम से कम उपयोग करने की अपील का असर आम जनता को किस्त के रूप में मिल रहा है।
सरकार ने पहली किस्त में महज दो रुपए का इजाफा कर जोर का झटका धीरे से दिया था, लेकिन लगातार चौथा झटका खाने के बाद अब ये साफ होता जा रहा है कि मोदी सरकार जोर के झटके धीरे-धीरे दे रही है।
अभी एक-दो और झटकों के लिए देश को तैयार रहना होगा, क्योंकि विश्व जगत में अभी हालात वो ही बने हुए हैं, जो तेल की कीमतों में इजाफा कर रहे हैं। अमेरिका व ईरान युद्ध के मैदान में अब भी डटे हैं।
सरकार ने दावा किया था कि ईरान-अमेरिका युद्ध व होर्मूज संकट का असर देश पर पड़ने नहीं देंगे, लेकिन ये वादा-भरोसा 5 राज्यों के चुनाव खत्म होते ही टूट गया। भरोसे की यह टूटन लगातार जारी है।
लिहाजा कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष ने प्रधानमंत्री को ‘महंगाईमैन’ नाम दिया है और लगातार तेल के दामों में हो रही बढ़ोतरी को आम आदमी पर महंगाईमैन का हंटर करार दे रहे हैं।
विपक्ष इस दाम वृद्धि में बजाय मैदानी विरोध दर्ज कराने के सिर्फ जुबानी जमा खर्च तक ही सीमित है। लिहाजा आम आदमी चुपचाप पेट्रोल पंप पर कीमतों में इजाफा झेलने को मजबूर है।
कच्चे तेल के बढ़ते भाव के आगे बेबस सरकार, निराश जनता...पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए का कमजोर होना है।
इसके अलावा होर्मूज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री मार्ग पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण भारत का तेल आयात खर्च बढ़ गया है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 86 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। वैश्विक बाजार या मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण क्रूड ऑयल के दाम बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा असर भारतीय पेट्रोल पंपों पर पड़ रहा है।
राज्य सरकार का टैक्स व कमजोर रुपया भी रुला रहा...
रुपए की कमजोरी भी एक सबसे बड़ा कारण है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की खरीद डॉलर में की जाती है। यदि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत को तेल आयात के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का वैट भी बढ़ती कीमतों का एक बड़ा कारण है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने के कारण तेल विपणन कंपनियों की लागत काफी बढ़ जाती है, जिसकी भरपाई के लिए उन्हें पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने पड़ते हैं।
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