सदमे में सर जी: बंगाल से हुआ पंजाब में ऑपरेशन लोटस; पंजाब चुनाव के ठीक पहले बिखरे ‘झाड़ू’ के तिनके
KHULASA FIRST
संवाददाता

‘खास’ हुए अब आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद
आम आदमी के सांसद अब राातोरात हो गए खास
एक झटके में खाली हाथ हुए केजरीवाल, 10 में से 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थामा
राघव चड्ढा ने दिया ‘आप’ को बड़ा झटका, दो तिहाई सांसद के साथ का दावा, भाजपा में विलय की घोषणा
उपनेता पद से हटाए राघव बोले- आप सिद्धांतों से भटक गई, देशहित नहीं, अब निजीहित हुए पार्टी में हावी
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुंह मीठा कर किया बागी सांसदों का स्वागत, आप लिखेगी सदस्यता रद्द करने की चिट्ठी
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सर...जी सदमे में हैं। बेहद गुस्से में भी और संताप में भी। सर…जी दावा करते थे कि उनके दल के नेताओं को ईडी-फिडी-सीडी डरा नहीं सकती। न हमारे नेता बिकते हैं, न झुकते। उनका सारा दंभ कल एकाएक चूर-चूर हो गया। पार्टी के कुल जमा 10 सांसदों में से एकमुश्त 7 ने सर...जी को ठेंगा दिखा दिया और उनकी सबसे बड़ी दुश्मन पार्टी भाजपा का दामन थाम लिया।
कमलदल के साथ होते ही आम आदमी पार्टी के सांसद रातोरात खास हो गए। कहां तो सर...जी का दल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव की मैराथन तैयारी कर रहे थे और कहां उनके विरोधी दल ने उनकी ही झाड़ू से उनका आंगन बुहार दिया। चुनाव के मुहाने पर ‘झाड़ू’ के तिनके बिखर गए।
बिखरे भी ऐसे कि अब समेटे न जा सकेंगे। बावजूद इसके सर...जी ने हिम्मत नहीं हारी। वे राज्यसभा के मुखिया से ‘पीठ में छुरा घोंपने’ वाले सांसदों की सदस्यता रद्द करने को लेकर चिट्ठी-पत्र लिखने बैठ गए हैं। लेकिन वे भूल गए कि ‘पढ़े-लिखों’ की पार्टी के सांसद राजनीति के नियम-कायदों को ठोंक-बजाकर ही पाला बदले हैं।
आ म आदमी पार्टी को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा। राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक सहित 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सांसदों के समूह ने भाजपा में विलय कर लिया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने राघव की अगुआई में हुई इस बगावत को हाथोहाथ लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीनों सांसदों के स्वागत-वंदन-अभिनंदन की पोस्ट की और बाद में इन नेताओं से प्रत्यक्ष मिलकर मुंह भी मीठा करवा दिया। भाजपा अध्यक्ष ने आप के अन्य सांसद हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता को पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
आप नेताओं ने भाजपा पर ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप लगाते हुए कहा कि यह पंजाब सरकार का कामकाज रोकने की साजिश है। इसके पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी सिद्धांतों से भटक गई। पार्टी अब देश के लिए नहीं, निजी हितों के लिए काम कर रही है।
कुछ वर्षों से महसूस हो रहा था कि में गलत पार्टी में सही व्यक्ति हूं। आज ‘आप’ से अलग होकर जनता के साथ काम करने की घोषणा करता हूं। चड्ढा ने कहा भाजपा में विलय के लिए सातों सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र व अन्य जरूरी दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंपे जा चुके हैं।
शेष 4 सांसद खुलकर सामने नहीं आए, लेकिन स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया पर आप छोड़ने की घोषणा की। केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को पंजाब के साथ धोखा करार दिया है। उन्हें बड़ा झटका अशोक मित्तल के भी पाला बदलने से लगा।
मित्तल लवली यूनिवर्सिटी के मालिक व चांसलर भी हैं और उन्हें राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में उपनेता पद का दायित्व बड़े भरोसे से दिया था। अभी हाल ही में मित्तल के कामकाजी ठिकानों पर ईडी के छापे पड़े थे। बताते हैं कि छापा पड़े 10 दिन ही बीते थे कि मित्तल भाजपाई हो गए।
‘मोटाभाई’ ने बंगाल में बैठकर पंजाब में कर दिया खेला
दिल्ली की हार से उबरने के लिए आप इन दिनों गुजरात में पांव जमाने व पंजाब में सत्ता बचाने के लिए जी-जान से लगी हुई थी। इसी बीच पार्टी में इतिहास की सबसे बड़ी टूट हो गई, जबकि पंजाब चुनाव में अब 10 माह भी नहीं बचे। पार्टी से अलग हुए 10 सांसदों में से 7 पंजाब व 3 दिल्ली से हैं। वहीं 7 में से 6 सांसद पंजाब के। ये इसलिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब आम आदमी पार्टी के खाते में संजय सिंह, एनडी गुप्ता व बलबीरसिंह सीचेवाल बचे हैं। इस पूरे खेल का आगाज उसी दिन हो गया था, जब राघव चड्ढा को केजरीवाल ने राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया था। ऑपरेशन लोटस के अगुआकार हर बार की तरह भाजपा के मोटाभाई, यानी गृहमंत्री अमित शाह रहे। हालांकि इन दिनों वे पश्चिम बंगाल के चुनावों में मसरूफ हैं, लेकिन वहीं से बैठकर उन्होंने पंजाब में बड़ा खेला कर दिया।
केजरीवाल को रत्तीभर भी इल्म नहीं होने दिया कि उनकी पार्टी के दो तिहाई सांसद साथ छोड़ जाएंगे। वे राघव चड्ढा से इतर देख नहीं पाए, जबकि शाह ने दो तिहाई सांसदों का आंकड़ा जुटाकर आप से अलग हुए सांसदों को दलबदल कानून से भी एक तरह बचा लिया। भाजपा में आप के 7 सांसदों के विलय से राज्यसभा में कमलदल की ताकत और बढ़ जाएगी।
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