लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे की कार्यप्रणाली को लेकर चौंकाने वाले खुलासे: जानिये कौन थे निशाने पर; क्रिप्टो के जरिए कहां तक पहुंचती थी रंगदारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे हैरी बाक्सर की कार्यप्रणाली को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि वह अपने ही शूटरों पर भरोसा नहीं करता था और उन पर नजर रखने के लिए अलग से बदमाश तैनात करता था।
क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आए राजपाल चंद्रावत ने बताया कि गैंग बेहद संगठित और ‘कॉरपोरेट स्टाइल’ में काम करता था। किसी भी वारदात से पहले रेकी करने वाले बदमाशों के पीछे भी अलग शूटर लगाए जाते थे, ताकि कोई चूक या धोखा न हो। इसी डर के चलते कई गुर्गों ने पुलिस के सामने सरेंडर तक कर दिया।
5 करोड़ की रंगदारी, क्रिप्टो से दुबई ट्रांसफर
जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग ने शहर के एक बड़े बिल्डर से करीब 5 करोड़ रुपए की रंगदारी वसूली। रकम सीधे लेने के बजाय क्रिप्टोकरेंसी के जरिए दुबई भेजी गई और वहां से हैरी बाक्सर तक पहुंचाई गई। खौफ के चलते पीड़ित बिल्डर अब तक पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचता रहा।
अगला टारगेट-बड़ा बिल्डर
राजपाल ने खुलासा किया कि जेल में रहते हुए उसने देवास के बदमाशों से बिल्डर की रेकी करवाई थी। गैंग का अगला निशाना रेसकोर्स रोड निवासी बिल्डर विवेक दम्मानी था। इसके लिए जीतनगर के सोनू उर्फ रितेश को जिम्मेदारी दी गई थी और इशारा मिलते ही फायरिंग की पूरी तैयारी थी।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स से चलता था नेटवर्क
गैंग के सदस्य आपसी संपर्क के लिए फेसटाइम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके और बातचीत ट्रैक न हो सके।
फायरिंग केस में भी कबूलनामा
राजपाल चंद्रावत ने बायो-कॉटन कारोबारी दिलीप सिंह राठौर के घर हुई फायरिंग में अपनी भूमिका भी स्वीकार की है। उसने बताया कि 50 लाख रुपए के लेनदेन विवाद की जानकारी उसने गैंग को दी थी, जिसके बाद राठौर को 10 करोड़ रुपए की फिरौती के लिए धमकी कॉल आई। इस मामले में पुलिस ने देवास से उसके करीबी सुमेर सिंह सोलंकी को भी हिरासत में लिया है।
एनआईए तक पहुंचा मामला
राजपाल और योगेश भाटी का नाम पहले भी कई बड़े मामलों में सामने आ चुका है, जिनमें पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस मुख्यालय पर रॉकेट लॉन्चर हमला भी शामिल है। इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दोनों से पूछताछ की थी।
ड्राइवर से गैंगस्टर बनने तक का सफर
रतलाम जिले के हथनारा गांव का रहने वाला राजपाल पहले एक स्थानीय नेता के यहां ड्राइवर था। बाद में उसने एक स्कूल भी संचालित किया, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते 2021 में स्कूल बंद करना पड़ा। इसके बाद वह अपराध की दुनिया में उतर गया और लॉरेंस गैंग से जुड़ गया।
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