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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा ध्वस्त: कंपनी की मनमानी से आक्रोश

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 मई 2026, 6:03 pm
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सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की सुरक्षा ध्वस्त

वेतन में कटौती और भ्रष्ट कर्मचारियों की बदसलूकी के खिलाफ सुरक्षाकर्मियों ने मुख्य गेट पर दिया धरना

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमवाय अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था अब खुद असुरक्षित हाथों में नजर आ रही है। सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली बीवीजी कंपनी के सुरक्षा गार्डों ने कंपनी प्रबंधन के शोषण और भ्रष्टाचार से तंग आकर अस्पताल के मुख्य गेट पर धरना दिया।

अपनी ड्यूटी छोड़ धरने पर बैठे इन गार्डों का सीधा आरोप है कि कंपनी न केवल उनके वेतन में कटौती कर रही है, बल्कि उसके भ्रष्ट कर्मचारी उनके साथ बेहद खराब व्यवहार कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शन कर रहे बाउंसर दीपक श्रीवास ने कंपनी की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए बताया उनका तय वेतन 12,600 रुपए है, लेकिन इस बार कंपनी ने बिना किसी ठोस कारण के उनके खाते में महज 10,500 रुपए ही डाले।

दर्जनों गार्डों का वेतन अधूरा दिया जा रहा है। ईमानदारी से शिफ्ट पूरी करने के बावजूद मेहनताना काटा जाना कंपनी की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हंगामे की एक बड़ी वजह कंपनी के सीएसओ रवींद्र मालवीय की तानाशाही और वसूली भी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को बीवीजी के भ्रष्ट कर्मचारियों ने उगाही का केंद्र बना दिया है।

ड्यूटी बदलने के नाम पर पैसों की मांग करना और महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ गाली-गलौज व अभद्र व्यवहार करना अब यहां आम बात हो गई है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सीएसओ के दुर्व्यवहार के वीडियो वायरल होने के बावजूद एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन चुप्पी साधे बैठा है।

नौकरी जाने के खौफ में खामोश रहे इन सुरक्षाकर्मियों का सब्र अब जवाब दे गया है। उनका कहना है कि एक तरफ आर्थिक शोषण और दूसरी तरफ बीवीजी के भ्रष्ट कर्मचारियों की प्रताड़ना के बीच काम करना अब मुमकिन नहीं।

अस्पताल के मुख्य द्वार पर जारी प्रदर्शन ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति का खुलासा कर दिया है। यदि समय रहते इन भ्रष्ट तत्वों और शोषण करने वाली कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में अस्पताल की सुरक्षा पूरी तरह ठप हो सकती है।

सुरक्षा गार्डों की मांग है कि काटा गया वेतन तुरंत वापस दिया जाए और बदसलूकी करने वाले सीएसओ को पद से हटाया जाए।

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