हनीट्रैप में मास्टर डेटा की तलाश
KHULASA FIRST
संवाददाता

एजेंसियों को शक...नेटवर्क फेस टू फेस ब्लैकमेल से ज्यादा डिजिटल कंट्रोल सिस्टम पर करता था काम, जांच पहुंची सिस्टम के भीतर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हनीट्रैप में जेल भेजी गई रेशू चौधरी, श्वेता जैन व अलका से पूछताछ में एसआईटी को सीधे बड़े राज पता न चले हों, लेकिन जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां एजेंसियों को शक है कि पूरा नेटवर्क फेस टू फेस ब्लैकमेल से ज्यादा डिजिटल कंट्रोल सिस्टम पर काम करता था।
क्राइम ब्रांच को आशंका है कि आरोपियों ने अपने पास मौजूद वीडियो, फोटो और चैट सिर्फ मोबाइल में नहीं रखे थे, बल्कि क्लाउड स्टोरेज, फर्जी ईमेल आईडी और डिजिटल लॉकर जैसे माध्यमों में भी सुरक्षित कर रखे हो सकते हैं। यही वजह है कि मोबाइल जब्त होने के बावजूद एजेंसियों को अब तक वह मास्टर डेटा हाथ नहीं लगा, जिसकी उन्हें तलाश है।
जांच में यह एंगल भी सामने आ रहा है कि पूरा नेटवर्क लोगों को फंसाने तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रोटेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम की तरह काम कर रहा था। यानी किससे कब संपर्क करना है, किस थाने में दबाव बनाना है, किस मामले को दबाना है व किसे वायरल की धमकी देकर सौदा करना है कि यह सब तय रणनीति के तहत चलता था।
इंश्योरेंस फाइल के नाम पर डील
सूत्र बताते हैं कि रेशू चौधरी कथित तौर पर वीडियो और फोटो को इंश्योरेंस फाइल की तरह इस्तेमाल करती थी। यदि कोई सौदा बिगड़ता था या संपर्क टूटता था तो संबंधित व्यक्ति पर दबाव बनाने के लिए फुटेज का इस्तेमाल किया जाता था।
यही कारण है कि करोड़ों की डील होने की बात सामने आ रही है। इधर, श्वेता जैन को लेकर जांच एजेंसियों के भीतर यह चर्चा तेज है कि उसने पुराने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों को लंबे समय में रखा। एसआईटी अब यह भी जांच रही है कि क्या कुछ प्रभावशाली लोगों ने जांच की दिशा प्रभावित करने या सबूत कमजोर करने की कोशिश की थी।
अलका और हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा अहम कड़ी
सबसे अहम कड़ी फिलहाल अलका और इंटेलीजेंस विंग के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा को माना जा रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि पुलिस सिस्टम के भीतर से ही नेटवर्क को इनपुट सपोर्ट मिलता था।
जैसे कौन सा अधिकारी ट्रांसफर हो रहा है, किस कारोबारी पर कौन सी जांच चल रही है, कौन व्यक्ति विवाद में है और किसे आसानी से टारगेट बनाया जा सकता है।
रिटायर्ड अधिकारी, बिचौलिए और कथित सेटलमेंट कराने वालों से हो सकती है पूछताछ
सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ रिटायर्ड अधिकारियों, बिचौलियों और कथित सेटलमेंट कराने वालों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
जांच एजेंसियों को शक है कि यह मामला केवल हनी ट्रैप नहीं, बल्कि सूचना, प्रभाव और ब्लैकमेल के समानांतर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो वर्षों से पर्दे के पीछे सक्रिय था।
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