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एसडीएम पर लगे फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आरोप: विधानसभा में उठा मामला

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 फ़रवरी 2026, 2:52 pm
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एसडीएम पर लगे फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आरोप

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला मध्यप्रदेश विधानसभा में उस समय उठा, जब मनावर से आदिवासी विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस संबंध में सवाल पूछे।

मांगी जानकारी
विधायक अलावा ने विधानसभा में पूछा कि एसडीएम घनश्याम धनगर ने इंदौर सहित अन्य जिलों में किस अवधि तक एसडीएम के रूप में कार्य किया और इस दौरान उन्होंने कितने जाति प्रमाणपत्र जारी किए।

इसके साथ ही उन्होंने अब तक जारी सभी जाति प्रमाणपत्रों की प्रतियां उपलब्ध कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या इन प्रमाणपत्रों को जारी करते समय 1950 के निर्धारित मापदंडों का पालन किया गया।

पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी: सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में विधायक को आश्वस्त किया कि मामले से जुड़ी सभी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं और तथ्यों के संकलन के बाद पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

ऐसे हुआ खुलासा
विधायक अलावा ने बताया कि उनके पास एसडीएम से जुड़े कई शिकायती आवेदन पहुंचे थे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि एक बालिका रिया कुमारी को आदिवासी (एसटी) जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया, जिसके आधार पर उसका नीट परीक्षा में चयन हुआ और इंदौर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला। बाद में जांच में वह प्रमाणपत्र गलत पाया गया।

अलावा ने यह भी कहा कि उसी छात्रा के नाम से अन्य राज्य में ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र भी बना हुआ था, जिससे प्रमाणपत्रों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

एसडीएम का जवाब
इस पूरे मामले पर एसडीएम घनश्याम धनगर का कहना है कि यदि किसी भी संदिग्ध प्रमाणपत्र की प्रति सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमबद्ध होती है, जिसमें तहसीलदार की रिपोर्ट, दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं शामिल रहती हैं।

निचले स्तर पर फर्जीवाड़े की आशंका
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ स्थानों पर निचले स्तर पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह सक्रिय हुए हैं। कई बार पासवर्ड रखने वाले कर्मचारी एसडीएम की जानकारी के बिना ही प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं। कुछ समय पहले इंदौर के मल्हारगंज क्षेत्र में ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा भी हुआ था।

बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संदिग्ध जाति प्रमाणपत्रों में एसडीएम की सीधी भूमिका है या नहीं। यदि प्रत्यक्ष संलिप्तता पाई जाती है, तो मामला कार्रवाई तक पहुंच सकता है। फिलहाल पूरे प्रकरण पर सरकार की जांच और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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