भूमाफिया रमेश जाट-सुरेश दुधाले के जरिये सरस्वती गावड़े ने कर दी रजिस्ट्री: अब किसी और को बेचने की साजिश; सर्वसंपन्न नगर के बगीचे के तीन प्लॉट बेच खाने का मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कुख्यात भूमाफिया और भ्रष्ट बिल्डर रमेश जाट व सुरेश दुधाले ने मिलकर सर्वसंपन्न नगर के बगीचे के जिन तीन प्लॉटों को बेच खाया, उनकी रजिस्ट्री कॉलोनाइजर स्व. संतोष गावड़े की पत्नी सरस्वती गावड़े ने इन दोनों के माध्यम से की है। यानी इन दोनों बेईमान और भ्रष्ट बिल्डरों ने बगीचे की जमीन पर कब्जा कर प्लॉट काटने और बिकवाने में अहम भूमिका निभाई।
नियमानुसार संतोष गावड़े की मृत्यु के बाद प्लॉट आदि का विक्रय पूरे परिवार की सहमति से ही किया जा सकता है। अब जाट और उसके साथी मिलकर बगीचे के बेचे गए प्लॉटों को फिर किसी को बेचने की फिराक में घूम रहे हैं। यानी किसी को अपने जाल में फंसाकर उसे ये प्लॉट बेचकर उसकी गाढ़ी कमाई डुबोने की तैयारी है।
उल्लेखनीय है कनाड़िया रोड के कुख्यात बिल्डर और खुद को एक जनप्रतिनिधि का करीबी बताकर लोगों पर रौब गांठने वाले कुख्यात भूमाफिया रमेश जाट और उसके साथी भ्रष्ट बिल्डर सुरेश दुधाले ने मानवता नगर से लगे सर्वसंपन्न नगर के बगीचे पर तीन प्लॉट काटकर बेच खाए थे।
इनमें से दो प्लॉट अमित संघवी और एक किसी अन्य को बेचे गए थे। संघवी भी इनका ही साथी बताया जा रहा है। उसके नाम रजिस्ट्री करा दी गई, जिसमें बड़ा खेल हुआ है। रजिस्ट्री कॉलोनाइजर संतोष की पत्नी सरस्वती ने इन दोनों भ्रष्ट बिल्डरों सुरेश और रमेश के माध्यम से की, जबकि संतोष की मृत्यु के बाद पॉवर खत्म हो गया था और कोई भी विक्रय बिना पूरे परिवार की सहमति के नहीं किया जा सकता।
लेकिन दोनों भ्रष्ट बिल्डरों ने अपनी तिजोरी भरने के लिए इन प्लॉटों की रजिस्ट्री सरस्वती गावड़े से करवा दी, जबकि वह इसकी पात्र नहीं हैं। अब जाट-दुधाले का ही खरीददार गुर्गा संघवी इन प्लॉटों के बेचने की फिराक में है।
वह लोगों से कह रहा है कि यहां कोई बगीचा नहीं था और इन प्लॉटों की रजिस्ट्री उसके पास है। ये रजिस्ट्री दिखाकर इन प्लॉटों को बेचने की कोशिश कर रहा है। जो भी व्यक्ति इन प्लॉटों को खरीदेगा वो फंस जाएगा, क्योंकि ये बगीचे की जमीन है और देर-सवेर रिमूवल कार्रवाई होना तय है।
जाट का खुद का घर ही अवैध
सूत्रों ने बताया रमेश जाट ने मानवता नगर में जो खुद का मकान बनाया, वह भी अवैध है, क्योंकि इसकी न तो टीएनसी करवाई गई और न निगम से नक्शा पास है। जिस जगह पर मकान बना, वह मानवता नगर का हिस्सा भी नहीं है। ये भी पता चला है कि जाट ने अपने घर के सामने ही दो और मकान अवैध रूप से बना रखे हैं और उनकी भी कोई टीएनसी या निगम से अनुमति नहीं है।
खुद को एक नेता का खास बताकर रौब गांठता है जाट: भूमाफिया जाट खुद को एक नेता का खास बताकर लोगों पर रौब गांठता है। वह क्षेत्र में अवैध कार्यों को भी संरक्षण देता है और फिर नेता का नाम लेकर अधिकारियों को धमकाता है।
उसने अपने द्वारा बनाए गए अवैध मकानों और बगीचे की जमीन पर कब्जा कर काटे गए प्लॉट को भी नेता के संरक्षण में बचाने की कोशिश की। अब नेता के माध्यम से ही इन प्लॉटों को दोबारा बिकवाने के साथ बिना टीएनसी की अनुमति व निगम से नक्शा पास कराए लोगों को बेचने की फिराक में है।
दुधाले के दो अवैध बंगलों को मिला निगम का नोटिस, जल्द रिमूवल
कनाड़िया रोड के कुख्यात बिल्डर सुरेश दुधाले द्वारा बनाए गए दो अवैध बंगलों को नगर निगम ने नोटिस दिया है। जोन 19 के भवन अधिकारी राजेंद्र उपाध्याय द्वारा दिए गए नोटिस में रिमूवल की बात कही गई है। यदि दुधाले उचित दस्तावेज पेश नहीं कर पाया तो ये बंगले तोड़ दिए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में खुलासा फर्स्ट ने खुलासा किया था। कनाड़िया रोड क्षेत्र के कुख्यात और भ्रष्ट बिल्डर सुरेश दुधाले ने मानवता नगर में दो बंगले बिना टीएनसी की मंजूरी और निगम से नक्शा बनवाए ही तान रखे हैं।
वो अब इन्हें बेचने की फिराक में है और करोड़ों रुपए में बेचकर भाग जाएगा। जो खरीदेंगे वो अपने जीवनभर की जमापूंजी लुटा बैठेंगे।
मामले में निगम जोन 19 के भवन अधिकारी राजेंद्र उपाध्याय ने दुधाले को नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि वे इन बंगलों से संबंधित दस्तावेज पेश करें अन्यथा इन्हें रिमूवल कर दिया जाएगा।
ये बंगले कालोनी के बोर्ड से अंदर घुसते ही बने हैं। दोनों बंगले 750-750 स्क्वेयर फीट में बने हैं और दुधाले ने इनके लिए न तो टीएनसी करवाई है और नगर निगम से विधिवत नक्शा पास करवाया है।
जी+1 के इन दोनों बंगलों को वे 1.15 करोड़ प्रति बंगले के हिसाब से बेचकर गायब होने की फिराक में है। उसका गणित ये है कि वो बंगले बेचकर चला जाए और बाद में जब रिमूवल की कार्रवाई हो तो उसका नुकसान खरीदार को ही उठाना पड़े।
इस तरह वो खरीदारों को फांसने की कोशिश कर रहा है। यहां रिमूवल की पूरी संभावना है। अभी रहवासियों को स्टे मिला हुआ है, लेकिन स्टे अवधि खत्म होने के बाद कार्रवाई तय है और दुधाले जैसे बिल्डर लोगों को फांसकर अपनी तिजोरी भर लेते हैं। एक ओर प्रशासन भ्रष्ट बिल्डरों की नकेल कस रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे भूमाफिया अब भी जनता को लूटने में पीछे नहीं हट रहे हैं।
बिल्डर सुरेश दुधाले ने इसके अलावा गोकुल नगर, आलोक नगर में भी प्लॉटों की हेराफेरी कर रखी है। यहां भी उसने प्लॉटों पर कब्जा और उस पर निर्माण कर बेचने का काम किया और अपनी जेब भारी कर रखी है।
अब स्थिति ये है कि जिन लोगों ने ये प्लॉट या मकान खरीद लिए हैं, उनकी जान सांसत में है, क्योंकि एक तो ये कालोनियां अवैध घोषित हो गई हैं और दूसरा ये कि किसी भी वक्त निगम की टीम यहां रिमूवल कर सकती है, क्योंकि अवैध कालोनियों में भी निर्माण तो नहीं किया जा सकता। जाहिर है कि न तो दुधाले ने इनकी टीएनसी कराई है और न निगम से नक्शा पास हुआ है।
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