सुपर कलेक्टर हैं रिंकेश वैश्य: एक बेचारा ‘ए’ डीएम काम का मारा; एक अफसर 14 जिले और अनगिनत विभागों का बोझ
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिला प्रशासन में एडीएम की नियुक्ति को लेकर पिछले एक साल से बार-बार यही जिज्ञासा व्यक्त की जाती है कि भारी- भरकम कद्दावर रिंकेश वैश्य क्षेत्रीय प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम के साथ अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) इंदौर के दोहरे प्रभार पर कैसे आसीन हैं। अतिरिक्त प्रभार के लिए सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश कहां है?
वैश्य को तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के समय संभागायुक्त दीपक सिंह ने एडीएम का अतिरिक्त चार्ज दिया। दीपक सिंह और आशीष सिंह अनुभवी, कुशल, न्यायपूर्ण कार्यशैली और जनहित के प्रति संवेदनशील हैं इसलिए उन्होंने कुछ सोच कर ही वैश्य को इतने दायित्व दिए होंगे, जिन्हें वैश्य संभाले संभाल नहीं पा रहे है। बड़े अधिकारी जानते हैं इंदौर में कॉलोनी सेल का क्या महत्व है।
यह बहुत जादूगरी और रहस्य से भरा विभाग है यहां हुई गड़बड़ सरकार के लिए मुसीबत बन जाती है साथ में टारगेट भी गड़बड़ा जाता है। राजनीति और जमीन माफिया का गठजोड़ भ्रष्ट अफसरशाही के कारण दैत्याकार रूप ले लेता है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ठहरे भोले भंडारी इसलिए ऐसे महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे चौकीदार को रहने दिया, जो इंदौर उज्जैन दोनों जगह एडजस्ट हो सके। यह अलग बात है इंदौर में एडजस्ट हो या ना हो सके उज्जैन में किसी भी तरह से फुलप्रूफ एडजस्टमेंट जरूरी है। इसके साथ काबिलियत होना भी जरूरी है।
वैश्य की अपनी मजबूरी हो सकती है लेकिन किससे कहें? उनके कलेक्टर कार्यालय में एडीएम बनने के बाद एडीएम रहे कई अधिकारी तबादला पा गए। ज्योति शर्मा का स्थानांतरण हुआ। उसके बाद गौरव बेनल का तबादला हुआ। लेकिन एक भी नए एडीएम नहीं आए। रोशन राय, नवजीवन पवार व निशा डामोर एडीएम है।
वैश्य सहित चार एडीएम हैं। उनको छोड़कर तीन फुर्सत में है। शासन-प्रशासन उनकी क्षमताओं का दोहन नहीं कर पा रहा है क्योंकि कोई महत्वपूर्ण दायित्व इनके पास नहीं है। यह लोग भी उतनी ही तनख्वाह पा रहे हैं जितनी वैश्य लेकिन कामकाज वैसा नहीं है जैसा वैश्य के साथ है।
समझने की बात है कि हर कोई वैश्य हो भी नहीं सकता, क्योंकि उसके लिए अलग ही क्राइटेरिया या एलिजिबिलिटी चाहिए। इस समय इस तरह की पात्रता रखना चुनौती का काम है। हर कोई गुरुमंत्र पाने की चाह में उज्जैन से भोपाल, दिल्ली-गुजरात तक दौड़ लगा रहा है। गॉडफादर ढूंढ रहा है ताकि गंडा या ताबीज बंधवा कर 14 नहीं तो एक ही, वह भी इंदौर जैसे जिले में बढ़िया कामकाज मिल जाए लेकिन फिर भी ‘आशीष’ नहीं मिल पा रहा। ‘रिंकेश’ हो जाना आसान नहीं है।
अप्रैल में नए सिरे से मिला दायित्व... कलेक्टर ने अप्रैल 2026 में एडीएम (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट) के बीच कार्य-विभाजन आदेश जारी किया था। इसमें रिंकेश वैश्य को स्थापना शाखा, कर्मचारी ट्रांसफर, आदेश, विकास कार्यों की मॉनिटरिंग, नगरीय प्रशासन/ परियोजनाएं, जनसुनवाई और शिकायत निवारण, प्रशासनिक फाइलिंग और ऑफिस मैनेजमेंट का मुख्य प्रभार सौंपा गया।
कलेक्टर कार्यालय के गलियारों में कहा जाता है कॉलोनी सेल, माइनिंग, नगरीय प्रशासन आदि के कार्य लंबे समय से लंबित हैं, क्योंकि एडीएम साहब को समय नहीं मिल पा रहा। दूसरी ओर ये एडीएम साहब 14 जिलों के नागरिक आपूर्ति निगम के सर्वसर्वा हैं। इंदौर-उज्जैन संभाग की गेहूं उपार्जन की उठा-पटक भी इन्हीं के सुपुर्द है।
किसानों की शिकायत है कि हमें भी नहीं मिलते। साहब की मजबूरी है… जाएं तो जाए कहां? वैश्य जरूर काबिल, ईमानदार और सुपर कंप्यूटर की तरह मेधावी हैं तभी उन्हें इतने सारे जिलों का प्रभार , हेवीवेट और धनबल वाले विभाग, इंदौर एडीएम पद के अतिरिक्त दिए गए हैं।
कलेक्टर तो मात्र एक जिले का प्रभारी होता है। वैश्य के पास 14 जिले हैं तो उन्हें सुपर कलेक्टर कहा जाता है। इतने सारे महत्वपूर्ण और सुदूर भौगोलिक क्षेत्र के कार्यभार आप बखूबी कैसे संभाल रहे हैं कहा नहीं जा सकता। लगता है वही काम कर रहे हैं, जो करना हैं इसलिए तनावमुक्त हैं।
सरकार तनाव में चाहे न हो, किसान भयावह तनाव में हैं। स्लॉट बुकिंग हो नहीं रही, उपार्जन केंद्र लावारिस जैसी हालत में हैं। गेहूं उपार्जन केंद्र कब खुलते हैं कब बंद होते हैं कितनी देर के लिए खुलते हैं पता नहीं यह अलग बात है। नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़े ऐसे कई गंभीर मसले हैं जिससे सरकार परेशानी में है। लगता है एडीएम साहब कॉलोनी सेल, नगरीय प्रशासन व माइनिंग वगैरह की तरह गेहूं भंडारण, बारदाना व सार्वजनिक वितरण प्रणाली को भी ले रहे हैं।
संबंधित समाचार

गैस से भरा टैंकर पेड़ से टकराया:नशे में धुत चालक हिरासत में; गलत साइड में चला रहा था वाहन

एक्सप्रेस वे पर कार रेलिंग से टकराई कार:24 साल की युवती की मौत; पिता-भाई गंभीर घायल

बाढ़ में बहा बैंक का लॉकर:टूटते ही गायब हुए ₹57 लाख; 29 आरोपी हिरासत में; शव से बालियां चुराने वाले 2 भी गिरफ्तार

प्रमुख रास्ते होंगे अतिक्रमण मुक्त:इंटरसिटी बसें शहर से बाहर; 25 से ज्यादा फ्लाईओवर और 1500 सिटी बसों का लक्ष्य

जमीन घोटाले में फरार पूर्व सीएसपी समेत तीन पर इनाम घोेषित:अग्रिम जमानत खारिज; पुलिस और एसआईटी ने तेज की तलाश

नेपाल में प्रलय से मप्र में मची अपनों की तलाश:एक ही परिवार के 29 सदस्य शामिल; कई जिलों के लोगों से भी संपर्क टूटा

बोरी में छुरियां, कमर में रिवॉल्वर:क्राइम ब्रांच ने दो हथियारबाजों को दबोचा; जिंदा कारतूस भी बरामद

केंद्रीय मंत्री शाह से मिले मुख्यमंत्री:प्रदेश के विकास का रखा पूरा ब्योरा; जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर की चर्चा

रात ढाई बजे चोरों का धावा:एक साथ आठ दुकानों के ताले तोड़े; सीसीटीवी में संदिग्ध कैद

मर्डर स्पॉट पर पुलिस का इंसाफ:सीन रीक्रिएशन के दौरान आरोपियों पर बरसाए पाइप; रास्तेभर दर्द से चिल्लाते रहे

कार रोकी तो मिला नोटों का बोरा:गिनती के लिए थाने में बुलाना पड़ी मशीन; पुलिस जांच में जुटी

पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल:अंशुमन यादव बने एडीजी इंटेलिजेंस; चंचल शेखर को खेल विभाग की कमान

वीडियो देखिए, बीमारी से बेहाल परिवारों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री:मदद का ऐलान; स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने का दिया भरोसा

जनशिकायतों पर ढिलाई पड़ी भारी:महापौर ने अफसरों को फटकारा; कहा- हर शिकायत को गंभीरता से सुनें और समय पर करें समाधान

मंदिर परिसर में मचा हड़कंप:बंद कमरे को लेकर लोगों ने बुलाई पुलिस; पुजारी और युवक हिरासत में

घेराबंदी कर पकड़ा चोरी का वाहन:हजारों के खिलौने-कपड़े बरामद; आरोपी गिरफ्तार

आमने-सामने टकराए ट्रक-पिकअप:चंद मिनट में धधके दोनों वाहन; जिंदा जल गया ड्राइवर

पुरानी रंजिश में फायरिंग:आरोपी गिरफ्तार; पिस्टल, खाली कारतूस और मोटरसाइकिल जब्त

युवाओं पर कांग्रेस का फोकस:‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी हो सकते हैं शामिल

पहले दोस्ती, फिर युद्ध की कहानी:विदेशी डॉक्टर ने रिटायर्ड प्रिंसिपल से ऐंठे लाखों; पुुलिस जांच में जुटी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!