लौटकर ‘बाबा’ घर को आए: विधायक के बिगड़े बोल से हो गई जग हंसाई; अब की मेयर की तारीफ
KHULASA FIRST
संवाददाता

दीनदयाल भवन के हस्तक्षेप के बाद बदल गए महेंद्र हार्डिया के सुर व स्वर, मेयर हाउस पहुंचे
बंद कमरे में बात कर पार्टी अध्यक्ष मिश्रा ने मेयर के प्रति विधायक के मन में उपजी ‘गलतफहमी’ दूर की
नगर अध्यक्ष अपनी गाड़ी में बैठाकर विधायक को ले गए महापौर निवास, गुस्सा हुआ दूर, संग चाय पी
विधायक बोले- अच्छा काम कर रहे हैं युवा महापौर, शहर की जल वितरण व्यवस्था भी बेहतरीन
महापौर बोले- विधायक हार्डिया हमारे सीनियर, कहीं कोई कमी है तो मार्गदर्शन करें
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आखिरकार भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया यानी महेन बाबा लौटकर घर आ गए। ठीक उसी कहावत की तर्ज पर, जो जगत में मशहूर है कि लौटकर ‘समझदार’ घर को आए। आते ही हार्डिया उन महापौर की तारीफ करने लगे, जिन पर उन्होंने भरी सभा में नाराजगी दिखाई थी।
सुबह का भूला शाम को घर आया की तर्ज पर विधायक न सिर्फ महापौर पुष्यमित्र भार्गव की प्रशंसा पर रुके, बल्कि नगर निगम की उस जल वितरण व्यवस्था की भी तारीफ कर दी, जिस पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से पक्षपात करने के आरोप लगाए थे। महज 36 घंटे में विधायक महोदय का ये ‘रूपांतरण’ देख सब आश्चर्य से भर गए।
कहां तो विधायक जल वितरण में भेदभाव के आरोप पर गुस्से से भरे महापौर के घर जाकर बैठ जाने की धमकी दे रहे थे और कहां आज महापौर निवास पर बैठकर चाय पी रहे, ठहाके लगा रहे, मेयर को गले लगा रहे। है न हैरत की बात?
ये हैरत भरा घटनाक्रम बुधवार सुबह हुआ, उसी इंदौर में जहां के एक भाजपा विधायक ने दो दिन पहले अपनी ही सरकार व अपनी ही नगर निगम परिषद को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
मसला विधायक के इलाके में पीने के पानी की कमी का था। इस मुद्दे पर विधायक सार्वजनिक रूप से बिफर गए। एक भूमिपूजन समारोह को ये कहकर छोड़कर चले गए कि नहीं करना पूजन-वूजन।
समारोह में महापौर भी मंचासीन थे और क्षेत्र की जनता दर्शक थी। अपने ही दल की जग हंसाई कर विधायक तो मौके से चले गए, लेकिन मेयर सहित पूरी भाजपा नीत निगम परिषद की स्थिति हास्यास्पद कर गए।
विधायक भी कोई नए-नवेले नहीं थे। घुटेघुटाए नेता और तपेतपाए विधायक कहलाते हैं। 20 बरस से विधायक हैं और ‘बाबा’ कहलाते हैं। ‘बाबा’ यानी निःस्पृह व्यक्तित्व, लेकिन ये ही व्यक्तित्व भरे बाजार अपने ही दल की परिषद व प्रदेश की सरकार की भरे बाजार ‘जांघ उघाड़’ गए।
मुद्दे की तलाश में दर-दर भटक रही कांग्रेस ने विधायक को ‘घर का भेदी’ मानते हुए उनकी इस नाराजगी को झट से भुना लिया और प्रदेश की मोहन सरकार को निशाने पर ले लिया।
‘बाबा’ तो ‘बाबा’ ठहरे। गुस्सा उतरा तो अहसास हुआ कि बड़ी गलती कर बैठे हैं। जब तक बात इंदौर से निकलकर राजधानी भोपाल तक जा पहुंची। संगठन की भृकुटी भी तनी कि इतने सीनियर विधायक से ये उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ राजी-नाराजगी थी भी तो पार्टी फोरम पर रखनी थी।
इंदौर में दीनदयाल उपाध्याय भवन किसलिए हैं? बस इसके बाद ही दीनदयाल भवन रविवार को घटे घटनाक्रम के बाद मंगलवार को सक्रिय हुआ। नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा विधायक से मिलने उनके घर पहुंचे। संगठन के तेवर से विधायक महोदय को अवगत कराया और जानना चाहा कि आखिर बात ऐसी क्या हुई जो जग हंसाई हो गई।
बताते हैं कि विधायक ने संगठन के स्थानीय मुखिया से भी पानी वितरण में पक्षपात करने व बगल की विधानसभा 2 को ज्यादा तव्वजो देने की बात कही। इलाके में बन रही नर्मदा जल वितरण की टंकियां भी नाराजगी का कारण बताई गईं। साथ ही ये सफाई भी दी कि अपने ही दल के नेता से बात नहीं कहूंगा तो किससे कहने जाऊंगा?
अगर निगम कमिश्नर के खिलाफ कुछ कहता तो सरकार के खिलाफ बात होती। क्या अपने ही दल के मेयर से मन की बात करना गलत है? अध्यक्ष मिश्रा ने भोपाल की ही बात दोहराई की ये बात दीनदयाल भवन में होना थी।
खैर, जो हो गया सो गया... की तर्ज पर मिश्रा ने विधायक को समझाया कि आप सीनियर हैं, आप ही इस पूरे मामले का पटाक्षेप करें। उसके बाद मौके से ही विधायक व मेयर की फोन पर बात हुई। मेयर ने भी विधायक को चाय पर घर आमंत्रित कर लिया।
बुधवार सुबह नगर अध्यक्ष खुद विधायक के घर पहुंचे। अपनी गाड़ी में विधायक को बैठाकर खुद गाड़ी चलाकर मिश्रा विधायक को मेयर निवास लेकर पहुंचे। मेयर-विधायक की चाय के प्याले की इस मुलाकात ने जलसंकट को लेकर ‘प्याले में उठे तूफान’ की तर्ज पर मामले को खत्म कर दिया।
विधायक ने महापौर को गले लगाकर जल वितरण व्यवस्था की तारीफ कर दी। विधायक हार्डिया ने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर निगम की टीम दिन-रात मेहनत कर रही है, जिसके कारण शहर में पानी का वितरण सुचारू रूप से हो रहा है।
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी राहत की सांस ली, क्योंकि मध्यप्रदेश में इंदौर ऐसा पहला शहर हो गया था जहां सत्तारूढ़ दल के विधायक ने जलसंकट पर सार्वजनिक नाराजगी जाहिर की थी।
विधायक स्वयं देख सकते थे कि पक्षपात हो रहा या नहीं?
पांच बार विधायक, दो बार मंत्री, संगठन में लंबा अनुभव और प्रशासन में अच्छी पकड़ इतना लंबा राजनीतिक सफर किसी भी नेता के लिए बड़ी बात है न? विधायक हार्डिया के क्षेत्र में बड़ी संख्या में उनकी नाक के नीचे होस्टल, होटल और अन्य व्यावसायिक भवन बनते रहे।
इन जगहों पर पानी का इस्तेमाल भी बहुत ज्यादा होता है। सवाल यह है कि जब यह सब हो रहा था तब क्या कभी प्रशासन से इस बारे में गंभीर चर्चा की गई?, क्या भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस योजना बनाई गई?
सबसे खास बात यह है कि जल नियंत्रण सेंटर से साफ देखा जा सकता है कि किस टंकी में कितना पानी जा रहा है, कौन-सी टंकी कब भर रही है और किन इलाकों में पानी पहुंचाया जा रहा है। यानी पूरी व्यवस्था पारदर्शी है।
ऐसे में जिज्ञासा ये है कि जब आप इतने वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं तो स्थायी समाधान पहले क्यों नहीं किया गया? और यदि समस्या आज भी बनी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय दूसरों पर आरोप लगाना कितना उचित है?
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