सूर्या का सम्मान और संजू सैमसन का ईश्वरीय नमन: जब ईडन गार्डन्स में नायाब पारी ने रचा नया इतिहास
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, हेमंत उपाध्याय।
क्या अनिर्वचनीय, अद्भुत और भावुक करने वाला पल था वह। दरअसल शब्द तो थे ही नहीं, वहां थीं केवल महासागर की लहरों की तरह उमड़ रही भावनाएं। टी-20 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारतीय टीम को 5 विकेट से जीत दिलाने के बाद संजू सैमसन मैदान में घुटनों के बल बैठ गए और आसमान की ओर देखकर अपने हाथ जोड़े। गेंद को सीमा रेखा का रास्ता दिखाकर विजयी शॉट लगाने के बाद संजू सैमसन अपना हेलमेट फेंककर घुटनों पर बैठ गए और आसमान की तरफ देखकर ईश्वर को धन्यवाद दिया। यह एक योद्धा की अपनी मंजिल तक पहुंचने की खुशी थी। यह बात और है कि हेलमेट को इस तरह फेंकने पर क्रिकेट की शीर्ष संस्था आईसीसी उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में ले सकती है।
अटूट आस्था और बरसों के धैर्य का प्रमाण
कोलकाता के ईडन गार्डन्स की मिट्टी पर घुटनों के बल बैठकर हाथ जोड़े और नम आंखों की संजू की यह तस्वीर, ईश्वर के प्रति उनकी अटूट आस्था और बरसों के धैर्य का प्रमाण थी। उन्होंने शुक्रिया अदा किया उस परमपिता परमेश्वर का जिसने अवसाद और निराशा के क्षणों में भी उनका मनोबल न डिगने दिया, हौसले बुलंद रखे। इस खिलाड़ी ने निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम से बाहर करने की अटकलों को दरकिनार और खारिज करते हुए अपनी लगन, मेहनत और प्रदर्शन के दम पर ऐसा करिश्मा कर दिखाया जिस पर रविवार की रात हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी वाह-वाह कर उठा।
हमेशा क्रिकेट की किताबों के पन्ने पलटे जाते रहेंगे
क्वार्टर फाइनल बन गए सुपर-8 मुकाबले में वेस्टइंडीज टीम के 195 रनों के विशाल लक्ष्य के जवाब में भारतीय टीम ने 19.2 ओवर में जीत हासिल कर ली और इसमें संजू सैमसन का योगदान ऐसा था जिसे हमेशा क्रिकेट की किताबों के पन्ने पलटकर देखा जाता रहेगा। जीत के नायक संजू सैमसन ने केवल 50 गेंदों पर 12 चौकों और 4 छक्के की सहायता से नाबाद 97 रन की पारी खेलकर उन विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ दिया जो भारतीय क्रिकेट के नायकों में शुमार किए जाते हैं।
लक्ष्य का पीछा करते हुए संजू सैमसन भारत की ओर से सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज भी बन गए। तकरीबन कल विभिन्न माध्यमों पर कमेंट्री करते समीक्षकों की राय थी कि संजू की यादगार पारी में इस बार कोई हड़बड़ाहट नहीं थी, बल्कि एक ठहरे हुए सागर जैसी गहराई थी, जिसने भारतीय टीम की नैया पार लगा दी। और हां - टी-20 विश्व कप के इतिहास में यह भारतीय टीम का सबसे बड़ा और सफल रन चेज भी बन गया।
कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की खुशी देखते ही बनती थी
मैच जीतकर जब संजू सैमसन मैदान से लौट रहे थे तो टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की खुशी देखते ही बनती थी। सूर्यकुमार यादव ने अपनी चिरपरिचित मुस्कराहट के साथ संजू के सम्मान में अपनी वह कैप उतार कर आदर और आभार का भाव जताया जो राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। गौतम गंभीर भी कहां पीछे रहने वाले थे।
उन्होंने भी संजू को गले लगाकर उनकी पीठ थपथपाई। यह सम्मान, आत्मीयता और आभार उस खिलाड़ी के प्रति था जो पारी की शुरुआत करने के बाद दूसरे छोर से गिरते विकेटों के बीच अपने आत्मविश्वास को ऊंचा रखकर विकेट पर टिका रहा और परिस्थिति को भांपते हुए ऐसी बल्लेबाजी की जिसे वेस्टइंडीज टीम भूल जाना ही पसंद करेगी। वेस्टइंडीज के धाकड़ खिलाड़ी शिमरन हेटमायर ने तो संजू को बाहों में भरकर गर्मजोशी से बधाई दी।
वर्षों की मेहनत और धैर्य की विजय
यह केवल एक मैच में जीत ही नहीं थी, वरन एक खिलाड़ी के वर्षों की मेहनत और धैर्य की विजय भी थी। आप यह भी मानिये कि सूर्या का उन्हें इस तरह सम्मान देना इस खेल के अनगिनत प्रशंसकों की आंखें भी गीली कर गया। ईडन गार्डन्स में गूंजती गगनभेदी तालियों की गूंज भी इस बात की गवाह थी।
सोची-समझी रणनीति के कारण दिया ब्रेक
अब संजू सैमसन के बारे में इतनी बातें हो रही हैं, उदाहरण दिए जा रहे हैं, प्रतिक्रियाएं आ रही हैं कि पूछो मत, लेकिन टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की यह बात गौर करने लायक है- "कठिन दौर और कुछ खराब मैचों के बाद संजू को ब्रेक देना एक सोची-समझी रणनीति थी। संजू एक विश्व स्तरीय प्रतिभा हैं। उन्हें दबाव से बाहर निकालकर तरोताजा करना जरूरी था ताकि वे सही समय पर प्रहार कर सकें। गंभीर ने कहा कि संजू ने एक मुश्किल दौर के बाद बेहतरीन वापसी की है और उम्मीद है कि यह लय सेमीफाइनल और फाइनल में भी जारी रहेगी।"
अब जरा गौर कीजिये संजू सैमसन की बातों पर- "मैंने अपना अधिकांश समय डगआउट में बैठकर बिताया है। मैंने 100 के करीब मैच बाहर बैठकर देखे हैं। मैंने रोहित भाई यानी रोहित शर्मा और विराट भाई यानी विराट कोहली को गेम फिनिश करते हुए देखा और उनसे सीखा कि अंत तक टिके रहना कितना जरूरी है। यह पारी उसी 'ऑब्जर्वेशन' और 'लर्निंग' का परिणाम थी। मेरी यह यात्रा काफी खास और उतार-चढ़ाव भरी रही है। मैंने काफी समय ख़ुद पर संदेह करते बिताया है। यह सोचते हुए कि क्या मैं अच्छा प्रदर्शन कर सकता हूं, लेकिन मैंने खुद पर भरोसा करना जारी रखा और मैं ईश्वर का शुक्रगुजार हूं जो उन्होंने आज मेरे ऊपर अपना आशीर्वाद बनाए रखा।"
महान सुनील गावस्कर की प्रतिक्रिया थी- "संजू सैमसन की पारी में सबसे अच्छी बात यह थी कि उन्होंने अपनी प्रतिभा को अनुशासन के साथ जोड़ा। संजू की आंखों में आंसू केवल एक मैच जीतने की खुशी नहीं, बल्कि ये उन सालों का हिसाब हैं जो उन्होंने इंतज़ार में बिताए हैं। जब आप प्रतिभाशाली होते हैं और फिर भी आपको बाहर बैठना पड़ता है, तो वह दर्द बहुत गहरा होता है। ईडन गार्डन्स पर संजू ने अपनी आत्मा से बल्लेबाजी की है। इन आंसुओं में वह सुकून है जो एक खिलाड़ी को तब मिलता है जब वह पूरी दुनिया को बता देता है कि मैं यहीं का हूं और मैं हार मानने वालों में से नहीं हूं।
सचिन तेंदुलकर ने तो कहा- "संजू को इस शांत अवतार में बैटिंग करते देखना एक ईश्वरीय अनुभव जैसा था।" और युवराज सिंह बोले- "संजू, आप पर गर्व है। आपने चैंपियन खिलाड़ी का माइंडसेट दिखाया है।"
भारतीय टीम अब इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल की तैयारी में जुटी है, क्रिकेट के गलियारों में एक बहस सालों से जारी थी वह थी- प्रतिभा बनाम निरंतरता, ईडन गार्डन्स पर उस जादुई शाम ने इस बहस पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। इसी वजह से हमने यहां संजू सैमसन की पिछली पारियों और प्रदर्शन का तनिक भी जिक्र नहीं किया।
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