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धुरंधर देश के जाने-माने पहलवानों ने जीता दर्शकों का दिल: पहलवानों ने मिट्टी में दिखाए दांव-पेंच

KHULASA FIRST

संवाददाता

17 फ़रवरी 2026, 7:13 pm
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धुरंधर देश के जाने-माने पहलवानों ने जीता दर्शकों का दिल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर की पावन धरती पर सोमवार को कुश्ती प्रेमियों के लिए यादगार शाम रही। मां अहिल्या की नगरी में बिचौली मर्दाना स्थित मां वैष्णो धाम मंदिर मैदान पर भव्य कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। शाम 4 बजे से शुरू हुए इस रोमांचक आयोजन में देश-विदेश के नामी पहलवानों ने अखाड़े में अपने दमखम और दांव-पेंच का शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।

दंगल में हरियाणा के प्रसिद्ध पहलवान दिनेश गोलिया, उत्तर प्रदेश के शेर गुर्जर और ईरान के मिर्जा पहलवान सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने भाग लिया। मुकाबले इतने रोमांचक रहे कि दर्शक देर शाम तक अखाड़े के आसपास डटे रहे। मिट्टी की खुशबू और खिलाड़ियों की फुर्ती ने पारंपरिक कुश्ती की गरिमा को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्मश्री, पद्मभूषण एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कुश्ती जगत के दिग्गज महाबली सतपाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके आगमन से खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया। उन्होंने युवा पहलवानों का हौसला बढ़ाते हुए कुश्ती को भारतीय संस्कृति की पहचान बताया और अनुशासन व समर्पण को सफलता की कुंजी बताया।

दंगल का आयोजन मध्य प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव के संरक्षण में संपन्न हुआ। प्रमुख मुकाबले में महाराष्ट्र केसरी महेंद्र गायकवाड़ ने हिंद केसरी उमेश मथुरा को हराकर शानदार जीत दर्ज की। विजेता महेंद्र गायकवाड़ को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।

दंगल प्रभारी मानसिंह यादव, दंगल अध्यक्ष नवीन गोधा, गौरव रणदीवे, कैलाश शर्मा और मुन्नालाल यादव ने विजेता पहलवानों को पुरस्कृत किया। वितरण समिति अध्यक्ष दीपक जायसवाल, मार्गदर्शक राजेश अग्रवाल, विनीत गर्ग, नितिन गर्ग, पवन बाकलीवाल सहित आयोजन समिति के अनेक पदाधिकारियों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई।

लगभग 10 हजार दर्शकों की क्षमता वाला विशेष स्टेडियम तैयार किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में कुश्ती प्रेमी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। भव्य आयोजन ने न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया, बल्कि इंदौर में पारंपरिक खेलों के प्रति उत्साह को भी नई ऊर्जा दी।

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