रविवार का धार्मिक महत्व: सूर्य उपासना से ऊर्जा, आरोग्य और आत्मविश्वास का संचार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भारतीय संस्कृति में रविवार को अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान दिन माना गया है। यह दिन सूर्य देव को समर्पित है, जिन्हें दृश्य देवता भी कहा जाता है—अर्थात ऐसे देव, जिनका प्रत्यक्ष स्वरूप प्रतिदिन आकाश में दिखाई देता है। वैदिक ग्रंथों में सूर्य को जीवन, प्रकाश, समय और चेतना का आधार बताया गया है।
क्यों विशेष है रविवार?
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। कुंडली में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के आत्मबल, नेतृत्व क्षमता, सरकारी कार्यों और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी मानी जाती है। इसी कारण रविवार को सूर्य की आराधना करने से आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि होने की मान्यता है।
सूर्य मंत्रों का जाप करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रविवार के दिन व्रत रखने और सूर्य मंत्रों का जाप करने से स्वास्थ्य लाभ, नेत्र रोगों से मुक्ति और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है। कई स्थानों पर इस दिन विशेष सूर्य पूजा, हवन और सत्संग का आयोजन भी किया जाता है।
सूर्य पूजा की पारंपरिक विधि
रविवार प्रातःकाल स्नान के पश्चात तांबे के पात्र में जल लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। जल में लाल पुष्प, अक्षत और रोली मिलाने की परंपरा भी है। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सामाजिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रातःकालीन सूर्य किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। विटामिन-डी का प्रमुख स्रोत होने के कारण सुबह की धूप शरीर को सशक्त बनाती है। इस प्रकार सूर्य पूजा केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवनशैली का सकारात्मक अभ्यास भी है।
अवकाश नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और ऊर्जा अर्जित करने का अवसर
रविवार केवल सप्ताह का अवकाश नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और ऊर्जा अर्जित करने का अवसर भी है। सूर्य देव की उपासना भारतीय परंपरा में प्रकाश, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक है। नियमित रूप से सूर्य आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में संतुलन और उत्साह बना रहता है।
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