पंजीयन किया: खरीदा क्यों नहीं; अब भावांतर मिले
KHULASA FIRST
संवाददाता

गेहूं खरीदी की सरकारी दुकान बंद; 19 लाख किसानों का पंजीयन, खरीदी केवल 12.54 लाख से
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्य सचिव से लेकर जिलों के ऑफिसर सुकून में नजर आ रहे हैं क्योंकि बुधवार से गेहूं की सरकारी खरीदी बंद करवा दी गई जबकि एक तिहाई किसानों से ही खरीदी की गई और इसके लिए सुनियोजित स्लॉट बुकिंग का मायाजाल रचकर शिकार लाखों किसानों को बनाया गया।
स्लॉट बुकिंग का ऐसा खेल रचा गया कि मानो स्लॉट बुकिंग नहीं होकर कोई वीजा हो जिसे हर कोई नहीं पा सकता।
मुख्यमंत्री के लाख चाहने के बावजूद बचे किसान खरीदी के माया जाल में फंसकर असहाय खड़े हैं। अन्याय के शिकार इन किसानों को भावांतर देने की मांग किसान संघ ने की है।
अब गांव गांव, चौपाल चौपाल पर ग्रामीण सरकार से सवाल कर रहे हैं पंजीकृत सभी किसानों से गेहूं क्यों नहीं खरीदा गया? क्यों किसानों को अंधकार में रखकर स्लाट की बुकिंग नहीं होने दी गई?
यदि 12 लाख किसानों से गेहूं खरीद सकते हैं तो बचे साढ़े सात लाख को किस बात की सजा दी है ? उनसे नही खरीदने का क्या कारण है ? जब पंजीकरण सरकार ने किया तो अब इन्हें बाजार के भरोसे क्यों छोड़ दिया गया है ?
नहीं खरीदना था तो 12 लाख किसानों से भी क्यों खरीदा गया ? सरकार बताएं क्या वे राष्ट्रविरोधी है वामपंथी है या नक्सली हैं आखिर इन्हें किस बात की सजा दी गई? यदि सरकार किसान कल्याण वर्ष में एक-एक दाना गेहूं खरीदने के उनके वादे का पालन करना चाहती है तो भाव अंतर दिया जाना चाहिए।
सरकार ने 12 लाख किसानों का गेहूं तो खरीद कर वाहवाही लूटने की जो कोशिशें की उस पर बचे हुए किसानों के साथ किए गए अन्याय ने पानी फेर दिया। अब सरकार को श्रेय के बजाय बदनामी मिल रही है।
स्लॉट बुकिंग का चक्रव्यूह...भारतीय किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह कहते हैं अधिकारियों ने स्लाट बुकिंग का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि 19 लाख में से करीब 7.5 लाख किसान बीते एक महीने से स्लॉट की बुकिंग में उलझे रहे।
प्रदेश शासन ने नहीं चाहते हुए भी खरीदी समर्थन मूल्य पर जैसे तैसे की। यह खरीदी भी मुख्यमंत्री के प्रयास से हो पाई अन्यथा सरकारी मशीनरी बहुत थोड़ा गेहूं ही खरीदने के पक्ष में बताई गई थी।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के गेहूं उपार्जन के ताजा आंकड़े किसानों और सरकार दोनों के लिए कई सवाल खड़े कर रहे हैं। 20 मई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 19,04,663 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया, लेकिन इनमें से केवल 14,82,869 किसानों ने स्लॉट बुकिंग कराई और आखिरकार सरकार ने मात्र 12,54,334 किसानों से ही गेहूं खरीदा। यानी पंजीकृत किसानों में से करीब 6.5 लाख किसान खरीदी प्रक्रिया से बाहर रह गए। यह अंतर किसानों की नाराजगी और समर्थन मूल्य खरीदी की चुनौतियों का खुलासा करता है।
कई जिलों में खरीदी बेहद कम...आलीराजपुर, बुरहानपुर, अनूपपुर, पांढुर्णा जैसे जिलों में खरीदी बहुत कम रही। आदिवासी और दूरस्थ जिलों में सरकारी खरीदी व्यवस्था की पहुंच सीमित दिखाई दी।
किसानों के बीच बढ़ रही चिंता... सरकार लगातार दावा करती रही ‘किसानों का एक-एक दाना खरीदा जाएगा’, लेकिन आंकड़े बताते हैं बड़ी संख्या में किसान अब भी खरीदी प्रक्रिया से बाहर हैं।
कई समय पर स्लॉट नहीं मिलने, केंद्रों पर अव्यवस्था, परिवहन समस्याओं और खरीदी अवधि समाप्त होने की शिकायत कर रहे हैं।
बड़े जिलों में सबसे ज्यादा खरीदी
खरीदी में मालवा-निमाड़ और
मध्य क्षेत्र के जिले आगे रहे।
उज्जैन पंजीयन: 1,23,282
स्लॉट बुकिंग: 1,04,830
विक्रेता किसानों की संख्या: 94,425
खरीदी मात्रा: 7,38,986 एमटी
सीहोर: खरीदी मात्रा: 7,05,490 एमटी
विदिशा: खरीदी मात्रा: 5,72,135 एमटी
राजगढ़: खरीदी मात्रा: 4,05,044 एमटी प्रदेश की कुल खरीदी में बड़ा योगदान दिया।
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