उपयंत्री की पात्रता नहीं रखतीं राणा, मस्टरकर्मी हैं: 25 दिन पहले आईं उपयंत्री; आते ही ड्रेनेज लाइन का कार्य रुकवा दिया, जोन पर हंगामा, पार्षद बोले-
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
25 दिन पहले ही जोन क्र. 1 पर आई उपयंत्री मनीषा राणा ने 25 अप्रैल को वार्ड क्र. 9 के साउथ गाडराखेड़ी में ड्रेनेज लाइन की मरम्मत का चलता काम रुकवा दिया था। इसके विरोध में पार्षद राहुल जायसवाल जब जोन पर पहुंचे तो उपयंत्री ने किसी अन्य मोहल्ले में काम करवाने की बात कही, जबकि इस बस्ती में 25 वर्षों के बाद ड्रेनेज लाइन दुरुस्त की जा रही थी। इस पर जमकर हंगामा मचा।
पार्षद ने कहा कि उपयंत्री राणा विवादास्पद अधिकारी हैं और पूर्व में भी विवादों में घिरी रही हैं। उन्हें हटाया जाए। उनका ये भी दावा है कि वे उपयंत्री होने की पात्रता नहीं रखतीं बल्कि मस्टकर्मी हैं।
उल्लेखनीय है कि माता के निधन के बाद पार्षद राहुल जायसवाल व्यस्त थे। जब वो हरिद्वार से लौटे तो रहवासियों ने बताया कि साउथ गाडराखेड़ी बस्ती में ड्रेनेज लाइन का चलता काम रुकवा दिया गया।
ठेकेदार गुलशन जुनेजा को जोनल अधिकारी विनोद अग्रवाल ने क्षतिग्रस्त ड्रेनेज लाइन को दुरुस्त करने, मेनहोल संधारण कार्य करने का वर्क ऑर्डर जारी किया था।
वार्ड क्र. 9 के पार्षद जायसवाल का कहना है कि ये काम करीब 40 प्रतिशत ही हुआ था कि 25 अप्रैल को उपयंत्री मनीषा राणा ने काम रुकवा दिया। उन्होंने अन्य बस्तियों में ड्रेनेज लाइन संबंधी काम करवाना शुरू कर दिया। जब रहवासियों ने उन्हें व पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय को बताया तो उन्होंने जोन पर जाकर बात करने को कहा। इसके बाद वे कल दोपहर जोन पर रहवासियों के साथ पहुंचे, लेकिन उपयंत्री मनीष राणा ने बहुत रूखे स्वरों में बात करते हुए कहा कि मैं अपने हिसाब से काम करवाऊंगी।
आपको क्या तकलीफ है? अगर कहीं और काम करवाऊंगी तो क्या हो जाएगा। इस पर रहवासियों ने बताया कि ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा छोड़ दिया गया है और गड्ढे में दो बच्चे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उपयंत्री मनीषा राणा ने कोई ध्यान नहीं दिया कि आपका काम बाद में होगा तो क्या फर्क पड़ेगा? इसी दौरान उपयंत्री ने जो ठेकेदार को काम बंद करने का नोटिस दिया था, वो फाड़ दिया। इस पर जमकर हंगामा मचा और सभी पक्ष जोर-जोर से बोलने लगे।
हमने ठेकेदार को नोटिस नहीं दिया
मामले में जोनल अधिकारी विनोद अग्रवाल ने कहा कि उपयंत्री का कहना है कि लेबर नहीं थी, इसलिए काम रोका गया। खुद उपयंत्री मनीषा राणा का कहना है कि ठेकेदार ने खुद ही काम बंद कर दिया था, उसकी लेबर शादी में गई है। पार्षद को लगा कि काम हमने बंद करवाया है, ये गलतफहमी हो गई थी। हमने ठेकेदार को कोई भी नोटिस जारी नहीं किया है।
जनगणना कार्य में व्यस्त होने का बहाना बनाया
पार्षद जायसवाल का कहना है वे जोनल अधिकारी के कक्ष में बैठे थे और उपयंत्री को बुलाया तो उन्होंने जनगणना कार्य में व्यस्त होने का बहाना बनाया। फिर आई तो उनके तेवर काफी अनुचित थे। उन्होंने उपयंत्री से पूछा कि आपने मेरी अनुपस्थिति में काम कैसे बंद करवा दिया? लेकिन वो कोई जवाब ठीक से नहीं दे रही थीं। इस पर विवाद हुआ, जिसके बाद वे रहवासियों के साथ वहां से चले गए। जाते-जाते उन्होंने कहा कि वे अपने वार्ड में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं करेंगे और विरोध करेंगे।
विवादास्पद उपयंत्री हैं मनीषा राणा
मामले में पार्षद राहुल जायसवाल का कहना है कि उपयंत्री मनीषा राणा विवादास्पद हैं। वे पूर्व में बालमुकुंद सोनी के वार्ड में थीं, वहां भी अनेक विवादास्पद फैसले लेने के बाद उन्हें हटाया गया था। इसके बाद जोन क्र. 1 पर भेज दी गईं।
यहां भी विवादास्पद फैसले ले रही हैं। जायसवाल का दावा है कि वे उपयंत्री की पात्रता रखती ही नहीं हैं, बल्कि मस्टरकर्मी हैं। वो वार्ड क्र. 2 में हिंदू बहुल इलाकों में मुस्लिम नामों के बोर्ड लगाने को लेकर भी विवादों में घिर चुकी हैं।
तब आकाश विजयवर्गीय ने उनका तबादला करवा दिया था। उन्होंने पूरे मामले की शिकायत महापौर पुष्यमित्र भार्गव और आयुक्त क्षितिज सिंघल से की है, जिन्होंने उपयंत्री का फिर ट्रांसफर करने का भरोसा दिया है।
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