राहुल की ‘स्मृति’ सिर्फ मनुस्मृति: राहुल गांधी की नजर में महिलाएं सिर्फ बेटी; पत्नी, मां नहीं...वे स्वतंत्र हैं
KHULASA FIRST
संवाददाता

राहुल पर बड़ा सवाल- केवल मनुस्मृति में क्यों नजर आता है दोष?
पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति के जरिये राहुल गांधी के निशाने पर एक बार फिर सनातन धर्म
भारत की नारी के पिता, पति व बेटे के संरक्षण में रहने की सनातनी व्यवस्था को राहुल ने बताया शर्मनाक
मनुस्मृति पर सवाल खड़े करने वाले राहुल गांधी पर देशभर से सवालों की बौछार- सिर्फ एक ही किताब में क्यों नजर आती है विकृति?
भाजपा ने की घेराबंदी, स्मृति ईरानी बोलीं- महिलाओं की इतनी ही चिंंता है तो संसद में महिला आरक्षण पर दें सरकार का साथ
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर ।
पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति के उस प्रावधान की कड़ी आलोचना की, जिसमें महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित कर उन्हें पुरुष रिश्तेदारों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इसे ‘शर्मनाक’ करार देते हुए कहा कि महिलाएं किसी की संपत्ति नहीं, बल्कि स्वयं अपनी होती हैं।
इस बयान ने देश में पितृ सत्तात्मक सोच और प्राचीन ग्रंथों की प्रासंगिकता पर एक नया राजनीतिक और वैचारिक संग्राम छेड़ दिया है। राहुल ने जोर देकर कहा कि एक महिला की पहचान केवल बेटी, पत्नी या मां तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने मनुस्मृति का संदर्भ दिया।
उन्होंने ग्रंथ के अध्याय 9, श्लोक 3 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि बाल्यावस्था में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्र स्त्री की रक्षा करता है। उसके अधीन रहती है तथा वह कभी स्वतंत्र रहने योग्य नहीं है।
राहुल गांधी ने पितृसत्ता पर प्रहार करते हए आरोप लगाया कि समाज में महिलाओं को दबाने वाली यह मानसिकता यानी ‘मनुस्मृति माइंडसेट’ आज भी महिलाओं की प्रगति और सुरक्षा में बड़ी बाधा है। इस बड़े बयान पर समर्थकों का मानना है कि राहुल ने महिलाओं के अधिकारों, उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आधुनिक लैंगिक समानता की बात को मजबूती से उठाया है। उनका उद्देश्य रूढ़िवादी और पितृ सत्तात्मक सामाजिक जकड़नों को तोड़ना तथा महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
दूसरी तरफ राहुल गांधी के बयान पर बवाल मचा हुआ है। सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्र में उनकी जबरदस्त आलोचना हो रही है। भारतीय जनता पार्टी और अन्य वैचारिक संगठनों ने पलटवार करते हुए कहा राहुल गांधी राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू ग्रंथों की चयनात्मक और मनमानी व्याख्या कर रहे हैं और आधुनिक समाज पर प्राचीन ग्रंथों को थोपकर सनातन संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं।
आलोचकों का यह भी मजबूत तर्क है कि आधुनिक भारत का संचालन संविधान से होता है, न कि किसी प्राचीन स्मृति ग्रंथ से, इसलिए इस तरह के संदर्भों को बार-बार उठाना भ्रामक है। राहुल गांधी के इस बयान ने एक दोहरी बहस को जन्म दे दिया है।
एक तरफ यह आधुनिकता और नारी स्वतंत्रता का संदेश देता है, तो दूसरी तरफ प्राचीन ग्रंथों के ऐतिहासिक संदर्भों बनाम राजनीतिक बयानबाजी के बीच एक संवेदनशील सांस्कृतिक विवाद खड़ा करता है।
मनुस्मृति में नारी को पूजने वाला मंत्र भूल क्यों गए राहुल: भाजपा... भाजपा के अमित मालवीया और निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक प्रोपेगंडा करार दिया और उनके वेदों-पुराणों के ज्ञान पर सवाल उठाया। भाजपा नेताओं ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा और विदेशी परिप्रेक्ष्य के कारण राहुल को भारत के प्राचीन वेद, पुराण और ग्रंथ समझ नहीं आते।
भाजपा ने मनुस्मृति के उन अन्य श्लोकों और संदेशों का जिक्र किया, जिनमें महिलाओं के सम्मान और उनकी पूजा की बात कही गई है। जैसे ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:’। राहुल पर केवल चुनिंदा हिस्सों को उठाने का आरोप लगाया।
कुरान-बाइबिल पर भी बोलकर दिखाएं राहुल: विश्व हिंदू परिषद
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा ‘मनुस्मृति’ और पितृ सत्तात्मक सोच पर दिए गए बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन संगठनों ने राहुल पर हिंदू ग्रंथों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और राजनीतिक लाभ के लिए देश में विभाजनकारी नैरेटिव चलाने का आरोप लगाया है।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने राहुल गांधी के बयान की निंदा करते हुए कहा बिना संदर्भ को समझे एक श्लोक चुनकर हिंदू समाज को कटघरे में खड़ा करना आसान है। उन्होंने राहुल पर युवाओं के निर्मल मन को अपनी सोच से दूषित करने का आरोप लगाया।
विहिप ने राहुल गांधी को चुनौती दी कि क्या वे अन्य धर्मों के ग्रंथों जैसे कुरान या बाइबिल में महिलाओं के संबंध में कही गई बातों को भी इसी साहस के साथ सार्वजनिक रूप से उद्धृत करेंगे। विहिप ने कहा राहुल को पहले संतों और टीकाकारों के सान्निध्य में बैठकर पूरे ग्रंथ को समझना चाहिए, न कि राजनीतिक भाषणों के लिए इतिहास और संस्कृति के साथ अन्याय करना चाहिए।
आरएसएस की मानसिकता पिंजरे में कैद रहें महिलाएं: राहुल
राहुल ने कहा जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शन में लड़कों ने भी गाली-गलौज की थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसके लिए सिर्फ लड़कियों को ही निशाना बनाया। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मानसिकता यह है कि महिलाओं और लड़कियों को पिंजरे में कैद रखा जाना चाहिए, लेकिन हम ऐसा भारत नहीं चाहते। महिलाओं को दबाने की मानसिकता मनुस्मृति से उपजी है, हमारी लड़ाई इसी मानसिकता के खिलाफ है।
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