सबसे बड़े बेनिफिसियरी राहुल गांधी होंगे: बात पश्चिम बंगाल चुनाव की
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंद्रशेखर शर्मा 94250-62800 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बेशुमार लोगों को आगामी चार मई का बहुत ही उत्सुकता से इंतजार है। खास ये कि उस इंतजार के खात्मे में अब ज्यादा दिन न बचे। जी हां, आती चार मई चुनाव नतीजों की घोषणा का दिन है और सबसे ज्यादा उत्सुकता, कहने दीजिए कि, पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों को लेकर है।
इस सिलसिले में यह जानना गौरतलब है कि बहुतेरे लोग कह रहे हैं कि यदि वहां टीएमसी जीतती है तो यह ममता बनर्जी की जीत होगी, लेकिन तब देश हार जाएगा! इस बात के वाकई मायने हैं। इसे समझने के लिए पश्चिम बंगाल के चुनाव के पैटर्न और उससे जुड़ी हिंसा को ख्याल में लाना जरूरी है।
हकीकतन वहां चुनाव में यह देखने में आता रहा है कि मतदान के पहले टारगेटेड लोगों के घर जाकर धमकाया जाता है कि वो मतदान से दूर रहें तो इसी में उनकी भलाई है! इसके अलावा वहां चुनावी हिंसा में हुई हत्याओं, बलात्कारों और दीगर अपराध भी किसी से छुपे न।
आप ये ताजा नमूना देखिए कि चुनाव आयोग की तमाम कवायद, तमाम सख्ती और केंद्रीय बलों की जबरदस्त तैनाती के बाद भी टीएमसी के टट्टुओं ने इस चुनाव में ईवीएम मशीन पर भाजपा के निशान वाले बटन पर टेप चिपका दी थी! सो वहां के चुनावी चलन को समझने में बचा क्या? इसके अलावा इस बंगाल में ऐसे-ऐसे कई दीगर चलन भी पनप चुके थे कि लगता था पश्चिम बंगाल, भारत का हिस्सा या अंग ही न है।
बहुत लोग तो यहां तक कहने लगे थे और कहते हैं कि पश्चिम बंगाल दूसरा कश्मीर बन गया है! सो दूसरे तरीके से कहें तो यह बंगाल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और कड़ी चुनौती बन गया है या बना दिया गया।
तो आइए, इस चुनाव की महत्ता को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को टटोलते हैं। सबसे पहले तो बंगाल के करोड़ों मतदाताओं को सैल्यूट कि इस बार उन्होंने मतदान का इतिहास ही रच दिया! इसके लिए चुनाव आयोग और तमाम दीगर एजेंसीज को भी सैल्यूट बिलकुल बनता है।
दूसरी अहम बात यह कि पिछले चुनावों के मुकाबले इस चुनाव में महिला मतदाताओं के मतदान में करीब 11 फीसदी का उछाल आया है। अचरज न कि बहुत लोग इसके लिए महिला आरक्षण बिल को भी एक वजह मान रहे हैं! खैर।
तीसरी बात राहुल गांधी की और उनके एक बयान की। उस बयान की जो उन्होंने चलते चुनाव में दिया था और जिसे ममता बनर्जी पर हमला और चुनाव में ममता को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया।
जानकार कहते हैं कि यह राहुल गांधी का बहुत शातिर दांव था। वो इस सूरत कि देश के प्रधानमंत्री पद के विपक्ष के अन्य दावेदारों को राहुल गांधी पहले ही ठिकाने लगा चुके हैं या किसी और वजह से उनकी दावेदारी धड़ाम है। केवल ममता बनर्जी बची थीं और जानकार कहते हैं कि ममता बनर्जी यह चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल अपने भतीजे को सौंपकर खुद केंद्र की राजनीति में जाना तय कर चुकी थीं।
जाहिर है ये सब राहुल गांधी को क्यूं कर मंजूर होता? सो जानकार यह भी कहते हैं कि यदि ममता बनर्जी चुनाव हारती हैं तो उसके सबसे बड़े बेनिफिसियरी राहुल गांधी होंगे! इधर, बहुत लोग कहते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार के पास राहुल गांधी के खिलाफ खूब ‘सामग्री’ है तो वो उन्हें जेल में क्यों नहीं डालती? इसका जवाब यह है कि कंस के खात्मे के बाद भगवान श्रीकृष्ण मथुरा लौट गए थे।
तब एक था जरासंध। ये भगवान श्रीकृष्ण और बलराम को अपना प्रबल शत्रु मानता था। सो एक दिन अपने अनेक महारथियों को लेकर वो मथुरा के बाहर पहुंचा और मुनादी करवाई कि श्रीकृष्ण और बलराम को मेरे हवाले कर दो।
बाकी किसी से हमारी दुश्मनी नहीं और वो निश्चिंत रहें। इस पर श्रीकृष्ण और बलराम आये और उन्होंने जरासंध के तमाम महारथियों को तो खत्म कर दिया लेकिन जरासंध को छोड़ दिया।
ऐसा कई बार हुआ कि जरासंध अपने महारथियों को लेकर आता, श्रीकृष्ण को ललकारता और नतीजे में भगवान उसके तमाम महारथियों को खत्म कर देते व जरासंध को छोड़ देते ! इस पर बलराम ने श्रीकृष्ण से हैरानी से पूछा कि जरासंध को बार-बार जिंदा क्यों छोड़ देते हो? '
भगवान ने जवाब दिया कि जरासंध हमारे तमाम दुश्मन महारथियों को भेला कर यहां लाता है और हम उनको खत्म करते हैं। यदि जरासंध ऐसा न करे तो हमें उन दुश्मनों को ढूंढना पड़ेगा और हमें उनके वहां जाकर उनसे लड़ना पड़ेगा! सो इसलिए जरासंध को जीवित छोड़ना पड़ता है। जानकार दिलचस्प बात यह कहते हैं कि मोदी और शाह के लिए राहुल ऐसे ही जरासंध हैं!
दीगर बात यह कि गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नक्सल मुक्त करने के बाद पिछले दिनों कहा था कि हम 2029 तक पूर्वोत्तर को इंसरजेंसी से भी मुक्त कर देंगे! जानकार कहते हैं कि इस मुहिम के लिए पश्चिम बंगाल के गढ़ को फतह करना सबसे ज्यादा जरूरी है कि पश्चिम बंगाल ही वो दरवाजा है जो इस समस्या की जड़ है।
जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता है राष्ट्रीय सुरक्षा और इसके लिए जरूरी है कि पश्चिम बंगाल से सटी सैकड़ों किलोमीटर लंबी सीमारेखा पर फेंसिंग करना जो कि अभी बमुश्किल दस किलोमीटर तक ही हो पाई है।
जमा इस सीमारेखा में जलीय इलाका भी है और बताते हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा है कि वो इस जलीय इलाके में बड़े मगरमच्छ छोड़ेंगे, ताकि कोई वहां से घुसपैठ न कर सके। विदित हो कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और घुसपैठिये बड़ी समस्या है।
इसे यूं भी समझा सकता है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल ने बांग्लादेश की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
जी हां, इस सिलसिले में बांग्लादेश के एक सांसद का बयान सामने आया है। वो कह रहे हैं कि यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा जीती तो ढाका में शरणार्थियों की समस्या संभाले नहीं संभलेगी। एग्जिट पोल की जहां तक बात है तो उनमें से ज्यादातर में भाजपा की जीत का अनुमान लगाया गया है। बहरहाल नतीजा तो चार मई को ही पता चलेगा। इसमें जीत चाहे किसी की हो लेकिन यह साफ है कि वो नतीजा देश के भविष्य के लिए बहुत अहम होगा।
(ये लेखक के निजी विचार हैं।)
जानकार कहते हैं कि यह राहुल गांधी का बहुत शातिर दांव था। वो इस सूरत कि देश के प्रधानमंत्री पद के विपक्ष के अन्य दावेदारों को राहुल गांधी पहले ही ठिकाने लगा चुके हैं या किसी और वजह से उनकी दावेदारी धड़ाम है।
केवल ममता बनर्जी बची थीं और जानकार कहते हैं कि ममता बनर्जी यह चुनाव जीतकर पश्चिम बंगाल अपने भतीजे को सौंपकर खुद केंद्र की राजनीति में जाना तय कर चुकी थीं।
जाहिर है ये सब राहुल गांधी को क्यूं कर मंजूर होता ? सो जानकार यह भी कहते हैं कि यदि ममता बनर्जी चुनाव हारती हैं तो उसके सबसे बड़े बेनिफिसियरी राहुल गांधी होंगे! इधर, बहुत लोग कहते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार के पास राहुल गांधी के खिलाफ खूब ‘सामग्री’ है तो वो उन्हें जेल में क्यों नहीं डालती? इसका जवाब यह है कि कंस के खात्मे के बाद भगवान श्रीकृष्ण मथुरा लौट गए थे। तब एक था जरासंध।
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