बदले-बदले से नजर आए राहुल बाबा: नेता प्रतिपक्ष के साथ भागीरथपुरा के पीड़ितों ने महसूस किया जुड़ाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर प्रवास को राजनीतिक हमले से दूर रखा, दौरे में राजनीति तलाशने वालों को भी दिया दो टूक जवाब...
घटना की गंभीरता के अनुकूल रखा अपना व्यवहार, विषय के ईर्द-गिर्द रखे अपने ‘बोलवचन’
अपनी भावभंगिमा, वेशभूषा, भाषा के जरिए पीड़ित परिवार के बीच सहज व समरस बने रहे
गांधी ने बेहद संयत रखा अपना मिजाज, लहजा, किसी उकसावे में नहीं आए
स्थानीय कांग्रेस के जमीनी आंदोलन को भी बल दे गए गांधी, प्रदेश कांग्रेस का भी बड़ा हौसला
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बदले-बदले से नजर आए वो राहुल बाबा, जो बात-बात पर बांह चढ़ा लेते हैं। मामला उनके मिजाज के अनुकूल था। यानी सत्ता से उनकी दो-दो हाथ की राजनीति के मनोनुकूल। बावजूद वे संयत व शांत बने रहे। वे किसी भी उकसावे में भी नहीं आए।
न वे प्रदेश की मोहन सरकार के खिलाफ हमलावर हुए, न आंचलिक क्षत्रप भाजपाइयों पर कोई निशाना साधा। वे विषय से रत्तीभर भी भटके नहीं। न विषय की गंभीरता से परे हुए। दौरे में राजनीति तलाशने वालों को भी उन्होंने कोई मौका नहीं दिया।
उलटा उन्हें दो टूक जवाब के साथ निराश ही किया कि में हताहतों के दर्द को महसूस करने आया हूं, आपको जो राय बनाना है, बनाएं। उनकी साफगोई ने जहरीले जल से पैदा होने वाली हलचल को थाम दिया।
नतीजतन पीड़ित पक्ष ही नहीं, इंदौर ने भी राहुल बाबा के इस प्रवास से स्वयं का जुड़ाव महसूस किया। उस स्थिति में जब सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेताओं के अलावा किसी अन्य बड़े नेता के घटना से जुड़ाव का अभाव रहा।
राहुल गांधी का इंदौर दौरा प्रचारित की जा रही खबरों व बनाए जा रहे माहौल से ठीक उलट था। उनका दौरा खामोशी के साथ मुकम्मल जरूर हुआ, लेकिन इसी खमोशी ने विरोधी खेमे में शोर मचा दिया। राहुल विरोधी कैंप को भरपूर उम्मीद थी कि अपनी आदत के मुताबिक राहुल इंदौर में भी कोई ‘सेल्फ गोल’ कर देंगे या कांग्रेसी ऐसा कुछ कर बैठेंगे की राहुल के इंदौर प्रवास की घेराबंदी बन जाएगी, लेकिन ऐसी मंशाओं को निराशा हाथ लगी।
राहुल गांधी ने विमानतल से बॉम्बे हॉस्पिटल व बॉम्बे हॉस्पिटल से आपदा प्रभावित भागीरथपुरा तक के दौरे में बेहद कूल अंदाज का मुजाहिरा कराया। वे पूरे दौरे में बेहद सहज, सरल व संयमित नजर आए, कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई, जबकि विषय तंत्र व सरकार की नाकामी से हुई 23 लोगों की मौत से जुड़ा था, लेकिन गांधी ने अपने पूरे दौरे से ये साफ कर दिया कि ये ‘लाशों पर राजनीति’ का मामला नहीं था। ये हताहतों के साथ उनके दर्द को साझा करने का प्रवास था।
राहुल ने अपनी भाषा-भूषा व भावभंगिमा से पीड़ित परिवारों के बीच सहजता बनाए रखी। इसी सादगी के कारण वे उनके बीच पहुंचते ही समरस हो गए, जैसे कोई जनसामान्य ही उनके बीच आया है। पीड़ित परिवार राहुल को लेकर बेहद असमंजस व उत्सुकता में भी थे।
उनकी जिज्ञासा इस बात को लेकर थी कि विपक्ष का सबसे बड़ा नेता और वह भी भाजपा का घनघोर विरोधी आ रहा है तो कुछ बड़ा होगा, लेकिन इस बड़े नेता के बड़प्पन ने उन्हें ऐसा कुछ महसूस ही नहीं होने दिया कि गांधी का ये प्रवास राजनीति से ही प्रेरित है।
इसका खुलासा स्वयं राहुल गांधी ने ये कहते हुए किया कि में विपक्ष का नेता हूं और पीड़ितों के दर्द को बस साझा करने यहां आया हूं। इसी कारण पीड़ित उनसे जुड़ गए और वे सब बेबाकी से बोले जिसकी वे स्वयं कल्पना नही कर रहे थे। राहुल ने न भागीरथपुरा, न अस्पताल में पीड़ितों से ऐसे प्रश्न किए जो राजनीति से जुड़े हों।
राहुल ने अपना व्यवहार घटना की गंभीरता के अनुकूल रखा। विषय के अनुकूल ही अपने बोलवचन यानी वक्तव्य को रखा। उन्होंने भागीरथपुरा के गंदे जल की आपदा को व्यापक नजरिये से देखा और इसे देश के अर्बन मॉडल से जोड़ा।
मोदी सरकार के स्मार्ट सिटी मॉडल पर सवाल करते हुए भी उन्होंने मामले को केवल इंदौर तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ इंदौर ही नहीं, हर बड़े शहर का मामला है, जहां न पीने को साफ पानी है, न साफ आबोहवा।
उन्होंने इसी विषय को बार-बार दोहराया कि साफ पानी और पॉल्यूशन का विषय सरकारों का है और सरकारें ही इसमें नाकाम हैं। ये सब कहते हुए भी उन्होंने स्पष्ट किया कि ये राजनीति नहीं, ये भागीरथपुरा के लोगों का सपोर्ट है। हां, उन्होंने इस बात पर बार-बार जोर दिया कि इस त्रासदी की कोई तो जिम्मेदारी ले, दोषियों को सजा दिलाए व पीड़ितों को अच्छा इलाज व मुआवजा मुहैय्या कराए।
पहले सज्जन से जाना पूरा मामला, कार में पढ़ी जांच रिपोर्ट, फिर हुए मुखर
राहुल गांधी ने भागीरथपुरा का पूरा मामला वरिष्ठ पार्टी नेता सज्जन सिंह वर्मा से जाना व समझा। वर्मा ने उनके आते ही एक रिपोर्ट आगे की और बताया कि ये वह जांच रिपोर्ट है जो कांग्रेस दल ने मामले पर तैयार की है। सज्जन सिंह ने ये भी बताया कि दल का नेतृत्व मैंने ही किया था।
इसके बाद राहुल ने वर्मा से रिपोर्ट ली और उसका कार में सवार होने के बाद अध्ययन किया। उसके बाद वे इस विषय पर मुखर हुए। राहुल के इस दौरे ने स्थानीय कांग्रेस के जमीनी आंदोलन को भी ताकत दी और प्रदेश कांग्रेस का हौसला भी बड़ा दिया।
अन्यथा मामला उमंग सिंघार व जीतू पटवारी तक आकर सिमट जाता, जो बाहुबली प्रदेश भाजपा के लिए ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ ही साबित हो रहे थे। राहुल गांधी के दौरे ने इंदौर के जहरीले जल कांड में एक बार फिर देशव्यापी हलचल मचाई और राष्ट्रीय मीडिया में मुंबई की भाजपाई जीत के शोर के बावजूद इंदौर का गंदा पानी फिर एक बार सुर्खियां बना।
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