पश्चिमी रिंग रोड पर फिर भड़का आंदोलन: एनएचएआई को मनमानी पड़ेगी भारी; रुक जाएगा निर्माण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पश्चिमी रिंग रोड के खिलाफ भारतीय किसान संघ का संगठित और ताकतवर आंदोलन फिर भड़क गया है। पहले भी ताकतवर आंदोलन किया था जिससे सरकार की काफी आलोचना हुई थी।
फिर से होने वाला यह आंदोलन नेशनल हाईवेज अथॉरिटी(एनएचएआई) को भारी पड़ेगा।। किसानों ने फिलहाल शांतिपूर्वक एनएचएआई की मनमानी के खिलाफ सरकार को ज्ञापन प्रेषित किए हैं।
आगे प्रदर्शन और उसके बाद सड़क का निर्माण बंद करवाने का आंदोलन होगा।
किसान नेता कृष्णपालसिंह राठौड़ ने बताया एनएचएआई किसानों के साथ छल कपट कर सर्विस रोड का निर्माण नहीं कर रही है। अन्य शर्तों का भी सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। इन समस्याओं को लेकर शांतिपूर्वक तरीके से किसान और संगठन किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपालसिंह राठौड़ और अनिल व्यास आदि के नेतृत्व में अधिकारियों से बार-बार आग्रह करते रहे हैं लेकिन वे कोई बात नहीं सुन रहे।
इससे आक्रोशित किसानों में फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रथम चरण में ज्ञापन दिए हैं। इसके बाद सड़क निर्माण पूरी तरह रोक दिया जाएगा। इससे किसानों और केंद्रीय एजेंसी के बीच टकराव की स्थिति गंभीर रूप ले लेगी।
पश्चिमी रिंग रोड का आंदोलन तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह के प्रयास से स्थगित हुआ था। उस समय आंदोलन की अगुवाई कृष्णपालसिंह और किसान संघ के संगठन मंत्री अतुल महेश्वरी, प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मी पटेल अनिल व्यास आदि ने की थी।
केंद्रीय मंत्री की इतनी रुचि क्यों
इंदौर के बाहरी क्षेत्र में मास्टर प्लान के तहत आउटर बायपास यानी पूर्वी और पश्चिम रिंग रोड का निर्माण प्रदेश की एजेंसियां द्वारा नहीं करते हुए केंद्र की नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है।
अनिल व्यास कहते हैं मास्टर प्लान से संबंधित कामकाज प्रदेश के जिम्मेदारी है ना कि केंद्र की फिर भी इसका निर्माण केंद्र की एजेंसी से कराया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के प्रमुख नितिन गडकरी की रुचि इस सड़क निर्माण में शुरु से ही बहुत ज्यादा है।
ऐसा क्यों है ? इसे लेकर कई तरह की चर्चा सुनने में आती रही है। हो सकता है केंद्रीय मंत्री के विकास का नजरिया शायद लोग नहीं समझ पा रहे हैं इसलिए सवाल करते हैं। भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया है आंदोलन के दौरान किसानों से किए गए महत्वपूर्ण वादों को अब तक पूरा नहीं किया गया, जिससे क्षेत्र के किसानों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
संघ के अनुसार पश्चिमी रिंग रोड निर्माण के समय प्रशासन और किसानों के बीच कई महत्वपूर्ण सहमति बनी थीं। इनमें खेतों में जलभराव रोकने समुचित निकासी व्यवस्था, सिंचाई के लिए सड़क के आर-पार पाइप लाइन निकालने हेतु आवश्यक पाइपों की व्यवस्था तथा किसानों और ग्रामीणों के आवागमन के लिए सर्विस रोड का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल था।
किसानों का आरोप है निर्माण आगे बढ़ने के बावजूद इन मूलभूत सुविधाओं पर गंभीरता से अमल नहीं किया गया। मुआवजे में भी कई प्रकार विसंगतियां सामने आ रही हैं। प्रभावित किसानों का कहना है अनेक स्थानों पर भूमि सीमांकन में त्रुटियां हैं, कई किसानों का बटांकन नहीं हुआ है तथा प्रशासनिक स्तर पर कई अनियमितताओं के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन और आवेदन दिए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार को बदलना पड़ी नीति
आउटर पश्चिमी रिंग रोड के निर्माण को लेकर किसान संघ द्वारा आंदोलन के माध्यम से भूमि अधिग्रहण के बदले दिए जाने वाले मुआवजे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी गई थी। सरकार दोगुना मुआवजा लगभग दो दशक पुरानी न्यूनतम गाइडलाइन के आधार पर दे रही थी।
भारतीय किसान संघ ने इस नीति के खिलाफ आंदोलन किया था। आंदोलन की ताकत से सरकार को अंतत: गाइडलाइन में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करना पड़ी और मुआवजे का निर्धारण हुआ।
इसके साथ ही सड़क के दोनों और सर्विस रोड, धरातली ऊंचाई जैसी शर्तों पर भी किसानों, प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों के बीच लिखित समझौता हुआ था।
आंदोलन का यह प्रभाव हुआ मालवा में अन्य हाई-वे निर्माण के खिलाफ आंदोलन शुरू हुए और आखिर में भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने की नीति सरकार को लागू करना पडा।
किसानों का कहना है वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा तक केंद्रीय एजेंसी की मनमानी की जानकारी पहुंची है लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। वैसे वर्मा किसानों के प्रति बेहद संवेदनशील है और उम्मीद की जाना चाहिए इस मामले में फिर आंदोलन की नौबत नहीं आने देंगे।
वादे पूरे करने की चेतावनी
इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के नेतृत्व में पश्चिमी रिंग रोड से प्रभावित तीन तहसीलों सांवेर, हातोद और देपालपुर में प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए। संगठन ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी किसानों से किए गए वादों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संभाग अध्यक्ष कृष्णपालसिंह राठौड़ ने कहा किसान विकास के विरोधी नहीं हैं लेकिन विकास के नाम पर किसानों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। किसान केवल न्यायपूर्ण समाधान और अपने वैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
पश्चिमी रिंग रोड परियोजना को इंदौर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और औद्योगिक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन प्रभावित किसानों की समस्या अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन रही हैं। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन और किसानों के बीच संवाद नहीं बढ़ा, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
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