शासकीय जमीन की शिकायत वापस लेने का बनाया दबाव: तहसीलदार पर गंभीर आरोप; विशेष न्यायालय ने डीएसपी ग्रामीण से मांगा जांच प्रतिवेदन
KHULASA FIRST
संवाददाता

शिकायतकर्ता ने अभद्रता, जातिसूचक शब्दों और झूठे केस में फंसाने की धमकी के आरोप लगाए
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हातोद तहसील के ग्राम अलवासा में शासकीय जमीन पर कथित कब्जे, अवैध प्लॉटिंग और छोटे-छोटे भूखंड तैयार कर उन्हें नोटरी के माध्यम से बेचने के आरोप अब न्यायालय की जांच के दायरे में पहुंच गए हैं।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अवैध प्लॉटिंग की शिकायत वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया गया और विरोध करने पर अभद्रता, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल तथा झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता अंकित धुलधौए के अनुसार ग्राम अलवासा स्थित खसरा नंबर 78/2 की शासकीय भूमि पर मलखान सिंह पिता सौदान सिंह और सरपंच की कथित मिलीभगत से छोटे-छोटे भूखंड तैयार किए गए तथा भोले-भाले लोगों को लाखों रुपए में बेचने का प्रयास किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
तहसीलदार पर शिकायत दबाने का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भू-माफिया के खिलाफ शिकायत करने के बाद उसे शिकायत वापस लेने के लिए कथित रूप से दबाव का सामना करना पड़ा। आरोप सीधे तौर पर तहसीलदार हातोद गोविंद सिंह ठाकुर से जुड़े हैं।
शिकायतकर्ता का दावा है कि विरोध करने पर उसके साथ अभद्रता की गई, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया और झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और इनकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यही वजह है कि मामला अब न्यायालयीन परीक्षण के दायरे में पहुंच चुका है।
विशेष न्यायालय ने डीएसपी ग्रामीण से मांगा जांच प्रतिवेदन
परिवादी की ओर से अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रजापत ने धारा 223 बीएनएसएस के आवेदन के साथ धारा 175(3) बीएनएसएस के तहत आवेदन, संबंधित दस्तावेज और वकालतनामा प्रस्तुत किया।
मामले में विशेष न्यायाधीश, अजा एवं अजजा अत्याचार निवारण अधिनियम, इंदौर ने धारा 175(3) बीएनएसएस के आवेदन में लगाए गए अभिकथनों की जांच के लिए डीएसपी ग्रामीण इंदौर से जांच प्रतिवेदन तलब किया है।
न्यायालय के निर्देश के अनुसार आवेदन में किए गए आरोपों की जांच कर प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है। मामले में अगली कार्रवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।
• अब सिर्फ जमीन नहीं, ‘संरक्षण’ के आरोपों की भी जांच जरूरी : अलवासा मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि शासकीय जमीन पर कब्जा हुआ या नहीं। यदि शिकायतकर्ता के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो यह भी जांच का विषय होगा कि कथित अवैध प्लॉटिंग इतने समय तक कैसे चलती रही और इसकी जानकारी अमले को थी या नहीं।
• जांच के दो महत्वपूर्ण पहलू : पहला क्या खसरा नंबर 78/2 की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित किया गया? दूसरा क्या शिकायत सामने आने के बाद शिकायतकर्ता पर शिकायत वापस लेने के लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से दबाव बनाया गया?
यदि जांच में किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी की भूमिका अवैध कब्जे या कथित कॉलोनाइजेशन को संरक्षण देने, शिकायत दबाने अथवा वरिष्ठ अधिकारियों को गलत जानकारी देने में सामने आती है, तो जवाबदेही तय करना भी आवश्यक होगा।
सरपंच की कथित मिलीभगत से छोटे-छोटे भूखंड तैयार कर लाखों रुपए में बेचने का प्रयास किया
कलेक्टर के निर्देशों के बीच उठे निगरानी पर सवाल
शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने और अवैध कॉलोनाइजेशन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन द्वारा राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे। ऐसे में अलवासा मामले की जांच की निष्पक्षता और मौके की वास्तविक स्थिति को लेकर विशेष निगरानी की जरूरत बढ़ गई है।
इसी बीच, प्रशासनिक कार्य सुविधा की दृष्टि से तहसीलदार हातोद गोविंद सिंह ठाकुर को आगामी आदेश तक जिला निर्वाचन कार्यालय में कार्य करने के आदेश जारी किए गए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील किया गया है।
जांच के निर्देश तो हुए, लेकिन जमीन की नपती अब तक नहीं
मामले का खुलासा होने के बाद एसडीएम राजेश कुमार सिंह द्वारा तहसीलदार और पटवारी को जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच में खसरा नंबर 78/2 के साथ उससे संबंधित आबादी घोषित भूमि की मौके पर नपती किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार नपती अब तक स्पष्ट रूप से नहीं हो सकी है।
पटवारी की ओर से बारिश के दौरान मशीन खराब होने का हवाला देकर नपती नहीं होने की बात बताए जाने का दावा किया गया है। यहीं जांच की गंभीरता का सवाल खड़ा होता है, क्योंकि नपती ही पूरे प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
रिकॉर्ड बनाम जमीन…यही खोलेगा कथित प्लॉटिंग का राज
खसरा नंबर 78/2 की वास्तविक सीमाएं, कुल रकबा, राजस्व रिकॉर्ड में भूमि की स्थिति, मौके पर उसका वास्तविक उपयोग, कथित कब्जे की सीमा और तैयार किए गए भूखंडों की स्थिति का आपसी मिलान किया जाना जरूरी है।
सिर्फ कागजी जांच से यह तय नहीं हो सकता कि शासकीय भूमि पर कितना कब्जा हुआ। मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान ही यह स्पष्ट कर सकता है कि क्या सरकारी जमीन को कथित तौर पर छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बिक्री का प्रयास किया गया।
यदि जमीन सरकारी है तो जिम्मेदार कौन?
प्रकरण अब प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि जांच में शासकीय जमीन पर कब्जा और अवैध प्लॉटिंग प्रमाणित होती है, तो कब्जा करने वालों के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां विफल हुई।
और यदि शिकायतकर्ता के अधिकारी पर लगाए गए दबाव, अभद्रता और धमकी के आरोप भी जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी प्रश्न बनेगा।
न्यायालय के जांच प्रतिवेदन पर टिकी निगाहें
न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और 17 सितंबर 2026 को प्रस्तुत होने वाले जांच प्रतिवेदन का इंतजार रहेगा। यह प्रतिवेदन शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रथम दृष्टया स्थिति को सामने लाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन यदि आरोपों में तथ्य सामने आते हैं तो आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
बड़ा सवाल
सरकारी जमीन की निगरानी की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर है, यदि उन्हीं पर संरक्षण के आरोप लगें तो क्या जांच उसी तंत्र के भरोसे छोड़ी जा सकती है? अलवासा प्रकरण में जमीन की नपती, राजस्व रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए दबाव व धमकी के आरोप, इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकती है।
संबंधित समाचार

पांच दिन से लापता वकील का शव रेलवे ट्रैक पर मिला:एक्टिवा की डिग्गी में मिला था मोबाइल; तलाश कर रही थी पुलिस

देखिये वीडियो, खुदाई के दौरान गैस पाइपलाइन हुई लीकेज:तेज प्रेशर से हुआ रिसाव; रहवासियों में मचा हड़कंप, इसी गली में पहले भी हो चुका है हादसा

सोनम वांगचुक का सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम:प्रदर्शनकारियों की रिहाई नहीं हुई तो करेंगे अनशन

हजारों महिलाओं ने किया सीएम हाउस कूच:मंत्री के बंगले के सामने घंटों बैठी रही; 10 नवंबर तक का दिया अल्टीमेटम

कम बारिश से जलसंकट का खतरा:पानी बचाने महापौर पुष्पमित्र भार्गव की शहरवासियों से अपील

देखिए वीडियो, प्रदर्शन को लेकर पीसीसी चीफ का पीएम पर हमला:बोले; विरोध को जितना दबाएंगे, उतनी ताकत से उठेगी आवाज

गुलाब जामुन फैक्ट्री और मामाजी गृह उद्योग सील:त्योहारों से पहले मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग सख्त शिकंजा, कई रेस्टोरेंट पर छापे

व्यवस्था..क्रिकेट मैच के लिए बदलेगा ट्रैफिक:तीन रास्ते रहेंगे बंद

देखिए वीडियो, सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को कांग्रेस का समर्थन:ये नेता बोले; मांगों के साथ खड़ी है पार्टी, सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप

जंतर-मंतर नहीं पहुंच पाए प्रदर्शनकारी:शीर्ष नेता हिरासत में; 3000 समर्थक पकड़े गए, 38 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

कांग्रेस ने पटाखा दुकानों के किराए का भी मांगा हिसाब:राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए 14 लाख शुल्क वसूली और भाजपा के कार्यक्रम को छूट देने पर उठाए सवाल

गोवंश वध के मामले में इतने आरोपी गिरफ्तार:वारदात में इस्तेमाल बाइक जब्त; कलेक्टर और एसपी ने दिए थे जांच के निर्देश

350 करोड़ की बेशकीमती जमीन का मामला:भूमाफिया के पक्ष में आया फैसला; प्रशासन की भूमिका पर सवाल

अवैध वसूली करने वाले 4 वनकर्मी सस्पेंड:रेंज में कर दिया लाइन अटैच

इस शहर के लिए शुरू होगी सीधी उड़ान:डेढ़ घंटे में पूरा होगा सफर; विंटर शेड्यूल में शुरू होगी विमान सेवा

पूछेंगे एसआईआर के समय फॉर्म जमा क्यों नहीं किया:आज से बीएलओ जाएंगे घर-घर

लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई:इतने परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्त; इतने निलंबित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिया कानूनी झंझटों से बचाने का भरोसा:स्वामित्व योजना में पूरा सहयोग करेंगे पटवारी

सड़कों पर कीलें लगाकर कॉकरोचों को रोक लिया:सड़कों पर कीलें लगाकर कॉकरोचों को रोक लिया

भीषण सड़क हादसा:बेकाबू बस ने तीन छात्राओं को कुचला; दो की मौत, एक गंभीर, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!