ऑस्कर पैलेस कॉलोनी की विकास अनुमति निरस्त: 800 करोड़ के प्रोजेक्ट में 418 प्लॉट्स के खरीदार उलझे; 4 हेक्टेयर बेनामी जमीन पर काट दी कॉलोनी, पर्दे के पीछे से खेल रहे थे बड़े बिल्डर
KHULASA FIRST
संवाददाता

कोर्ट से छुपाए थे तथ्य, दीपक सोनी की मेसर्स निश्चित इन्फ्राटेक प्रालि पर बड़ी कार्रवाई, प्लॉट्स की खरीद-बिक्री पर भी रोक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कनाड़िया तहसील अंतर्गत ग्राम हिंगोनिया में ऑस्कर पैलेस नामक आवासीय कॉलोनी प्रोजेक्ट को लेकर जिला प्रशासन की कॉलोनी सेल ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। बाजार कीमत से करीब 800 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की ऑस्कर पैलेस कॉलोनी की विकास मंजूरी निरस्त कर दी गई है। मेसर्स निश्चित इंफ्राटेक प्रालि के संचालक दीपक सोनी पिता रामबक्श सोनी को पूर्व में प्रदान की गई संशोधित कॉलोनी विकास अनुमति को सक्षम प्राधिकारी द्वारा तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
कनाड़िया क्षेत्र स्थित खसरा नंबर 222/1/1 एवं अन्य कुल 24 खसरों की कुल 26.023 हेक्टेयर भूमि पर इस आवासीय भूखंडीय परियोजना का निर्माण ऑस्कर पैलेस के नाम से प्रस्तावित किया गया था, जहां 418 प्लॉट काटे गए हैं।
कागजों पर मुंबई में रजिस्टर्ड मेसर्स निश्चित इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड में दीपक सोनी के साथ आशीष गुप्ता डायरेक्टर के रूप में दर्ज हैं, जबकि डेवलपमेंट टीम में आशीष साहू, आशीष जैन और प्रफुल्ल चौहान के नाम शामिल हैं। इसी कंपनी द्वारा पूर्व में रुचि लाइफ टाउनशिप का निर्माण भी कराया है।
शहर के भू-कारोबार में चर्चा है कि ऑस्कर और रुचि दोनों ब्रांड नेम इन्दौर के ही जाने-माने शातिर बिल्डर से जुड़े हुए हैं, जो कागजी दस्तावेजों से पूरी तरह बाहर रहकर पर्दे के पीछे से पूरा खेल संचालित कर रहे हैं।
स्थगन आदेश किया था पारित...विवादित भूमि के संबंध में शिकायतकर्ता लोकेश जैन ने अपने भाइयों और माता की बहन संतोषबाई के साथ मिलकर स्वयं की घोषणा, स्थायी निषेधाज्ञा और कब्जे को लेकर प्रधान जिला न्यायाधीश, इंदौर के समक्ष 16 जनवरी 2024 से दीवानी वाद दायर कर रखा था।
इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर द्वारा स्थगन आदेश भी पारित किया गया था। उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि अगली सुनवाई की तारीख तक डेवलपर भूमि के विकास के संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित है, किंतु तब तक विवादित संपत्ति के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण पर पूर्ण रोक रहेगी।
आम खरीदारों पर गहराया संकट
विकास अनुमति रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा संकट उन आम खरीदारों पर आ खड़ा हुआ है जिन्होंने गाढ़ी कमाई से यहां प्लॉट खरीदे थे। डेवलपर को जून 2024 में रेरा से भी मंजूरी मिल गई थी, जिसके दम पर धड़ल्ले से प्लॉट्स के सौदे किए जा रहे थे।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब यह कॉलोनी पूरी तरह से अवैध घोषित हो चुकी है और यहां किसी भी प्रकार का सौदा करना कानूनन अपराध है। विशेषकर वे ग्राहक पूरी तरह फंस चुके हैं जिनके प्लॉट्स इस 4 हेक्टेयर की विवादित जमीन के दायरे में आ रहे हैं।
कलेक्टर कार्यालय कॉलोनी सेल अधिकारियों ने विकास अनुमति रद्द करने की पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही अपर कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के माध्यम से वरिष्ठ पंजीयक, जिला इंदौर को निर्देश भेजे गए हैं कि ऑस्कर पैलेस की इस विवादित भूमि पर स्थित किसी भी भूखंड का क्रय-विक्रय और रजिस्ट्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। वहीं, शिकायतकर्ता पक्ष ने टीएंडसीपी और रेरा प्रशासन से भी गुहार लगाई है कि धोखाधड़ी से ली गई मंजूरियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करें।
शिकायत के बाद हुआ खुलासा
उच्च स्तरीय समिति के समक्ष अनुमोदन प्राप्त करने के उपरांत डेवलपर को यह संशोधित अनुमति दी गई थी, परंतु अब प्रशासनिक जांच में न्यायालय के तथ्यों को छुपाने का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले का खुलासा लोकेश जैन पिता अमृतलाल जैन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और दिए गए विवरण के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट में उनके परिवार की करीब 17.50 बीघा लगभग चार हेक्टेयर पैतृक जमीन शामिल है। ऑस्कर पैलेस के संचालकों ने बिना किसी सौदे या मालिकाना हक के इस भूमि पर भी टाउन एंड कंट्री प्लानिंग टीएंडसीपी से विकास मंजूरी ले ली, जबकि कॉलोनी का मुख्य फ्रंट और मुख्य प्रवेश द्वार शिकायतकर्ता की ही जमीन पर आ रहा है।
फर्जीवाड़े के जरिए हासिल की विकास अनुमति
प्रशासनिक पड़ताल में यह तथ्य उभरकर आया कि तृतीय जिला न्यायाधीश इंदौर के न्यायालय में 16 जनवरी 2024 से वाद प्रचलित होने के बावजूद डेवलपर द्वारा 21 फरवरी 2024 को विकास अनुमति प्राप्त कर ली गई। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट पाया गया कि डेवलपर द्वारा न्यायालय में लंबित वाद के तथ्यों को जानबूझकर छुपाया गया और फर्जीवाड़े के जरिए विकास अनुमति हासिल की गई।
तथ्यों को छुपाकर विकास अनुमति प्राप्त करने और उच्च न्यायालय के आदेश का अनुक्रम ध्यान में रखते हुए सक्षम प्राधिकारी एवं अपर कलेक्टर कॉलोनी सेल रिंकेश कुमार वैश्य ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए विकास अनुमति निरस्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
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