नोटरी वाली 50 हजार संपत्तियों के खाते खोलने की तैयारी: नगर निगम को 50 करोड़ अतिरिक्त राजस्व की उम्मीद; दो साल से नए खाते खोलने पर लगी थी रोक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
आर्थिक तंगी के बीच नगर निगम ने राजस्व बढ़ाने के लिए शहर में नोटरी पर दर्ज संपत्तियों के संपत्तिकर खाते खोलने की तैयारी शुरू कर दी है।
महापौर परिषद से मंजूरी मिलने के बाद बिल कलेक्टरों को ऐसी संपत्तियों को चिह्नित कर खाते खोलने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
निगम का अनुमान है कि शहर में करीब 50 हजार ऐसी संपत्तियां हैं, जिनके नोटरी के आधार पर लेन-देन तो हो रहे हैं, लेकिन अब तक संपत्तिकर के खाते नहीं खुले हैं। इन संपत्तियों के खाते खुलने के बाद निगम को करीब 50 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि नए खाते अब खुलेंगे, लेकिन संपत्तिकर की गणना सामान्य तौर पर वर्ष 2000 से की जाएगी। वहीं नगर निगम सीमा में वर्ष 2014 के बाद शामिल हुए 29 गांवों की संपत्तियों के लिए कर की गणना वर्ष 2014 से की जाएगी।
दो साल से नए खाते खोलने पर लगी थी रोक
नगर निगम में करीब दो साल पहले तक नोटरी पर हुई संपत्तियों के भी संपत्तिकर खाते खोले जाते थे और उनसे कर वसूला जाता था। बाद में नोटरी वाली नई संपत्तियों के खाते खोलने पर रोक लगा दी गई।
इस दौरान शहर में ऐसी संपत्तियों की संख्या लगातार बढ़ती गई, लेकिन इनके संपत्तिकर खाते नहीं खुलने के कारण निगम को इनसे अपेक्षित राजस्व नहीं मिल सका। पहले से खुले खातों पर हालांकि संपत्तिकर की वसूली जारी रही।
अब राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से निगम ने नई नोटरी वाली संपत्तियों के खाते खोलने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का फैसला किया है।
500 से ज्यादा कॉलोनियों में नोटरी पर संपत्तियां
निगम अधिकारियों के मुताबिक, शहर में करीब 500 कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां नोटरी के आधार पर संपत्तियों का लेन-देन होने की जानकारी है।
इन कॉलोनियों में ऐसी संपत्तियों की संख्या बड़ी है, जिनके संपत्तिकर खाते अब तक नहीं खुले हैं। बिल कलेक्टर अपने-अपने जोन में सर्वे कर ऐसी संपत्तियों की जानकारी जुटाएंगे और उनकी सूची तैयार करेंगे।
वर्ष 2000 से होगी कर की गणना
नोटरी वाली संपत्तियों के खाते भले ही अब नए सिरे से खोले जाएंगे, लेकिन निगम इन पर संपत्तिकर की गणना वर्ष 2000 से करेगा।
यदि कोई संपत्ति नगर निगम सीमा में वर्ष 2014 के बाद शामिल किए गए 29 गांवों में आती है, तो उस संपत्ति के लिए कर की गणना वर्ष 2014 से की जाएगी।
इससे पुराने वर्षों का बकाया भी सामने आएगा और निगम को अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।
खाता खोलने के लिए ये दस्तावेज जरूरी
नोटरी वाली संपत्ति का संपत्तिकर खाता खुलवाने के लिए संपत्ति मालिक को कुछ जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
इनमें संपत्ति मालिक का आधार कार्ड, बिजली का बिल, शपथ पत्र, गूगल मैप के जरिए संपत्ति की लोकेशन, नोटरी की सत्यापित प्रति शामिल हैं। बिल कलेक्टर अपने क्षेत्र में ऐसी संपत्तियों की जानकारी जुटाकर लोगों को खाता खुलवाने की प्रक्रिया की जानकारी देंगे।
पहले शिविर, फिर नोटिस की कार्रवाई
निगम पहले चरण में जोनवार शिविर लगाएगा। इन शिविरों के जरिए संपत्ति मालिकों को स्वयं संपत्तिकर खाता खुलवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसके बाद निगम उन संपत्तियों को चिह्नित करेगा, जिनके मालिकों को मौका दिए जाने के बावजूद खाते नहीं खुलवाए गए। ऐसी संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
50 हजार संपत्तियों से 50 करोड़ राजस्व का अनुमान
नगर निगम के राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि नोटरी वाली ऐसी संपत्तियों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनके संपत्तिकर खाते अब तक नहीं खुले हैं।
शहर में ऐसी करीब 50 हजार संपत्तियां होने का अनुमान है। इनके खाते खुलने से निगम को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। अगले वर्ष से ये खाते नियमित हो जाएंगे।
निगम का मानना है कि नोटरी वाली संपत्तियों को संपत्तिकर व्यवस्था में शामिल करने से एक ओर संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित होगा, वहीं दूसरी ओर निगम के राजस्व में भी बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
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