दुबई में सनपाल का रिमोट... जबलपुर में गुरुमुख का रोल: एलओसी के बाद भी चली जमीन की फाइल; अब हो रहा काले साम्राज्य का खुलासा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सतीश सनपाल की कहानी अब सिर्फ ऑनलाइन सट्टे तक सीमित नहीं रह गई है। दुबई में बैठे सनपाल, जबलपुर में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क और बुआ के बेटे गुरुमुख आहूजा के नाम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस रिकॉर्ड, हाई कोर्ट में हुई सुनवाई और राजस्व दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ने पर अब सवाल सिर्फ सट्टे का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम का खड़ा हो गया है, जो कथित तौर पर दुबई से जबलपुर तक फैला रहा।
सबसे बड़ा सवाल शहपुरा की उस जमीन को लेकर उठ रहा है, जिसके नामांतरण के लिए 4 नवंबर 2025 को आवेदन लगाया गया और बाद में राजस्व रिकॉर्ड में सनपाल का नाम दर्ज हो गया, जबकि उसके खिलाफ अगस्त 2022 में लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी होने की जानकारी पहले से रिकॉर्ड में है। ऐसे में जांच अब इस बात पर टिक गई है कि आवेदन किसने लगाया, दस्तावेज किसने जमा किए और पूरी प्रक्रिया में सनपाल की ओर से सामने कौन आया।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सनपाल ने जबलपुर में ऑनलाइन सट्टे के कारोबार की शुरुआत अपनी बुआ के बेटे गुरुमुख आहूजा के साथ की थी। बाद में सनपाल दुबई चला गया, लेकिन जबलपुर में नेटवर्क की कमान गुरुमुख के हाथों में रही। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर नेटवर्क को सक्रिय रखने और उससे जुड़े विवादों व दबावों को संभालने में भी उसकी भूमिका रही।
सूत्रों के मुताबिक आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट शुरू होते ही नेटवर्क और तेजी से सक्रिय हो जाता था। दावा है कि मास्टर आईडी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये पूरा संचालन दुबई से होता था, जबकि जबलपुर में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क को फैलाने का काम गुरुमुख और उससे जुड़े लोगों के जरिये चलता रहा। हालांकि इन दावों की जांच अभी जारी है।
तीन थानों की कार्रवाई, फिर भी नहीं टूटी चेन
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कोतवाली, मदन महल और गोरखपुर थाना क्षेत्रों में समय-समय पर सनपाल और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। छापेमारी हुई, गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के बाद कई आरोपी जमानत पर बाहर आ गए। जांच एजेंसियों का मानना है यही वजह रही कि कथित नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और स्थानीय स्तर पर उसकी पकड़ बनी रही।
अगस्त 2022 में जबलपुर पुलिस के प्रतिवेदन पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन द्वारा सनपाल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके करीब तीन साल बाद 4 नवंबर 2025 को शहपुरा की जमीन के नामांतरण का आवेदन सामने आने से कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक एलओसी अपने आप किसी व्यक्ति की जमीन खरीदने या नामांतरण पर रोक नहीं लगाता, लेकिन ऐसी स्थिति में पूरी राजस्व प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
इन सवालों का जरूर होना चाहिए खुलासा
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं कि आवेदन किसने लगाया? इसके साथ कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए? क्या पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिये पूरी प्रक्रिया हुई? अधिकृत प्रतिनिधि कौन था? दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ? नामांतरण आदेश किस अधिकारी ने पारित किया? जांच एजेंसियां पहले से वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की परतें खंगाल रही हैं।
पुलिस रिकॉर्ड में पहले भी सह-आरोपियों से नकदी बरामद होने और सनपाल को कथित नेटवर्क से जोड़ने वाली सामग्री का उल्लेख किया गया है। अब शहपुरा की जमीन का नामांतरण इस पूरे मामले की नई कड़ी बन गया है।
सूत्रों का दावा है कि महाकौशल क्षेत्र में कथित सट्टा नेटवर्क से अर्जित रकम को रियल एस्टेट और अन्य कारोबारों में लगाने की भी जांच चल रही है। हालांकि इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
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